बच्चों के गुल्लक बैंक के 4 किस्से:लॉकडाउन में कमाई बंद हुई तो इनकी जमा-पूंजी काम आई, किसी ने पिता के लिए दवाइयां खरीदीं तो कोई घर का खर्च पूरा कर रहा

पटना5 महीने पहलेलेखक: शालिनी सिंह
कोरोना त्रासदी में बच्चों का बैंक बना सहारा।

बच्चों को बचत सिखाने के लिए 12 साल पहले किलकारी बाल भवन पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुल्लक बैंक का उद्घाटन किया था। आज कोरोना संक्रमण के बीच जब सरकार ने लॉकडाउन लगाया तो कई परिवारों का काम बंद हो गया। कमाई ठप पड़ गई। ऐसे में यही गुल्लक बच्चा बैंक इस महामारी में कई परिवारों के लिए बड़ा सहारा बनकर सामने आया।

बच्चों की बचत के जमा एक-एक रुपए आज काम आ रहे हैं। इस लॉकडाउन में अब तक 14 बच्चों ने बैंक से अपनी जमा-पूंजी निकालकर परिवार की मदद की है। पढें, 4 ऐसी ही कहानियां...

पहली कहानी : बीमार पिता की दवाइयों के लिए एकलव्य के लिए गुल्लक बैंक बना सहारा
पटना का एकलव्य, बच्चा गुल्लक बैंक के 1,212 खाताधारकों में से एक है। लगातार कई सालों से वह अपनी पॉकेट मनी के पैसों को गुल्लक बैंक में जमा करता था। हालांकि एकलव्य ने ये पैसे अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए जमा किए थे। लेकिन छोटी जरूरतों के लिए जमा छोटी सी राशि ने आज उसे और उसके परिवार को बड़ा सहारा दिया।

कोरोना के दौर में घर में पैसों की किल्लत हुई तो एकलव्य ने अपने पिता की दवाइयों के लिए अपने गुल्लक बैंक से पैसे निकाले। एकलव्य ने बैंक खाताधारकों के वाट्सऐप ग्रुप पर अपना आवेदन दिया और उसे उसके साढ़े तीन हजार की जमा-पूंजी मिल गई, जिसने उसके पिता की दवा खरीदी।

एकलव्य के पिता का फर्नीचर का बिजनेस है। लॉकडाउन में दुकान बंद है। उन्हें पहले से किडनी की समस्या भी है, जिसकी वजह से घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ी हुई थी। लॉकडाउन ने और मुश्किल बढ़ा दी है। इसलिए एकलव्य ने पैसे निकाले।

गुल्लक बैंक की मदद से एकलव्य ने अपने पिता के लिए दवा खरीदी।
गुल्लक बैंक की मदद से एकलव्य ने अपने पिता के लिए दवा खरीदी।

दूसरी कहानी : पिता हुए बेरोजगार तो निकाली जमा राशि
पटना के भिखना पहाड़ी की रहने वाली 11 साल की अल्पा कुमारी ने अपने घर खर्च के लिए गुल्लक बैंक से रुपए निकाले हैं। उसके पिता राम पासवान गार्ड का काम करते हैं। लॉकडाउन में बेरोजगार हो गए तो घर में आर्थिक संकट उत्पन्न हो गई।

तीसरी कहानी : किराया नहीं दे पा रहा था भाई, इसलिए निकाले रुपए
लोहिया नगर की रहने वाली 15 साल की नेहा कुमारी ने अपने भाई को देने के लिए रुपए निकाले। उसका भाई बिहटा में रहता है और कमरे का किराया नहीं दे पा रहा था। इस कारण घर आने में दिक्कत थी। रुपए मिलते ही किराया चुकता कर घर लौट आया।

चौथी कहानी: लॉकडाउन में पापा की बंद हो गई दुकान तो घर खर्च चलाना मुश्किल था
मलाही पकड़ी मोड़ की 15 साल की मुस्कान के पापा योगेंद्र प्रसाद होटल चलाते हैं। लॉकडाउन में वह बंद है। इससे घर चलाना मुश्किल हो गया। उसने रुपए निकाल घर खर्च चलाने के लिए मम्मी को दिए। वहीं, मुसल्लहपुर हाट के रहने वाले 14 साल के अंकेश कुमार के पिता ज्ञानेश्वर प्रसाद मामूली स्वास्थ्य कर्मी हैं। उसने अपने किताबों के लिए रुपए की निकासी की है।

लॉकडाउन के बाबजूद बैंक की वित्तीय स्थिति मजबूत
कोरोना संक्रमण और उसकी वजह से हुई लॉकडाउन का असर बच्चा बैंक पर भी पड़ा है। पिछले लॉकडाउन के दौरान एक ओर जहां बैंक में पैसे जमा करने का सिलसिला रुक गया था, वही नए खाते भी नहीं खुल पाए थे। हालांकि, लॉकडाउन खत्म होते ही करीब 100 नए खाते खुले, बैंक की पूंजी भी बढ़ी।

लॉकडाउन की बंदी में बच्चा बैंक एक वाट्सऐप ग्रुप के जरिये काम करता है। बैंक के सभी खाता धारक इस वाट्सऐप ग्रुप का हिस्सा है, जिसमें बच्चे पैसे निकालने के लिए आवेदन भेजते हैं। इसके बाद ये आवेदन किलकारी को-ऑडिनेटर को भेजा जाता है, जो बच्चों के माता-पिता से बात करते हैं। माता-पिता की रजामंदी के बाद माता-पिता के अकाउंट में पैसे भेजे जाते हैं।

गुल्लक बैंक के जरिए परिवार की मदद कर रहे हैं बच्चे।
गुल्लक बैंक के जरिए परिवार की मदद कर रहे हैं बच्चे।

गुल्लक बैंक 12 साल में 79 लाख का कर चुका लेन-देन
बिहार शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले बाल भवन पटना में 2009 में गुल्लक बच्चा बैंक की शुरुआत की गई थी। बच्चों द्वारा बच्चों के लिए संचालित होने वाला ये पहला बैंक बना। यही वजह है कि इस बैंक का नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। इस बैंक में 1 रुपए भी बच्चे जमा कर सकते थे। खाता खोलने के लिए 10 रुपए जमा करने होते हैं।

खाता को एक्टिव रखने के लिए कम से कम 30 रुपए रखना जरूरी है। गुल्लक बैंक के कुल खाताधारियों की संख्या 3935 हैं। अभी इसके सक्रिय खाताधारक 1,212 हैं। 2009 से 2021 तक इस बैंक ने 79 लाख 67 रुपए का लेन-देन किया है।

बैंक में अब तक खाताधारकों ने 41 लाख 87 हजार 519 रुपए जमा किये हैं, जबकि 37 लाख 12 हजार 548 रुपए बैंक अपने खाताधारकों को पेमेंट कर चुकी है।

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