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कार्यकर्ताओं के नाम चिराग ने लिखी चिट्‌ठी:बोले- मुट्‌ठी भर लोग नहीं छीन सकते पार्टी; LJP हमारी ही रहेगी, 2017 में NDA में नीतीश की वापसी से विचलित हो गए थे पापा

पटनाएक वर्ष पहले
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राजनीतिक तौर पर शुरू हुई लोक जन शक्ति पार्टी (LJP) की लड़ाई अब कानूनी तौर पर भी चलेगी। पार्टी को अपने पास बनाए रखने के लिए चिराग पासवान हर स्तर पर लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। अपने बगावती चाचा और सांसदों को करारा जवाब देते हुए चिराग ने कहा है कि मुट्ठी भर लोग उनकी पार्टी को छीन नहीं सकते हैं। लोजपा पार्टी हमारी थी, और हमारी ही रहेगी। दरअसल, मंगलवार को दिल्ली से चिराग पासवान ने 4 पन्नों का एक लेटर पार्टी कार्यकर्ताओं के नाम जारी किया है।

इस लेटर के जरिए लोजपा से निकाले गए सांसद चाचा पशुपति कुमार पारस समेत इनके गुट के 5 सांसदों के ऊपर भी अपनी बातों के जरिए सख्त प्रहार किया है।

उन्होंने लिखा है, 'पापा (दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान) ने कभी भी अपने भाइयों में फर्क नहीं किया। हमेशा उनको आगे बढ़ाया, लेकिन उनके निधन के 9 महीने भी नहीं हुए कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए परिवार का साथ छोड़ दिया। रामविलास पासवान की धारा को चकनाचूर कर दिया। वो एक ऐसे व्यक्ति की शरण में गए, जिनके खिलाफ हमारे नेता हमेशा अपनी आवाज को बुलंद करते रहे। सामने आई इन परिस्थितियों से मैं न डर रहा हूं और न घबरा रहा हूं, लेकिन परिवार के टूटने की वजह से दुखी जरूर हूं'।

चिराग ने शेयर किया पुराना लेटर

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मेरी पीठ में चाचा ने घोंपा खंजर

लोजपा की यह लड़ाई कहां जाकर थमेगी, इस बारे में किसी को पता नहीं है। चिराग ने लेटर जारी कर अपने चाचा पारस और भाई प्रिंस से लेकर जदयू के नेताओं पर वार किया है। छोटे चाचा दिवंगत रामचंद्र पासवान का जिक्र करते हुए चिराग ने लिखा है कि उनका निधन पहले ही हो चुका था। फिर पापा चले गए। ऐसे में चाचा पशुपति कुमार पारस ही परिवार के मुखिया थे। जिम्मेदारी संभालने और मार्गदर्शन करने की जगह वह उन्हें अकेला ही छोड़ कर चले गए।

चिराग ने कहा, 'अफसोस है कि चाचा ने मुझे अपना विरोधी समझा। पार्टी की तरफ से मैं तो उनका नाम मंत्री पद के लिए प्रधानमंत्री के सामने रखने वाला था। अगर वो खुद कहते तो मैं उन्हें स्वयं पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बना देता। उन्होंने मुझे ऐसे वक्त में धोखा दिया, जब मैं बीमार था। चचेरे भाई प्रिन्स और बाकी के सांसदों के साथ मिलकर उन्होंने रात के अंधेरे में मेरे पीठ में खंजर घोंपा'।

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NDA में नीतीश कुमारी की वापसी से विचलित थे पापा

अपने इस लेटर के जरिए चिराग ने आज एक बड़ा खुलासा किया है। 2014 में नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद के दावेदारी की बात पर NDA गठबंधन का साथ छोड़ा था। 2017 में फिर वो वापस रातों-रात NDA गठबंधन का हिस्सा बन गए थे। इस घटना से उस वक्त रामविलास पासवान विचलित हो गए थे। गठबंधन में नीतीश कुमार के साथ काम करने में सहज नहीं थे।

आज चिराग ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर एक और गंभीर आरोप लगाया है। सीधे तौर पर कहा है कि 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में लोजपा के 6 सांसदों को हराने की नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जदयू की तरफ से पूरी कोशिश की गई थी। उनके नेताओं ने कोई कसर नहीं छोड़ा था। जब पापा बीमार थे तो उस दौरान नीतीश कुमार का अहंकार सामने आया था।

चिराग का चाचा पर पलटवार

पहले भी LJP को तोड़ चुकी है JDU

मीडिया के सवाल पर तब नीतीश ने कहा था कि रामविलास पासवान के बीमार होने की जानकारी उन्हें नहीं है। आश्चर्य इस बात पर है कि लोजपा से निकाले गए सांसदों के साथ एक ऐसा व्यक्ति कैसे खड़ा हो सकता है? 5 सांसदों और एक विधायक को लोजपा से तोड़कर जदयू ने बांटों और शासन करो की अपनी रणनीति को दोहराया है। 2005 के फरवरी महीने में हुए विधानसभा चुनाव के बाद जदयू ने लोजपा के ही 29 विधायकों को तोड़ा था। फिर यही कोशिश उसी साल के नवंबर महीने में हुए विधानसभा चुनाव के बाद हुई थी।