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विशेष राज्य पर तेज हुई सियासत:सरकार की फिर से मांग- बिहार को मिले स्पेशल स्टेटस; लालू बोले- 2003 में ही राबड़ी देवी ने की थी मांग

पटना13 दिन पहलेलेखक: बृजम पांडेय
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। (फाइल फोटो)

नीति आयोग की SDG रिपोर्ट के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई हैविशेष राज्य के दर्जे की मांग की राजनीति में JDU के साथ साथ उनकी सहयोगी दल भी कूद पड़े हैं। वहीं, विपक्ष इसी बहाने बिहार के NDA सरकार को आइना दिखा रहा है। शुरुआत JDU के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने किया। फिर विशेष पर सबने विशेष प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि बिहार विभाजन के उपरांत प्राकृतिक संपदाओं का अभाव हो गया है। बिहारवासियों पर प्राकृतिक आपदाओं का लगातार प्रहार होता रहा है। इसके बावजूद नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार अपने कुशल प्रबंधन से राज्य में विकास की गति तेज करने में लगी है।

अन्य राज्यों की बराबरी संभव नहीं

कुशवाहा ने दूसरा ट्वीट भी किया। उन्होंने लिखा है कि वर्तमान दर पर अन्य राज्यों की बराबरी संभव नहीं है। अत: निवेदन है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने पर विचार करें। तब पूर्व CM जीतनराम मांझी ने कहा कि कम संसाधनों के बावजूद नीतीश कुमार ने राज्य की बदतर कानून व्यवस्था और बेहाल शिक्षा महकमे को दुरुस्त करने में ताकत लगा दी है। आधारभूत संरचना को ठीक करने के लिए विशेष राज्य के दर्जे की जरूरत है। डबल इंजन सरकार में विशेष दर्जा नहीं मिला तो कभी नहीं मिलेगा।

लालू प्रसाद ने भी साधा निशाना
RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद ने SDG रिपोर्ट को लेकर बिहार सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नीतीश-भाजपा के 16 वर्षों के अथक प्रयास और नकारात्मक राजनीति का ही प्रतिफल है कि बिहार नीचे से शीर्ष पर है। कथित जंगलराज का रोना रोने वाले पूर्वाग्रह से ग्रस्त जीव आजकल ज़ुबान पर ताला जड़ बिलों में छुपे है। बिहार का सत्यानाश हो जाए। लेकिन उन लोगों को सामाजिक आर्थिक न्याय गवारा नहीं। वहीं, कांग्रेस के विधान पार्षद प्रेमचंद्र मिश्रा ने कहा कि जदयू विशेष दर्जे की मांग कर भ्रम जाल फैला रहा है। BJP-JDU 16 साल से सत्ता में हैं, फिर भी राज्य का विकास नहीं हुआ। विशेष दर्जे की मांग ढोंग से अधिक कुछ नहीं है।

वित्त आयोग की अनुशंसा के बाद नीतीश कुमार ने उठाया था मामला

14वें वित्त आयोग की अनुशंसा के बाद विशेष राज्य का दर्जा नॉर्थ-ईस्ट और पहाड़ी राज्यों के अलावा किसी और को नहीं मिल सकता है। विशेष पैकेज दिया जा सकता है। जुलाई 2017 के बाद गाहे बगाहे CM नीतीश कुमार विशेष राज्य के दर्जे का मुद्दा उठाते रहे हैं। लेकिन उतनी मजबूती से नही। 15 जून 2019 को नीति आयोग की संचालन परिषद में हिस्‍सा लेने गए CM नीतीश कुमार ने कहा था कि तर्कसंगत आर्थिक रणनीति वही होगी जो निवेश और हस्‍तांतरण पद्धति को प्रोत्‍साहित करे जिससे पिछड़े राज्‍यों को एक निर्धारित समय सीमा में विकास के राष्‍ट्रीय औसत तक पहुंचने में मदद मिले। हमारी विशेष राज्‍य के दर्जे की मांग इसी पर आधारित है। हमने लगातार केंद्र सरकार से बिहार को विशेष राज्‍य का दर्जा दिए जाने की मांग की है। 21 फरवरी 2021 को CM नीतीश कुमार ने नीति आयोग की बैठक में विशेष राज्य का दर्जा की मांग खुल कर तो नहीं की थी, लेकिन उन्होंने बैठक में इस बात की चर्चा जरूर की थी कि पिछले नीति आयोग की बैठक की तरह वे बिहार के लिए विशेष दर्जा की मांग के साथ-साथ राज्य के हित से जुड़े अन्य मुद्दे उठाते रहेंगे।

नीतीश कुमार ने धरना से लेकर थाली तक पिटवाया था
इससे पहले जब 2013 में नीतीश कुमार और BJP अलग हो गये थे। तब 1 मार्च 2014 में नीतीश कुमार ने CM रहते विशेष दर्जा की मांग पूरा करने के लिए बिहार बंद का आयोजन किया था। इस दौरान CM नीतीश कुमार ने गांधी मूर्ति के सामने दिनभर सत्याग्रह किया था। वे मुख्यमंत्री आवास से पैदल ही गांधी मैदान पहुंचे थे। तब नीतीश ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार और BJP को चेताया था कि वे बिहार के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे। उसी दिन शाम में नीतीश कुमार ने 7 बजे लेकर 7 बजकर 5 मीनट तक थाली भी पिटवाया था।

राबडी देवी ने 2003 में ही मांगी थी स्पेशल स्टेटस

RJD सुप्रीमो लालू यादव ने 9 मार्च 2018 को द्वीट किया था कि 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी जी पटना आये थे। मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने प्रधानमंत्री के सामने बिहार को विशेष दर्जा देने की मांग पूरे तथ्यों के साथ पुरजोर तरीके से उठायी थी। वाजपेयी साहब इससे सहमत हो गये थे। क्योंकि उन्होंने ही 2000 में बिहार का बंटवारा किया था। उन्हें इसकी जानकारी थी। लेकिन जब वाजपेयी जी एयरपोर्ट लौटने लगे तो रेल मंत्री नीतीश उनकी कार में लटक लिये। उन्होंने कहा कि अगर आप बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दे देंगे तो हमारी राजनीति चौपट हो जाएगी और कभी भी हमारी सरकार नहीं बनेगी। इस तरह नीतीश की संकीर्ण और नकारात्मक सोच की वजह से बिहार का हक मारा गया।

इसलिए नहीं मिल सकता दर्जा

अब इस विशेष राज्य के दर्जे पर हो रही राजनीति को लेकर दैनिक भास्कर ने अर्थशास्त्री अजय कुमार झा से बात की। अजय झा ने बताया कि ये सिर्फ कोरी राजनीति हो रही है। अपनी राजनीति को चमकाने के लिए ये बयान दिए जा रहे हैं। जो नेता विशेष राज्य का दर्जा मांग रहें हैं। वो भी और जो देने वाले है वो भी, इस बात को समझ रहे है कि विशेष राज्य का दर्जा नही मिल सकता है। यदि, बिहार जैसे राज्य को विशेष राज्य का दर्जा मिल जाएगा तो 10-12 राज्य और खड़े हो जाएंगे कि उन्हे भी स्पेशल स्टेटस मिले। ऐसे में 14 वित्त आयोग ने जब अनुशंसा कर दी है तो इसको फिर वापस लाने के लिए कैटेगरी बनाना होगा, उसके मुताबिक कानून बनाया जाएगा। जिसमें बिहार जैसे राज्य शामिल होंगे। मुझे नहीं लगता है सिर्फ बिहार के लिए केंद्र सरकार इतना बड़ा रिस्क लेगी। यदि बिहार विशेष राज्य का दर्जा मिलता है तो मुझे खुशी होगी।