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'चिराग' होंगे 'तेजस्वी'! बिहारी राजनीति में नए समीकरण की आहट:एक-दूसरे की ओर कदम बढ़ा रहे हैं रामविलास-लालू के वारिस; चिराग समर्थकों को अभी केन्द्रीय मंत्रिमंडल विस्तार का इंतजार

पटना4 महीने पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद
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बिहार की राजनीति में दो युवा नेताओं पर राज्य के बाहर के लोगों की भी निगाहें टिकी हैं। लालू प्रसाद और नीतीश कुमार की राजनीति की जगह धीरे-धीरे युवा नेतृत्व सामने आ रहा है। दलितों के राष्ट्रीय स्तर के नेता रामविलास पासवान का निधन हो चुका है और उनके निधन के बाद उनकी पार्टी में चाचा-भतीजा के बीच आर-पार वाली राजनीतिक लड़ाई चल रही है। राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच तेजस्वी यादव और चिराग पासवान को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है। क्या ये दोनों युवा नेता मिलकर अपने राजनीतिक दुश्मनों को निबटा पाएंगे, इस पर लोग बात कर रहे हैं।

दोनों ने एक -दूसरे को अपना भाई कहा है। कभी राजनीति में लालू प्रसाद को बड़ा भाई और नीतीश कुमार को छोटा भाई कहा जाता था, लेकिन तेजस्वी और चिराग के भाई होने और लालू-नीतीश के भाई होने में अंतर है। चिराग और तेजस्वी दोनों ने एक दूसरे की तरफ एक-एक कदम बयानों से बढ़ाया जरूर है, हालांकि चिराग गुट को केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार का भी इंतजार है कि उसमें चिराग पासवान को जगह मिलती है या पारस गुट को !

हनुमान को अपनी ताकत का अहसास होना चाहिए: प्रेम कुमार मणि

तेजस्वी यादव और चिराग पासवान दोनों के राजनीतिक दुश्मन नीतीश कुमार हैं। चिराग, नीतीश कुमार को जेल भिजवाने तक की बात कहते रहे हैं और तेजस्वी यादव, नीतीश कुमार को घोटालों का पितामह कहते हैं। भास्कर ने RJD और LJP कार्यकर्ताओं से आगे की रणनीति पर बात की।

RJD के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार मणि कहते हैं कि चिराग पासवान जिनके साथ हैं वे उनकी स्थिति हास्यास्पद बना रहे हैं। उनके घर में जो टूट हुई है उसमें BJP- JDU की भूमिका है। वे चुनाव के समय महागठबंधन में साथ जुड़ जाते तो आज बड़ी ताकत होते। LJP का निर्माण BJP की प्रशस्ति के लिए नहीं हुआ था। हनुमान के साथ जो हुआ, नहीं होना चाहिए था। हनुमान को अपनी ताकत का अहसास होना चाहिए।

रामविलास पासवान, चिराग के कहने पर ही BJP के साथ गए। हालांकि, रामविलास पासवान इसलिए जाने जाते हैं कि उन्होंने गोधरा के बाद केन्द्रीय मंत्री पद से त्याग-पत्र दिया था। उस समाजवादी राजनीतिक धारा को आगे बढ़ाते हुए चिराग को तेजस्वी के आमंत्रण पर विचार करना चाहिए।

किसी नए गठबंधन के साथ जाने पर अभी विचार नहींः LJP

LJP के प्रवक्ता राजेश भट्ट कहते हैं, 'तेजस्वी यादव ने सहानुभूति दिखाई है, हम इसके आभारी हैं, लेकिन LJP किसी नए गठबंधन पर अभी विचार नहीं कर रही। अभी हम आशीर्वाद यात्रा से जनाधार बढ़ाएंगे और ताकत दिखाएंगे। लोगों का भ्रम टूट जाएगा'।

तेजस्वी और चिराग की खूबियों- खामियों पर बात

इन सब के बीच भास्कर ने दो दर्जन राजनीतिक कार्यकर्ताओं से बातचीत की ताकि तेजस्वी और चिराग की राजनीति के साथ दोनों की खूबियाें-खामियों को जाना जाए। इस आधार पर तेजस्वी यादव और चिराग पासवान की 5 खूबियां और 5 खामियां रख रहे हैं। ये वैसी खूबियां-खामियां हैं जो आने वाले समय में भी बिहार की राजनीति को प्रभावित करने का दम रखती हैं।

तेजस्वी की 5 खामियां

  • आपदा काल में जनता को उनके हाल पर छोड़ देने का आरोप लगता रहा है। हालांकि, जवाब उन्होंने दिया कि वे एक पुत्र भी हैं।
  • तेजस्वी यादव बहुत पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन राजनीति में इससे बहुत खास फर्क नहीं पड़ता।
  • अपने ऐसे सलाहकारों से घिरे रहते हैं जिन्होंने तेजस्वी को ' एलीट ' नेता बनाकर छोड़ दिया है।
  • खुद CM पद की रेस में रहने के लिए कई नेताओं को किनारे किया, इसका नुकसान झेल रहे हैं। चुनाव से पहले इन्हें संभाल लेते तो वे नेता प्रतिपक्ष नहीं, उससे आगे रहते।
  • आय से अधिक संपत्ति अर्जित कर लेने का आरोप लगता रहा है।

चिराग पासवान की 5 खामियां

  • वे अपने सभी सांसदों को एकजुट रखने में असफल रहे। उनकी आक्रामकता से खुद उन्हें ही ठेस लगी है।
  • 2014 के लोकसभा चुनाव में चिराग ने ही डूब चुकी LJP की नैया पार उतारी थी, लेकिन 2020 के विधानसभा चुनाव में चूक गए। 135 में एक जीते।
  • अब तक उन्होंने खुद को रामविलास पासवान की तरह मास नेता साबित नहीं किया है।
  • अपनी हीरो वाली छवि से बाहर नहीं निकल पाए हैं। रफ-टफ नेता नहीं है।
  • साफ वाली पॉलिटिक्स की जगह कंफ्यूजन वाली पॉलिटिक्स का नुकसान उनकी पार्टी को हुआ, हालांकि वे बदला लेने में सफल हुए।

चिराग में लीडरशिप के गुण ज्यादा, वे ज्यादा सोशल भी दिखते हैं

राजनीतिक विश्लेषक ध्रुव कुमार कहते हैं कि तेजस्वी यादव और चिराग पासवान में ज्यादा समझदार चिराग पासवान लगते हैं। चिराग में लीडरशिप के गुण ज्यादा हैं। उन्होंने जो ठान लिया वह कर दिखाया। वे 2025 विधानसभा चुनाव की तैयारी में हैं। चाचा के विद्रोह के बावजूद दिखाया कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी उनके साथ है।

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