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अधिकारियों ने बिहार सरकार को लगाया करोड़ों का चूना:पत्नी के खाते में सरकारी पैसे डालता था बांका का कैशियर; गबन कर गया छात्रवृत्ति का 1.43 करोड़ रुपए

पटनाएक महीने पहलेलेखक: बृजम पांडेय
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  • संविदा के न्यूनतम दर की अनदेखी कर जाते हैं अधिकारी
  • बांका का कैशियर पत्नी के खाते में डालता था सरकारी पैसे

सरकार किसी भी राजनैतिक पार्टी की हो, उसे चलाते सरकारी अधिकारी ही हैं। सरकार बदल जाती है, लेकिन अधिकारी स्थायी होते हैं और सरकार के नफे नुकसान की जिम्मेदारी उनकी ही होती है। हाल में CAG की रिपोर्ट आई है, जिसमें यह खुलासा हुआ है कि अधिकारियों की लापरवाही की वजह से सरकार को भारी नुकसान हुआ है। CAG की रिपोर्ट में ये बताया गया है कि सरकारी अधिकारी यदि थोड़ी सूझ-बूझ दिखाते तो सरकार को नुकसान नहीं उठाना पड़ता। CAG की रिपोर्ट 31 मार्च 2018 तक की दी गई है।

पहला मामला अरवल नगर परिषद का
LED लाइट की खरीद के लिए टेंडर के मूल्यांकन के दौरान न्यूनतम दर का टेंडर डालने वाले को नगर परिषद, अरवल ने जान-बूझकर नहीं लिया। इससे 50.33 लाख रुपए की राशि का अधिक भुगतान किया गया। इस पूरे मामले में न्यूनतम दर वाले संविदा को सरकारी पदाधिकारियों ने छुपा लिया। 10 हजार 850 वाली LED लाइट को लगभग दोगुनी कीमत पर खरीदा। इस पूरे डील में सरकार का 50 लाख 32हजार 500 रुपए का नुकसान हो गया।

सीवान और बिहारशरीफ में भी लापरवाही
इन जिलों के नगर शहरी निकाय में सार्वजनिक जगहों पर लगाने के लिए 6760 कूड़ेदान की खरीदारी करनी थी, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से कूड़ेदान की खरीद पर दोनों शहरी निकायों को 6 करोड़ 98 लाख रुपए का नुकसान हुआ। जिस कूड़ेदान की कीमत 4,115 रुपए है, उसे 7,585 से लेकर 11,285 रुपए में खरीदा गया। 6760 यूनिट खरीदने थे, ऐसे में सरकार को 6 करोड़ 98 लाख रुपए का नुकसान हुआ।

1.98 करोड़ का व्यय बेकार गया
शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों के आधार डिजिटलीकरण के रोके जाने से 1.98 करोड़ का व्यय बेकार हो गया। इसमें सरकार ने समय पर अपने आप को अपग्रेड नहीं किया। इसकी वजह से पुराने सॉफ्टवेयर को बंद करके नई तकनीक को लाने से सरकार को नुकसान हुआ।

बांका के कैशियर की मनमानी देखिए
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग की तरफ से प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक और मेधा छात्रवृत्ति को लेकर विभाग की तरफ से निर्गत किए गए पैसों को बांका जिला कल्याण पदाधिकारी के कोषागार के कैशियर ने अपने निजी और अपनी पत्नी और अन्य लोगों के खातों में पैसों को ट्रांसफर कर दिया। बांका जिला कल्याण पदाधिकारी कोषागार से कैशियर ने 1.43 करोड़ का गबन किया। वहीं, उसी कैशियर ने प्रखंड विकास पदाधिकारी चंदन से भी 1.46 करोड़ रुपए अवैध तरीके से अपने निजी खातों में डाले। वित्तीय नियमों की अनदेखी के कारण 2.89 करोड़ का गबन हुआ। हालांकि बाद में उक्त कैशियर पर कार्रवाई हुई।

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