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विधानसभा में मारपीट:संजय सरावगी और जनक सिंह के साथ राजद के MLA रामवृक्ष सदा ने की हाथापाई, डिप्टी CM और तेजस्वी के बीच कहासुनी

पटनाएक वर्ष पहले
विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा के चैंबर के बाहर धरना देते विपक्ष के विधायक।
  • नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने विपक्ष के सदस्यों के साथ किया राजभवन मार्च
  • RJD विधायक रामवृक्ष सदा का आरोप- जातिसूचक शब्दों का किया गया इस्तेमाल

विधानमंडल के बजट सत्र का 15वां दिन हंगामेदार रहा। विधानसभा के अंदर शनिवार को कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक आपस में भिड़ गए। BJP विधायक संजय सरावगी, डॉ. संजीव और उप सचेतक जनक सिंह के साथ RJD के विधायक रामवृक्ष सदा ने हाथापाई की। सदन से बाहर आने के बाद अलौली से RJD विधायक रामवृक्ष सदा ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी के भाषण के दौरान सत्ता पक्ष के विधायक हंगामा करने लगे। मना करने पर उन्होंने अपशब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह भी कहा कि तीनों विधायकों ने जातिसूचक शब्द से संबोधित किया। उन्होंने बताया कि तेजस्वी यादव से आदेश लेने के बाद SC-ST एक्ट के तहत केस दर्ज कराएंगे। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और डिप्टी CM तारकिशोर प्रसाद के बीच कहासुनी हो गई।

अलौली से RJD विधायक हैं रामवृक्ष सदा।
अलौली से RJD विधायक हैं रामवृक्ष सदा।

डिप्टी CM पर तंज के बाद हंगामा

दरअसल, तेजस्वी यादव स्वास्थ्य बजट के कटौती प्रस्ताव पर भाषण दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने शराबबंदी का जिक्र करते हुए डिप्टी CM तारकिशोर प्रसाद पर तंज कस दिया। उन्होंने कहा कि CM का पद तो संवैधानिक है। लेकिन डिप्टी CM का पद गैर संवैधानिक है। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक हंगामा करने लगे। विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा की बार-बार अपील के बावजूद विधायक नहीं मानें। विपक्ष के विधायक वेल के पास आ गए और सत्ता पक्ष के विधायकों के साथ भिड़ंत हो गई।

क्या बोले तेजस्वी

कार्यवाही शुरू होने के बाद तेजस्वी यादव ने कहा कि उप मुख्यमंत्री का पद संवैधानिक नहीं है, इस पर आपत्ति क्यों है। आसान से निर्देश मिलने के बाद भी मुझे बोलने से रोक गया। मेरे पिता और मेरे दादा के उम्र के लोग यहां हैं, लेकिन मैं संवैधानिक पद पर हूं। कोई यहां बैठ कर आसान को गाइड करे, यह उचित नहीं है। वहीं, इस पर जवाब देते हुए सदन में संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि तेजस्वी यादव के बयान का हम खंडन नहीं कर सकते हैं। सरकार की मंशा कभी भी आसन को डिक्टेट करने की नहीं होती है। आसान सदन की मर्यादा का प्रतीक है, सरकार हर ख्याल से आसान की मर्यादा बनाए रखना चाहती है। उत्तेजना और आवेश में कुछ बातें होती हैं।

राज्यपाल से की मुलाकात

विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा ने कहा कि सदन में हुई मारपीट की घटना से दुखी हूं। सदन में विमर्श किया जाता है, यहां सभी को बोलने का अधिकार है। वेल में आना और एक दूसरे पर अनर्गल आरोप लगाना, यह उचित नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि जिस दल के विधायक ने इस तरह का व्यवहार दिखाया है, उस दल के नेता उनको सदन के व्यवहार को बताएं।दूसरी पाली की कार्यवाही में तेजस्वी यादव को विधानसभा में 50 मिनट तक बोलने का समय दिया गया था। विपक्ष के सभी विधायकों ने अपना समय नेता प्रतिपक्ष को दिया था। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष ने तेजस्वी यादव ने विपक्ष के विधायकों के साथ राजभवन मार्च किया। राज्यपाल से मुलाकात की। पहली पाली की कार्यवाही के दौरान मंत्री राम सूरत राय के मामले को लेकर विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ।

धरने पर बैठे विपक्ष के विधायक

हंगामे और नारेबाजी के बाद विधानसभा की कार्यवाही 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी थी। इसके बाद विपक्ष के विधायक विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा के चैंबर के बाहर धरने पर बैठ गए। तेजस्वी और तेज प्रताप यादव ने चैंबर में अध्यक्ष के साथ मुलाकात की।सदन में तेजस्वी ने कहा कि मंत्री राम सूरत राय के खिलाफ पूरा सबूत है। विपक्ष की बात सदन को सुननी होगी। साक्ष्य दे रहा हूं, मंत्री पर सरकार कार्रवाई करे। इस पर डिप्टी CM तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि यह ठीक नहीं है। बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव।

मंत्री पर आसन को गाइड करने का आरोप

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान तेजस्वी यादव ने आसन पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के मंत्री आसन को गाइड कर रहे हैं। सदन में गंभीरता नहीं है। इस तरह से हाउस में रहना बेकार है, कोई औचित्य नहीं है। इस पर जवाब देते हुए विधानसभा के अध्यक्ष विजय सिन्हा ने कहा कि कोई भी मंत्री सदन को गुमराह नहीं कर सकता है। इससे पहले राजद की विधायक रेखा देवी का कार्य स्थगन प्रस्ताव लाया। इसका समर्थन करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि शराबबंदी मामले में कार्य स्थगन प्रस्ताव को मंजूर किया जाए, मेरे पास पूरा सबूत है।

रेखा देवी के प्रस्ताव पर ही हंगामा, उनपर शराबबंदी कानून में केस

पटना के मसौढ़ी से राजद विधायक रेखा देवी ने सदन में कार्य स्थगन प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा कि बिहार में आधिकारिक शराबबंदी के बावजूद मंत्री ही इसकी बिक्री करवा रहे हैं। गरीब लोगों की गिरफ्तारी हो जाती है लेकिन सत्ता में बैठे लोगों पर कार्रवाई नहीं होती। उनके इस प्रस्ताव के बाद सत्ता पक्ष की ओर से कहा जाने लगा कि यह प्रस्ताव रेखा देवी लेकर आई हैं, जिनपर खुद ही शराबबंदी कानून के अंतर्गत केस दर्ज है। रेखा देवी के खिलाफ धनरुआ पुलिस स्टेशन में मद्य निषेध कानून के अंतर्गत कांड संख्या 356/2017 दर्ज है। हालांकि इस मामले में उनपर अभी तक चार्ज नहीं लगाया गया है। इसके अलावा भी रेखा देवी पर IPC की दो धाराओं के अंतर्गत मामले दर्ज हैं।

विधानसभा के गेट पर हंगामा करते RJD के विधायक।
विधानसभा के गेट पर हंगामा करते RJD के विधायक।

दो दिन के भीतर माफी मांगे तेजस्वी

उधर, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री राम सूरत राय ने सदन में कहा कि दो दिन के भीतर तेजस्वी यादव अगर माफी नहीं मांगते हैं तो उनके खिलाफ मानहानी का दावा करूंगा। उन्होंने कहा कि मेरे ऊपर लगाए गए आरोप गलत है। तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार के मंत्री राम सूरत राय को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि मुजफ्फरपुर में राम सूरत राय की एक जमीन है, जिस पर स्कूल चलता है। वहां कुछ दिन पहले भारी मात्रा में शराब बरामद हुई थी, उस स्कूल के संस्थापक खुद मंत्री रामसूरत राय हैं।

सदन के बाहर प्रदर्शन करते भाकपा(माले) के विधायक।
सदन के बाहर प्रदर्शन करते भाकपा(माले) के विधायक।

स्वास्थ्य मंत्री इस्तीफा दो की नारेबाजी

विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कोरोना जांच में फर्जी आंकड़े और नंबर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि फर्जी आंकड़े को जांच कराने के लिए कमिटी बननी चाहिए। इसका जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा कि सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। जांच के बाद कार्रवाई की गई है। जमुई से शिकायत आने के बाद वहां कार्रवाई की गई। किसी अन्य जगह ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं आई है। विपक्ष के सदस्य वेल में आकर स्वास्थ्य मंत्री से इस्तीफे की मांग की। मंगल पांडेय इस्तीफा दो की जमकर नारेबाजी हुई। इसके बाद विपक्ष ने वॉक आउट भी किया।

विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा के चैंबर के पास विपक्ष के विधायक।
विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा के चैंबर के पास विपक्ष के विधायक।

अतिथि शिक्षकों का उठा मामला

विधान परिषद में CPI के MLC संजय कुमार सिंह ने मांग की है कि राज्य के विश्वविद्यालयों में कार्यरत अट्ठारह सौ अतिथि शिक्षकों की सेवा नियमित करने की मांग की। विधान पार्षद संजीव सिंह, रामचंद्र पूर्वे और नवल यादव ने भी पूरक प्रश्न किया। सभी ने अतिथि शिक्षकों की सेवा नियमित करने की मांग की। इसके जवाब में शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि अतिथि शिक्षकों की सेवा विस्तार 65 वर्ष करने का कोई विचार सरकार नहीं रखती है। उधर, संजीव सिंह ने 12 वर्षों से लाइब्रेरियन की नियुक्ति नहीं होने का भी मामला उठाया। इसके जवाब में शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि वर्ष 2020 में नई नियमावली गठित हुई है। पुस्तकालयाध्यक्ष की आवश्यकता का आकलन करते हुए पुस्तकालयाध्यक्ष पात्रता परीक्षा का आयोजन करने के बाद नियुक्ति की जाएगी। पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि 31 मई 2021 तक जितनी भी जिला परिषद की जमीन पर कब्जा है उसकी पहचान कर घेराबंदी कराई जाएगी। पंचायत सरकार भवन को कंप्यूटराइज किया जाएगा और वहां सीसीटीवी कैमरा लगाया जाएगा।