चिराग के खास सौरभ ने पारस को दिखाया आईना:पत्र लिखकर कहा- गठबंधन किससे हुआ, किससे नहीं? इसको लेकर परिवार नहीं तोड़ा जाता

पटनाएक महीने पहले
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चिराग पासवान के करीबी सौरभ पांडेय ने शनिवार को पशुपति पारस के खिलाफ मुंह खोला है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस को चिट्ठी लिख तर अपनी और चिराग की स्थिति को स्पष्ट किया है। साथ ही पारस पर सवाल भी खड़े किए हैं और इसका जवाब मांगा है।

चिट्ठी को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करते हुए सौरभ ने लिखा है- "आपने मुझे बुरा-भला सार्वजनिक रूप से कहा है। इसलिए ये चिट्ठी सार्वजनिक कर रहा हूं।' यह चिट्ठी तब सामने आई जब यह चर्चा है कि सौरभ को चिराग ने साइड लाइन कर दिया है। इस तीन पेज की चिट्ठी में सौरभ ने चिराग के प्रति अपनी वफादारी दिखाई है।

सौरभ पांडेय ने चिट्ठी में लिखा है- "15 सीट पर चुनाव लड़कर क्या बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट को बलि चढ़ा देना चाहिए? चिराग पासवान आपका सम्मान अपने विचार से कम नहीं करते हैं। उनकी माता के मुंह से आपके लिए हमेशा मैंने अच्छा सुना था। मात्र राजनीति में गठबंधन किससे हुआ, किस से नहीं हुआ, इस बात पर आप परिवारिक दूरी बना लें, यह उचित नहीं दिखता। स्वर्गीय रामविलास पासवान जी के रहते हुए कई ऐसी घटनाएं मेरे सामने हुई है, जिसका मैं जिक्र नहीं करना चाहता।'

बेवजह मेरे ऊपर शब्दों के बाण छोड़े जा रहे हैं

वह अपनी चिट्ठी में पशुपति पारस को चाचा जी कहकर संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने लिखा है- "आपके द्वारा गैर जिम्मेदारी से और बेवजह मेरे ऊपर शब्दों के बाण छोड़े जा रहे हैं, जो कहीं से भी प्रासंगिक नहीं है। आपके द्वारा कई बार मेरे ऊपर बोलने के बावजूद मैंने कभी कुछ नहीं कहा। स्वर्गीय रामविलास पासवान का देहांत हुए और बिहार चुनाव समाप्त हुए लगभग एक वर्ष हो चुका है, मैंने बिहार को ना सिर्फ अपनी आंखों से बल्कि स्वर्गीय पासवान की आंखों से देखा है।'

बिहार फर्स्ट के मूल में भारत फर्स्ट छिपा है

उन्होंने आगे लिखा है- "पिछला बिहार चुनाव मैंने और हम सबने राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए बिहार फर्स्ट की प्रतिज्ञा के साथ लड़ा था। बिहार फर्स्ट के मूल में भारत फर्स्ट छिपा है, जिस दिन बिहार फर्स्ट बन जाएगा, भारत फर्स्ट होगा। मेरी इस सोच पर अध्ययन कर मैंने बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट डॉक्यूमेंट बनाया था। जिसकी चर्चा रोज हर बिहारी करता है। इस सोच से स्वर्गीय पासवान और चिराग पासवान प्रभावित थे।'

MP-MLA हजारों होते हैं, नेता कोई कोई होता है

सौरभ ने लिखा है- "14 अप्रैल 2020 को गांधी मैदान में प्रस्तावित रैली में स्वर्गीय रामविलास जी के सान्निध्य में बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट 2020 को जारी होना था, लेकिन लॉकडाउन लगने के कारण स्थगित हो गया। चिराग लोकप्रिय नेता बन रहे हैं। उनके पिता मुझसे अक्सर कहा करते थे कि MP- MLA हजारों होते हैं, लेकिन नेता कोई कोई होता है। मुझे खुशी है उनका बेटा आज नेताओं की श्रेणी में आ रहा है। मुझे विश्वास है कि चिराग पासवान वहां पहुंचेंगे, जहां उन्हें उनके पिता देखना चाहते थे।'

पिछले 8 वर्षों में मेरी आपसे कोई सीधी बात नहीं हुई

चिराग के मित्र ने लिखा- "पिछले बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले स्वर्गीय रामविलास पासवान की मृत्यु हो चुकी थी। चिराग अकेले थे, यहां मेरी जिम्मेदारी थी कि मैं अपने मित्र और भाई का सही मार्गदर्शन करूं, जिससे उनकी भलाई हो और बिहार की भी भलाई हो। आप मुझसे बड़े हैं। अनुभवी हैं। मैंने कभी आपका अनादर नहीं किया है। पिछले 8 वर्षों में मेरी आपसे कोई सीधी बात नहीं हुई। सिर्फ आपसे मुस्कुराकर मिलना था। आपसे आशीर्वाद लेने के सिवाय किसी विषय पर कभी कोई चर्चा भी हो ऐसा मुझे याद नहीं आता। सिर्फ एक बार की बात मुझे याद है, जहां आपने मुझसे अपने घर बुलाकर कृष्णराज को भाजपा से टिकट दिलवाने की बात की ताकि वह सुरक्षित जीत सके। इस पर मैंने आपको चिराग भैया से बात करने की सलाह दी थी।'

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