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बिहार विधानसभा में बवाल:विधायकों ने स्पीकर को बंधक बनाया, मार्शल ने विधायकों को उठाकर सदन से बाहर फेंका; एक MLA बेहोश

पटनाएक वर्ष पहले
  • पुलिस अधिनियम बिल 2021 को वापस लेने की मांग पर अड़ा विपक्ष
  • स्पीकर विजय सिन्हा को सदन की कार्यवाही 4 बार स्थगित करनी पड़ी
  • विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच विधानसभा में विधेयक पास

विधानमंडल के बजट सत्र के 20वें दिन मंगलवार को पुलिस अधिनियम बिल 2021 के विरोध में जबर्दस्त बवाल हुआ। 4 बार कार्यवाही स्थगित होने के बाद विपक्ष के विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा को उनके ही चैंबर में बंधक बना लिया। DM और SSP के साथ धक्का-मुक्की की गई। चैंबर के पास विपक्ष के विधायक पुलिसकर्मियों से भी भिड़ गए। इसके बाद एक-एक कर विपक्ष के विधायकों को सुरक्षाकर्मी बाहर फेंकने लगे। इस दौरान मकदुमपुर से राजद विधायक सतीश कुमार दास बेहोश हो गए। बताया जा रहा है कि विधानसभा के इतिहास में पहली बार इस तरह का बवाल हुआ। हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद CM नीतीश कुमार के भाषण के बाद बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक 2021 को पास कर दिया गया। उसके बाद सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई। विधानसभा के अध्यक्ष विजय सिन्हा ने कहा कि विधानसभा में इस तरह की हिंसा आज से पहले कभी नहीं हुई। आज विपक्ष ने अभूतपूर्व हंगामा किया। इस हंगामे में सत्ता पक्ष के सदस्यों ने संयम का परिचय दिया। स्पीकर ने कहा कि हंगामा करने वाले विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस विधेयक पर हंगामा है क्यों बरपा

विपक्ष के विधायक को मार्शल ने विधानसभा के बाहर फेंका।
विपक्ष के विधायक को मार्शल ने विधानसभा के बाहर फेंका।

स्पीकर के चैंबर के बाहर पुलिस बल तैनात

राजद और कांग्रेस की 7 महिला विधायकों ने आसन को घेर लिया। लगातार घंटी बजती रही, लेकिन महिला विधायकों ने आसन के पास से हटने से इनकार कर दिया। इससे पहले कार्यवाही शुरू होने के बाद डॉ. प्रेम कुमार सभापति बने, लेकिन विपक्ष के करीब 12-13 विधायक वेल के पास पहुंच गए और बिल फाड़ दिया। फिर कार्यवाही को 5:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा चैंबर में ही बैठे रहे। बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।

विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा के चैंबर के बाहर तैनात पुलिसकर्मी।
विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा के चैंबर के बाहर तैनात पुलिसकर्मी।

विपक्ष के विधायकों ने टेबल को तोड़ दिया

इससे पहले विधानसभा में विपक्ष के सदस्यों के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही चार बार स्थगित करनी पड़ी। इस दौरान विपक्षी सदस्य वेल में आ गए, बिल की कॉपी फाड़ दी, नारेबाजी करने लगे। यही नहीं, वे रिपोर्टर टेबल पर चढ़ गए, इतने से संतोष नहीं हुआ तो टेबल को तोड़ दिया। इस बीच जब दूसरी बार कार्यवाही स्थगित हुई तो सत्तापक्ष के सभी सदस्यों के सदन से चले जाने के बाद राजद के भाई वीरेंद्र ने रिपोर्टर टेबल पर चढ़ कर इस बिल के विपक्ष में वोटिंग करा दी।

हंगामा कर रहे विपक्षी विधायकों को मार्शलों ने काबू करने की कोशिश की।
हंगामा कर रहे विपक्षी विधायकों को मार्शलों ने काबू करने की कोशिश की।

वेल के पास फाड़ी कॉपी

पुलिस विधेयक के विरोध में विपक्ष के विधायकों ने जमकर नारेबाजी की। RJD के विधायकों ने वेल के पास पुलिस अधिनियम बिल 2021 की कॉपी फाड़ दी। विपक्ष की ओर से कार्यस्थगन प्रस्ताव को अमान्य कर दिया गया। सदन के अंदर विपक्ष के कई विधायक पोस्टर लेकर पहुंचे थे। मार्शल विधायकों से पोस्टर वापस लेने लगे। सदन में हंगामा बढ़ता देख विधानसभा अध्यक्ष ने पहले 12 बजे तक कार्यवाही स्थगित की। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर विपक्ष के विधायकों ने फिर से हंगामा किया।

राजद MLA खुद बन गए स्पीकर, करा दी वोटिंग

CM के सामने ही कुर्सी पटकने लगे विधायक

दुबारा कार्यवाही शुरू होते ही डिप्टी CM तारकिशोर प्रसाद की ओर से CAG रिपोर्ट पेश करने के दौरान RJD विधायकों ने जमकर हंगामा किया। विपक्ष के कई विधायक कुर्सी पटकने लगे। बवाल बढ़ता देख बड़ी संख्या में मार्शल सदन के अंदर पहुंच गए। वे टेबल पकड़े हुए नजर आए, लेकिन RJD के कुछ विधायक टेबल को जबरन हटाते दिखे। हंगामा बढ़ता देख विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। 2 बजे जब कार्यवाही दुबारा शुरू हुई तो पुलिस अधिनियम बिल के विरोध में फिर हंगामा होने लगा। इस दौरान CM नीतीश कुमार भी सदन में मौजूद थे।

CM ने कहा- पुलिस को ताकत देनी होगी

सदन में नीतीश कुमार ने कहा कि सदन की कार्यवाही को बाधित करने की कोशिश की जा रही है। BMP का नामांकरण बिहार सशस्त्र पुलिस बल किया गया है। पुलिस बल को नई जिम्मेवारी देंगे। उन्होंने कहा कि कहीं अपराध होने पर पुलिस क्या करेगी, उस वक्त परमिशन लेने लगेगी? यह बिल्कुल गलत है। उन्होंने पूछा कि विपक्ष ने इस बिल को पढ़ा है, कभी देखा है? हम पुलिस को संरक्षण की भूमिका देंगे तो उन्हें ताकत भी देनी होगी। अगर कोई अधिकार का गलत इस्तेमाल करेगा तो उसपर कार्रवाई की पूरी व्यवस्था की गई है। अधिकारियों को पहले ही इसे मीडिया के सामने बता देना चाहिए था। कई राज्यों में भी यह कानून है। यह लोगों को कष्ट देने वाला नहीं, रक्षा करने वाला कानून है। विपक्ष ने जो किया, वैसा दृश्य आज तक नहीं देखा। विरोध कर सकते हैं, प्रदर्शन कर सकते हैं। लेकिन इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए था। इस पर बहस होनी चाहिए थी।

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