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नीतीश सरकार से लोजपा की नाराजगी:लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान बोले- राज्य के मुद्दे उठाते रहेंगे, भले ही किसी को बुरा लगे; हम राजधर्म का पालन कर रहे

पटनाएक वर्ष पहले
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लोजपा दफ्तर में पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में चिराग पासवान ने कहा कि चुनाव हमारी प्राथमिकता नहीं, बल्कि कोरोना संक्रमण और बाढ़ को लेकर चिंता है। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
लोजपा दफ्तर में पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में चिराग पासवान ने कहा कि चुनाव हमारी प्राथमिकता नहीं, बल्कि कोरोना संक्रमण और बाढ़ को लेकर चिंता है। (फाइल फोटो)
  • लोजपा की बैठक में नीतीश सरकार और जदयू से नाराजगी साफ दिखी
  • पासवान बोले- उन गरीबों की फिक्र है, जो करोड़ों रुपए खर्च कर बच्चों को बाहर पढ़ने भेजते हैं

नीतीश सरकार को लेकर लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के तेवर गरम हैं। शनिवार को पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में चिराग ने कहा, 'राज्य के मुद्दे आगे भी उठाते रहेंगे। इसे कोई आलोचना समझे तो फिर, कुछ नहीं कह सकते। पार्टी राज्य के लोगों के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाती रहेगी। हम राजधर्म का पालन करते रहेंगे। पार्टी के तमाम मुद्दों पर विचार करने के लिए जल्द संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई जाएगी।

जनता के हित में आवाज उठाने को कोई आलोचना समझना ठीक नहीं
चिराग के तेवरों से तय हो गया है कि बिहार सरकार और जदयू से उनके रिश्तों में सुधार की फिलहाल कोई गुंजाइश नहीं है। न सिर्फ उनकी नाराजगी बरकरार है, बल्कि पहले से ज्यादा आक्रामक नजर आ रहे हैं। चिराग ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि जनता के हित में आवाज उठाने को कोई अपनी आलोचना मान ले। उन्होंने कहा, 'जनता की बात हम नहीं उठाएंगे तो कौन उठाएगा? जनता ने अपने हितों की जिम्मेदारी हमें सौंपी है। उससे हम कैसे मुंह मोड़ सकते हैं?

पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा- आप भी राजधर्म निभाइए
चिराग ने पार्टी पदाधिकारियों से राजधर्म निभाने की अपील की। उन्होंने कहा, 'जनहित के मुद्दों से पार्टी पीछे हटने वाली नहीं है। हमारी प्राथमिकता चुनाव नहीं है, बल्कि कोरोना संक्रमण और बाढ़ को लेकर चिंता है। हमारी फिक्र उन गरीबों के लिए है जो अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए कोटा भेजकर करोड़ों रुपए खर्च करते हैं। सवाल यह है कि हम बिहार में ही उन्हें सुविधाएं क्यों नहीं दे सकते? हम इसके लिए काम करना चाहते हैं।

चिराग ने बाढ़ और स्वास्थ्य व्यवस्था पर नीतीश से पूछा था- 15 साल में क्या बदलाव किया?
पिछले कुछ दिनों से चिराग लगातार नीतीश पर हमले कर रहे हैं। कोरोना और बाढ़ को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए थे। चिराग ने कहा था, 'नीतीश कोरोना संक्रमण और बाढ़ से निपटने में विफल रहे हैं। अस्पतालों से लगातार डराने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। नीतीश 15 साल से सत्ता में हैं, इसके बावजूद बिहार में क्या बदलाव आया?

जहां जदयू और भाजपा समय पर बिहार विधानसभा चुनाव चाहते हैं वहीं चिराग ने यह कहकर परेशानी खड़ी कर दी कि वे कोरोनाकाल में चुनाव नहीं चाहते हैं। चिराग के बयानों से जदयू और भाजपा लगातार असहज महसूस कर रहे हैं।

चिराग की बयानबाजी पर जदयू काे आपत्ति
चिराग के बयानों पर जदयू कुछ दिन तो चुप रही, लेकिन पिछले दिनों जदयू नेता ललन सिंह ने तो यहां तक कह दिया था कि चिराग जिस डाल पर बैठे हैं उसी को काट रहे हैं।

जदयू के अंदर से यह बात लगातार उठ रही है कि लोजपा साथ नहीं भी रही तो भी एनडीए आसानी से विधानसभा चुनाव जीत जाएगी। वहीं, भाजपा का कहना है कि एनडीए में सब कुछ ठीक है। तीनों दल मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।

कहीं चिराग आउट और मांझी इन की स्थिति न बन जाए
बिहार में जिस तरह सियासी समीकरण बन रहे हैं उसे देखते हुए इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि लोजपा एनडीए से बाहर हो जाए और जीतन राम मांझी की एंट्री हो जाए। चाहे कुछ भी हो, एनडीए यह जरूर चाहेगी कि चुनाव के मद्देनजर उसके साथ एक दलित चेहरा जरूर हो।

सूत्रों के मुताबिक, चिराग के चलते असहज हुई स्थिति को लेकर ही जदयू ने मांझी को अपने पाले में लाने का फैसला किया है। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि मांझी कब एनडीए में शामिल होंगे। लेकिन, इतना तय है कि देर-सवेर मांझी पाला बदलेंगे और महा गठबंधन का दामन छोड़कर एनडीए में शामिल हो जाएंगे।

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