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LJP में उठापटक:संसदीय बोर्ड के नए नेता पशुपति पारस को लोकसभा स्पीकर ने मान्यता दी, पार्टी पोजीशन में भी उनका नाम अपडेट हुआ

पटना3 महीने पहले
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लोक जनशक्ति पार्टी के नए संसदीय दल अध्यक्ष को लोकसभा की मंजूरी मिल गई है। लोकसभा सचिवालय ने सदन में पार्टी के नेतृत्व में बदलाव से जुड़ा सर्कुलर जारी कर दिया है। इसके अनुसार अब सांसद पशुपति कुमार पारस लोजपा के संसदीय दल के नेता होंगे। लोक सभा की दलगत स्थिति में भी इस नए बदलाव को अपडेट कर दिया गया है।

इससे पहले चिराग पासवान का अंतिम दांव तब फेल हो गया जब बागी हुए चाचा पशुपति पारस से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। चिराग अपनी मां को LJP अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव लेकर पारस से मिलने पहुंचे थे।

लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला से मिले LJP के पांचों सांसद।
लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला से मिले LJP के पांचों सांसद।

पांचों सांसदों ने लोकसभा स्पीकर से मुलाक़ात भी की

सोमवार दोपहर बाद ही पार्टी के पांचों सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला से मुलाकात कर उन्हें पार्टी के संसदीय बोर्ड की बैठक में लिए फैसले की जानकारी दे दी थी। इसमें पशुपति कुमार पारस को सर्वसम्मति से पार्टी का नेता और संसदीय दल का अध्यक्ष चुन लिया गया। साथ ही चौधरी महबूब अली कैसर को उपनेता चुना गया।

रविवार देर रात ही LJP में टूट के बाद चिराग पासवान राष्ट्रीय अध्यक्ष पद छोड़ने को तैयार हो गए थे। सोमवार सुबह चिराग अपने चाचा पशुपति पारस से मिलने पहुंचे थे। डेढ़ घंटे घर के बाहर खड़े रहने के बाद उन्हें अंदर आने की परमिशन मिली, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। चाचा को मनाने के लिए चिराग ने अपनी मां को आगे किया। पारिवारिक मुलाकात के जरिए बात सुलझाने की कोशिश की, लेकिन पशुपति के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद चिराग का दांव फेल हो गया।

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5 सांसदों ने चिराग को सभी पदों से हटाया
चिराग को लेकर पार्टी में जबरदस्त नाराजगी थी। पार्टी के विधायक तो पहले ही LJP का दामन छोड़ चुके थे, अब 5 सांसदों ने चिराग पासवान को अध्यक्ष समेत सभी पदों से हटा दिया है। रविवार देर शाम ही चली LJP सांसदों की बैठक में इस फैसले पर मुहर लग गई। पांचों सांसद आज चुनाव आयोग को भी इसकी जानकारी देने वाले हैं।

LJP सांसदों की मीटिंग के मिनट्स।
LJP सांसदों की मीटिंग के मिनट्स।

21 साल में पहली बार टूटी पार्टी, अब दोनों गुटों में कब्जे की जोर आजमाइश
28 नवंबर 2000 को LJP बनी थी। तब से पहली बार पार्टी में टूट हुई है। अब संगठन में भी बड़ी संख्या में लोग पारस के साथ जा सकते हैं। इससे चिराग की ताकत और घट सकती है। अभी तक चिराग को रामविलास पासवान का पुत्र होने का फायदा मिलता रहा था, लेकिन अब उनकी पार्टी पर कब्जे को लेकर जोर-आजमाइश होनी तय है।