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  • BiharNews; Corona Had Become Fatal With Heart Disease, 95% Lung Had Become Infected, The Courage Of AIIMS Doctors Saved Lives

निगेटिव दौर की पॉजिटिव स्टोरी:25 वर्षीय युवक का 95% फेफड़ा हो गया था संक्रमित, दिल की बीमारी भी थी; फिर भी 9 दिनों तक डॉक्टर बिना हिम्मत हारे करते रहे इलाज, बचा ली जान

पटना6 महीने पहले
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IGIMS के 4 डॉक्टरों की टीम ने कर दिखाया कमाल। (फाइल फोटो)। - Dainik Bhaskar
IGIMS के 4 डॉक्टरों की टीम ने कर दिखाया कमाल। (फाइल फोटो)।

भागलपुर के रहने वाले 25 साल के नवीन की हालत देख घर वाले हिम्मत हार चुके थे। रूमेटिक दिल की गंभीर बीमारी के बाद कोरोना का संक्रमण जानलेवा हो गया था। शरीर में तेजी से बढ़ता संक्रमण फेफड़े को 95% डैमेज कर चुका था। भागलपुर मेडिकल कॉलेज में हालत बिगड़ी तो डॉक्टरों ने IGIMS रेफर कर दिया।

26 मई को भर्ती नवीन की हालत IGIMS में भी बिगड़ती गई, लेकिन डॉक्टरों ने हिम्मत नहीं हारी और युवक को मौत के मुंह से वापस ला दिया। IGIMS के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि डॉक्टरों की टीम ने बड़ा काम किया है।

सांस लेने में हो रही थी काफी तकलीफ

IGIMS के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. मनीष मंडल का कहना है कि 26 मई को नवीन संस्थान के इमरजेंसी में आया था। भीकमपुर भागलपुर के संक्रमित को पहले भागलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, लेकिन बाद में गंभीर हालत को देखते हुए उसे IGIMS भेजा गया। नवीन को पहले से रूमेटिक हार्ट की बीमारी थी। डॉक्टर का कहना है कि उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। वह भागलपुर मेडिकल कॉलेज में एक दिन के लिए भर्ती रहा।

95% फेफड़ा हो चुका था खराब

डॉक्टरों का कहना है कि जिस वक्त नवीन IGIMS में भर्ती किया गया था, उस समय उसका फेफड़ा 95 प्रतिशत खराब हो चुका था। इस कारण से उस वक्त उसकी हालत काफी नाजुक हो गई थी। CT स्कैन किया गया, जिसका स्कोर 24/25 था। मतलब 95 प्रतिशत तक फेफड़े को कोरोना प्रभावित कर चुका था। इमरजेंसी में भर्ती होने के बाद मरीज को कोविड के लक्षण को देखते हुए उसका इलाज शुरू किया गया।

9 दिन तक इलाज में डॉक्टर नहीं माने हार

नवीन का इलाज IGIMS के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. मनीष मंडल की देखरेख में कार्डियो विभाग के एचओडी डॉ. बीपी सिंह, डॉ. शंभू कुमार, डॉ. माधव कुमार, डॉ. योगेश दुबे और क्रिटिकल केयर के अन्य चिकित्सकों ने हिम्मत नहीं हारी। वह लगातार इलाज करते रहे। 9 दिनों के अथक प्रयास के बाद मरीज की हालत में सुधार होने लगा। मरीज जवान था इसलिए चिकित्सक की टीम इसकी गहन चिकित्सा इलाज में लग गई। 9 दिन के बाद मरीज को पूर्णतः ठीक कर 3 जून काे छुट्टी किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. एन आर विश्वास ने कोविड काल में संक्रमित की जान बचाने के लिए पूरी टीम को बधाई दी और हौसला बढ़ाया है।