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महाभारत में बदली चिराग-पारस की लड़ाई:चाचा पारस ने कहा-पांच पांडव हैं हमारे 5 सांसद, चिराग करें 'आशीर्वाद यात्रा', मेरा भी आशीष है...पढ़ें, भास्कर से खास बातचीत

पटना/दिल्ली3 महीने पहलेलेखक: रवि यादव
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‘चिराग़ पासवान मेरा बेटा है, भतीजा है मुझे उससे कोई तकलीफ नहीं है, लेकिन वह मुझ से मिलना ही नहीं चाहते थे। मेरे घर आने का नाटक राजनीतिक फायदा लेने के लिए किया गया है। मैं चिराग की आशीर्वाद-यात्रा में तन-मन-धन से साथ हूं। वह इसे महाभारत की लड़ाई कहता है, तो हम 5 सांसद पूरे पांच पांडव हैं। चिराग को अलग करना इसलिए जरूरी था, क्योंकि पार्टी का ग्राफ खत्म हो रहा था।’
यह कहना है राम विलास पासवान के भाई और चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस का। पढ़ें, दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत -

भास्कर : चिराग पासवान की पांच जुलाई से शुरू होने वाली आशीर्वाद-यात्रा पर आपका क्या कहना है?
पारस : यह बहुत खुशी की बात है कि बड़े साहब के जन्मदिन पर आशीर्वाद यात्रा निकाल रहे हैं, वो भी हाजीपुर से। यदि उसमें मेरा कोई सहयोग लेना चाहते हैं तो मैं तन-मन-धन से तैयार हूं। मैं भी 5 जुलाई को अलग से कार्यक्रम करूंगा।

भास्कर : चिराग पासवान का कहना है कि उनके पिता की आप इतनी ही इज्जत अगर करते थे तो यह भी तो उनकी ही इच्छा थी कि चिराग राष्ट्रीय अध्यक्ष बने?
पारस : राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हुआ था तो मैं ही चिराग के नाम का प्रस्तावक था। आज पार्टी में डेमोक्रेसी खत्म हो गई है। हमने 2014 और 2019 में NDA के गठबंधन में चुनाव लड़ा था और 6 सांसद जीत कर आए थे। उनमें से पांच की राय यही थी कि बिहार का चुनाव NDA गठबंधन में ही हो, लेकिन एक बनारसी लड़के सौरभ पांडे ने पार्टी और विचारधारा में सेंध लगा दी। उसी के कहने से चिराग ने अकेले ही बिहार में चुनाव लड़ने का फैसला लिया। इस चुनाव में नीतीश कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार व उन्हें जेल भेजने के नारे लगाए। दूसरी तरफ चिराग बोलते रहे हैं कि हम भाजपा के हनुमान हैं, अगर ये हनुमान थे तो क्यों विपक्ष को जिताने के लिए अपनी पार्टी के उम्मीदवार मैदान में उतारे? ये सब हमारे बिना पूछे ही किया और ऐसा करने से पार्टी का ग्राफ खत्म हो गया।

भास्कर : अगर मामला बिहार चुनावों का था तो आपने चिराग से अलग होने में इतनी देर क्यों की?
पारस : इससे पहले हमने चिराग को मौका दिया कि संभल जाओ, लेकिन वो नहीं संभले। ऐसा करने से पार्टी समाप्त होने की कगार पर चली गई तो सभी सांसदों ने राय की। पासवान जी की आत्मा की शांति के लिए और पासवान जी की बनाई हुई पार्टी समाप्त न हो, इसके लिए मजबूरन हमें यह फैसला लेना पड़ा।

भास्कर : चिराग ने कहा है कि महाभारत की लड़ाई है और मुझे अपनों के साथ ही लड़ना है।
पारस : महाभारत में पांच पांडव थे और पांच पांडव ही हमलोग हैं। हम पार्टी के पांच सांसद हैं। अभिनेता नाना पाटेकर का डायलॉग है कि एक मच्छर सब को हिजड़ा बना देता है। यहां भी हुआ ऐसा ही है कि एक आदमी सौरभ पांडे ने पार्टी को बर्बाद कर दिया है। मैं खुद कहता हूं कि चिराग पासवान मेरा बेटा है, मेरा भतीजा है, मुझे उससे कोई तकलीफ नहीं है।

भास्कर : अगर आपको चिराग पासवान से इतना ही प्यार है तो उससे बिना मिले ही अपने दरवाजे से क्यों लौटा दिया था?
पारस : अगर कोई बिना जानकारी दिए आएगा तो क्या होगा। मुझे ऐसी कोई जानकारी नहीं थी। यदि मुझसे पहले अपने आने की सूचना दे देता तो मैं निश्चित रूप से मिलता। मैं उस समय लोकसभा अध्यक्ष के पास गया था और चिराग को इस बारे में पता चल गया कि चाचा घर पर नहीं हैं तो घर आ गया। केवल न्यूज बनवाने के लिए और कह दिया कि चाचा मुझसे मिलना ही नहीं चाहते हैं। मेरे घर से निकलने के 10 मिनट में चिराग वहां पहुंच गए थे। यह सब राजनीतिक फ़ायदा लेने के लिए किया गया है।

भास्कर : तो क्या अब आप बिहार में नीतीश और केंद्र में मोदी सरकार को समर्थन करेंगे?
पारस : यह सही बात है कि हम NDA के पार्टनर थे और आज भी हैं। मोदी जी का करिश्मा केवल देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में हैं। नीतीश को बिहार में विकास पुरुष के नाम से जानते हैं। हम NDA में पहले भी थे और आज भी हैं और आगे भी रहेंगे।

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