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बिहार के शिक्षकों की दो मांगें:यूनिवर्सिटी-कॉलेजों की तरह तुरंत स्कूलों में भी गर्मी की छुट्टी घोषित हो, कोरोना से जान गंवाने वाले कर्मियों को मुआवजा मिले

पटना5 महीने पहले
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बिहार में हर रोज कोरोना के नए मामले मिलने की संख्या बढ़ रही है। बीते चार दिनों में हर रोज 13 हजार से अधिक नए केस आ रहे हैं। इन्हें ही देखते हुए राजभवन ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 1 मई से ग्रीष्मावकाश का निर्देश दे दिया है। हालांकि सरकारी स्कूल अभी भी खुले हुए हैं। इनमें प्रधानाध्यापक, शिक्षक और अन्य कर्मी 25 प्रतिशत उपस्थिति के साथ आ रहे हैं। इसके विरोध में अब आवाज भी उठने लगी है। आल इंडिया फेडरेशन ऑफ एजुकेशन एसोसिएशन (एआईएफईए) ने शिक्षकों के लिए भी समय से पहले ग्रीष्मावकाश देने और संक्रमण की चपेट में आकर जान गंवाने वाले कर्मियों को मुआवजा देने की मांग की है।

आम लोगों को घरों में रहने की हिदायत, शिक्षकों को स्कूल आने की मजबूरी

एसोसिएशन ने कहा है कि विद्यालयों में पठन-पाठन बंद है, मगर शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मी एवं प्रधानों को आने की बाध्यता होने के कारण उनमें तेजी से संक्रमण फैल रहा हैं। क्योंकि उनमें अधिकांश कर्मियों द्वारा सार्वजनिक परिवहन का उपयोग किया जाता है। एक तरफ तो सरकार द्वारा विभिन्न माध्यमों से लोगों को घर में रहने की हिदायत दे रही है और लगातार इसके लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ अकारण शिक्षकों को विद्यालय आने का आदेश जारी कर रही है। जिस वजह से एक-दूसरे के संपर्क में आकर ना सिर्फ वो बल्कि उनके परिजन भी संक्रमित हो रहें हैं।

150 से अधिक कर्मियों के जान गंवाने का दावा

एसोसिएशन के अनुसार सरकार के आदेश पर गत् वर्ष की तरह इस वर्ष भी नियोजित शिक्षक एवं पुस्तकालयाध्यक्ष अन्य कर्मियों की भांति कोरोना वारियर्स की तरह विभिन्न कोरोंटाईन और कोविड केयर सेंटर पर पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आज हजारों शिक्षक एवं पुस्तकालयाध्यक्ष कोरोना संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें कई गंभीर हालत में अस्पतालों में ईलाजरत है। अब तक लगभग 150 से अधिक शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों ने अपनी जान गंवाई है। नियोजित शिक्षक एवं पुस्तकालयाध्यक्ष राज्य सरकार के अनुसार भले ही पंचायती राज एवं नगर निकायों के कर्मी है, मगर वे भी राज्य के नागरिक व राज्य में ही कार्यरत हैं। सरकार के आदेश पर ही कार्य कर रहें हैं। ऐसे में उनके साथ इस प्रकार का सौतेला व्यवहार कहीं से उचित नहीं है।

एसोसिएशन की सरकार से दो मांगें

इन स्थितियों को देखते हुए एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव शैलेन्द्र कुमार शर्मा "शैलू" एवं राज्य पार्षद सह पूर्व सदस्य, शैक्षिक परिषद जयनंदन यादव ने राज्य सरकार से दो मांगें की हैं।

  • कोरोना संक्रमण से मृत नियोजित शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों को भी राज्य के अन्य कर्मियों की भांति 50 लाख रुपए मुआवजा, आश्रितों को सरकारी नौकरी एवं विशेष पारिवारिक पेंशन दिया जाए।
  • शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मियों एवं उनके परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अविलंब समय से पूर्व ग्रीष्मावकाश की छुट्टी घोषित की जाए।
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