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बिहार में अब 50-50 का फसाद:JDU को चाहिए बराबर नंबर में मंत्री, BJP को भी मिले विभागों से दिक्कत, इसलिए कैबिनेट विस्तार अटका

पटना3 महीने पहलेलेखक: शालिनी सिंह
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BJP के बिहार से लेकर दिल्ली तक के नेता कैबिनेट विस्तार मसले को लेकर CM नीतीश से मिल चुके हैं। - फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
BJP के बिहार से लेकर दिल्ली तक के नेता कैबिनेट विस्तार मसले को लेकर CM नीतीश से मिल चुके हैं। - फाइल फोटो
  • जदयू, अरुणाचल कांड के साथ-साथ लोजपा पर भी BJP से मुआवजा चाहती है
  • एक फरवरी को अपने केंद्रीय नेतृत्व से मिलेंगे BJP नेता, उसके बाद ही कुछ फाइनल

बिहार में नीतीश कैबिनेट के विस्तार पर चुप्पी छा गई है। आलम यह है कि अब BJP और JDU के बड़े नेता भी इस मामले पर बयान देने से कन्नी काटने लगे हैं। अंदर से मिली जानकारी कहती है कि बिहार में 50-50 का फसाद कैबिनेट विस्तार में सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है। JDU अब कैबिनेट में 50-50 के फॉर्मूले पर अड़ गई है। इसके पहले BJP ज्यादा सीटों की बदौलत कैबिनेट में मंत्रियों के ज्यादा सीटों की हकदार थी। फिर अरुणाचल कांड हुआ और BJP बैकफुट पर आ गई। अरुणाचल में JDU के जीते हुए 6 विधायक BJP में शामिल हो गए। तो अब बिहार कैबिनेट में JDU खुद को मिले हर गम का सिला चाहती है।

दर्जन भर मीटिंग हो गई, मिला कुछ नहीं

BJP कैबिनेट विस्तार को लेकर सरगर्मी दिखा रही है। दिल्ली से लेकर बिहार तक के BJP नेता आधा दर्जन से अधिक बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ एक अणे मार्ग में मुलाकात कर चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद अबतक विस्तार नहीं हो पाया। JDU के अड़ने के पीछे बड़ी वजह लोजपा भी है। पार्टी का मानना है कि बिहार चुनाव में JDU की यह हालत लोजपा की वजह से हुई। लोजपा, BJP की ही साथी है। ऐसे में BJP को ही इसका भुगतान करना होगा। JDU, लोजपा की वजह से लगभग 35 सीटों पर खुद को हुए नुकसान का दावा करती रही है।

संख्या के आधार पर मंत्री पद दे रही BJP

BJP नए जनादेश के मुताबिक मंत्रिमंडल का विस्तार करना चाहती है। पार्टी का कहना है कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी दी जा चुकी है। अब संख्या के हिसाब मंत्रिमंडल का कोटा तय किया जाए। सीटों के गणित के मुताबिक, हर 7 विधायक पर 2 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस तरह विधायकों की संख्या के लिहाज से BJP के 20-22 और JDU के 12-14 मंत्री का कोटा बनता है। इसमें एक-एक मंत्री वीआईपी और जीतन राम मांझी की पार्टी हम के हैं। वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चाहते हैं कि मंत्रिमंडल में BJP-JDU 17-17 और हम-वीआईपी के एक-एक सदस्य को जगह मिले।

बांटे गए विभागों में बदलाव चाहती है BJP

अब यह भी कहा जा रहा है कि BJP अपने विभागों से खुश नहीं है। वो शिक्षा और गृह जैसे विभाग अपने खाते में लाना चाहती है। नीतीश मंत्रिमंडल में फिलहाल 14 मंत्री हैं, जिसमें 7 BJP से, 5 JDU से और एक-एक हम व VIP से है। पार्टियों के बीच विभागों का भी बंटवारा कर दिया गया है। 21 विभाग BJP के पास हैं तो 20 JDU के पास, 2 विभाग हम के पास और एक VIP के पास है। JDU के पास गृह, सामान्य प्रशासन, कैबिनेट, शिक्षा, उर्जा, जल संसाधन, ग्रामीण विकास और ग्रामीण कार्य विभाग जैसे प्रमुख विभाग हैं। BJP के पास स्वास्थ्य, सड़क, वित्त, वाणिज्य, पीएचईडी, उद्योग और कृषि जैसे विभाग हैं।

BJP के बड़े नेताओं का इंतजार

BJP-JDU के बीच मंत्रियों की संख्या से लेकर विभागों का फसाद बहुत बढ़ चुका है। BJP में इस उलझन को सुलझाने के लिए आलाकमान से वक्त मिलने का इंतजार हो रहा है। माना जा रहा है कि 1 फरवरी को बिहार BJP के नेताओं को दिल्ली में आलाकमान से मुलाकात का वक्त मिल सकता है। इसी मुलाकात में बिहार मंत्रिमंडल के विस्तार में फंसे मामलों पर चर्चा होनी है।

मंत्रिमंडल विस्तार का रार, विधानपरिषद् मनोनयन पर भारी

बिहार विधानपरिषद् के राज्यपाल कोटे की 12 सीटों पर भी मनोनयन लटका हुआ है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि इसकी वजह मंत्रिमंडल विस्तार में दोनों दलों के बीच सहमति नही बन पाना है। हालांकि इसपर दोनों दलों के बीच सहमति बन चुकी है। दोनों ही दल राज्यपाल कोटे की 6-6 सीटें लेने पर तैयार हो चुके हैं।

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