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ब्लैक फंगस के आंकड़े छिपा रहे अस्पताल:23 मई को बिहार में महामारी घोषित, 6 जून तक नहीं उठा आंकड़ों से पर्दा, ED से पूछने पर भी नहीं दी जानकारी

पटना4 महीने पहले
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  • कोरोना की तरह सार्वजनिक नहीं किए जा रहे ब्लैक फंगस के मामले

बिहार में ब्लैक फंगस का आंकड़ा पर्दे में है। संक्रमण की जद में कौन आया और कितने लोगों ने इसे मात दी, इसकी स्पष्ट संख्या नहीं आ रही है। बिहार सरकार ने 23 मई को ब्लैक फंगस को महामारी तो घोषित कर दिया, लेकिन 6 जून तक रिकवरी, मौत और संक्रमण सब पर पर्दा पड़ा है। आम आदमी में दहशत है। वह कोरोना के रिकवरी रेट की तरह ब्लैक फंगस के संक्रमण को लेकर खुद को मजबूत नहीं कर पा रहा है। संक्रमण को लेकर दहशत का यह बड़ा कारण है, जबकि डॉक्टरों का कहना है कि अवेयरनेस ही इसका इलाज है। जानकारी मांगने पर भी राज्य स्वास्थ्य समिति के ED इस बारे में नहीं बता रहे।

कोरोना को लेकर सरकार की व्यवस्था

कोरोना संक्रमण को लेकर पूरे देश में आम लोगों को संक्रमण से लेकर रिकवरी और मौत तक की जानकारी मिल जाती है। आम इंसान भी हर दिन इससे अपडेट रहता है। आम इंसान ऐसे आंकड़ों से खुद तय कर लेता है कि संक्रमण को लेकर हालात कैसे हैं और उसे किस तरह से सावधानी बरतनी है। हर दिन का रिकवरी रेट पता चल जाता है और सरकार भी रिकवरी रेट के सहारे लोगों के अंदर से डर को खत्म करने का प्रयास करती है।

बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय से लेकर विभाग तक सोशल मीडिया पर हर दिन रिकवरी पर फोकस करते हैं, जिससे लोगों के अंदर कोरोना को लेकर खौफ खत्म हो। राज्य स्वास्थ्य समिति की तरफ से हर दिन सोशल मीडिया के साथ विभाग की वेबसाइट पर कोरोना से जुड़ी हर जानकारी आम लोगों के लिए साझा की जाती है।

ब्लैक फंगस पर हर दिन पर्दा

बिहार में कोरोना की तरह ब्लैक फंगस से जुड़ी कोई भी जानकारी आम लोगों के लिए साझा नहीं की जा रही है। ब्लैक फंगस का संक्रमण रिकवरी और मौत सब पर काला पर्दा है। पूरे देश में ब्लैक फंगस के मामले दूसरी लहर में बढ़े हैं। यह माना जा रहा है कि कोरोना के साथ यह भी बड़ी बीमारी है। देश में बढ़ते मामलों को लेकर एक के बाद एक प्रदेश ने इसे महामारी घोषित किया है। बिहार सरकार ने 23 मई को ब्लैक फंगस यानी म्यूकर माइकोसिस नाम की बीमारी को महामारी कानून 1897 के तहत महामारी घोषित कर दिया। 23 मई को को ही स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव की तरफ से इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।

अधिसूचना के बाद जानकारी का अभाव

अधिसूचना जारी होने के बाद भी ब्लैक फंगस को लेकर जानकारी नहीं दी जानी बड़ा सवाल है, जबकि सरकार की तरफ से गाइडलाइन है कि ब्लैक फंगस के संदिग्ध से लेकर प्रमाणित सभी मरीजों की सूचना सिविल सर्जन के माध्यम से विभाग को दी जानी है, लेकिन बिहार में इस मामले में विभाग की तरफ से कोई जानकारी आम लोगों के लिए साझा नहीं की जा रही है। बिहार में संक्रमण की क्या स्थिति है और इसमें मौत का प्रतिशत क्या है तथा ब्लैक फंगस को मात देने वालों यानी रिकवरी का क्या रेट है, इसकी कोई जानकारी नहीं है। विभाग कोरोना संक्रमण की तरह ब्लैक फंगस को लेकर भी एक्टिव हो जाए तो इसकी रिकवरी के आंकड़ों के सहारे लोगों के अंदर से खौफ खत्म कर उन्हें वायरस से लड़ने के लिए जागरूक किया जा सकता है। कोरोना के रिकवरी के आंकड़ों की तरह ब्लैक फंगस के रिकवरी का आंकड़ा भी खौफ कम करेगा।

आखिर जानकारी क्यों नहीं दे रहे हॉस्पिटल

ब्लैक फंगस की जानकारी देने में अस्पताल मनमानी कर रहे हैं। यह बड़ा सवाल है। कुछ सरकारी अस्पतालों से इसकी जानकारी मीडिया को साझा की जाती है, लेकिन कई अस्पताल तो पूछने से भी टाल-मटोल कर जाते हैं। ऐसा क्यों किया जा रहा है, इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग भी नहीं दे पा रहा है। सिविल सर्जन कार्यालय से भी इसकी सूचनाएं अपडेट नहीं हो पा रही हैं। पटना की सिविल सर्जन डॉ. विभा कुमारी खुद ब्लैक फंगस के स्टेटस से अपडेट नहीं हैं। सिविल सर्जन के पास संक्रमण के जो आंकड़े अपडेट हैं, उससे अधिक मरीज पटना के एक अस्पताल में भर्ती हैं।

विभाग से नहीं मिला कोई जवाब

ब्लैक फंगस के संक्रमण, रिकवरी और मौत के आंकड़ों को कोरोना की तरह क्यों नहीं आम लोगों तक पहुंचाया जा रहा है, इसे लेकर जब राज्य स्वास्थ्य समिति के ED मनोज कुमार से बात करने की कोशिश की गई तो कोई रिस्पांस नहीं मिल पाया। दो-दो बार इस सवाल के जवाब के लिए उन्हें टेक्स्ट मैसेज किया गया, लेकिन इसके बाद भी कोई जवाब नहीं आया। 2 जून को शाम 6.42 बजे और 4 जून को दिन में 11.14 बजे राज्य स्वास्थ्य समिति के ED को मैसेज भेजकर जानकारी मांगी गई, लेकिन जवाब नहीं मिला।

इसके अलावा 1 जून और 2 जून को उनके नंबर पर बात करने की भी कई बार कोशिश की गई। 2 जून की शाम 6.39 बजे 10 सेकेंड बात हुई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला बाद में उन्होंने कॉल अटेंड ही नहीं किया।

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