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गोरखपुर में बिहार के 2 'मजबूर' की मौत, 3 नाजुक:कुशीनगर में ढाढा चौराहे के पास फोरलेन के डिवाइडर से टकराई ऑटो, फिर ट्रक ने परखच्चे उड़ाए; 2 सगे भाइयों की मौत

पटनाएक महीने पहले
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औराई में पति की मौत के बाद रोती-बिलखती संतोष की पत्नी और मां। - Dainik Bhaskar
औराई में पति की मौत के बाद रोती-बिलखती संतोष की पत्नी और मां।
  • मुंबई से मुजफ्फरपुर आ रहे थे पांचों युवक
  • पिछले लॉकडाउन में भी मृतक घर आए थे

गोरखपुर में मुंबई से ऑटो पर बिहार के मुजफ्फरपुर आ रहे दो सगे भाइयों की मौत हो गई, जबकि 3 लोग हादसे में गंभीर रूप से घायल हैं। मृतकों की पहचान औराई निवासी धरहरवा पंचायत के चंदवारा निवासी संजय साह उर्फ गांधी और संतोष साह के रूप में की गई है। कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए दोनों अपने दोस्तों के साथ घर लौट रहे थे। हादसा बिहार और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर स्थित कुशीनगर के पास हुआ है। घायलों में शिवहर जिला के हरपुर धनकौल निवासी रामबाबू उर्फ टोनी, औराई के चंदवारा के विनोद साह, जनार पंचायत के जिवाजोर निवासी बेचन महासेठ की स्थिति नाजुक है। उनका गोरखपुर के अलग-अलग अस्पताल में इलाज चल रहा है।

ऑटो के परखच्चे उड़े।
ऑटो के परखच्चे उड़े।

डिवाइडर से टकराई ऑटो फिर ट्रक ने मार दी टक्कर
कुशीनगर के हाता कोतवाली इलाके के ढाढा चौराहे के पास ऑटो फोरलेन के डिवाइडर से टकरा गई थी। जब तक ड्राइवर संभल पाता तब तक पीछे से आ रहे ट्रक की ठोकर से ऑटो के परखच्चे उड़ गए। घटना देर रात 2 बजे की है। संतोष और संजय के गांव के ही विनोद साह ने इस बात की जानकारी घरवालों को दी। इसके बाद स्थानीय लोगों ने जब देखा तो घायलों को अस्पताल ले गए।

दोस्तों के साथ संतोष और संजय की फाइल फोटो।
दोस्तों के साथ संतोष और संजय की फाइल फोटो।

दो सगे भाइयों की मौत

हादसे में औराई निवासी संतोष साह और संजय साह की मौत हो गई है। दोनों सगे भाई थे। संतोष और संजय कोरोना के फर्स्ट वेब में भी अपने घर ऑटो से ही आ गए थे। लॉकडाउन के दौरान वे अपने घर पर ही थे, लेकिन काम-काज ठप हो जाने से उनकी आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई थी। इसलिए छठ के बाद वह फिर से मुंबई लौट गए थे। कोरोना के सेकेंड वेब के डर से दोनों अपने दोस्तों के साथ ऑटो से ही घर निकल गए थे। पिछली बार उन्हें स्कूल के ही एक गांव में क्वारंटीन किया गया था।

गए थे कमाने, चली गई जान

ग्रामीणों ने कहा कि लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों को सरकार ने रोजगार दिलाने के वादे किए, लेकिन हमें कोई फायदा नहीं हुआ। रोजगार नहीं मिलने और घर की माली हालत खराब होने के कारण ही दोनों मुंबई चले गए थे। परिवार को क्या मालूम था कि इस बार उनकी जगह लाश आएगी। मृतक संजय की पत्नी गायत्री देवी और संतोष की पत्नी चांदनी देवी की चीत्कार से गांव गमगीन हो चुका है। गांव में किसी के घर में चूल्हे नहीं जले। पिता रामएकबाल साह एवं मां सागर देवी ने रुंधे गले से कहा कि हमसे ज्यादा बदनसीब कौन होगा जिसके कंधों पर दो दो पुत्रों की लाश होगी। संजय की दो बेटियां और 1 बेटा है जबकि उसके भाई संतोष को एक बेटा और एक बेटी की जिम्मेदारी बुजुर्ग के कंघों पर है।

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