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सरकारी अनदेखी से भी गहराया ऑक्सीजन संकट:मेट्रो-मकान या दुकान से बड़ी जिंदगी, फिर भी इंडस्ट्रियल सप्लाई नहीं रुकी; झारखंड-बंगाल से भी संकट

पटना6 महीने पहलेलेखक: मनीष मिश्रा/अमित जायसवाल
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कोरोना के कारण मेडिकल सेक्टर में मांग बढ़ने के बावजूद 70-90%ऑक्सीजन गैस का हो रहा इंडस्ट्रियल यूज़। - Dainik Bhaskar
कोरोना के कारण मेडिकल सेक्टर में मांग बढ़ने के बावजूद 70-90%ऑक्सीजन गैस का हो रहा इंडस्ट्रियल यूज़।

कोरोना मरीजों की जान बचाने के लिए ऑक्सीजन नहीं होने के कारण अस्पताल NO ENTRY का बोर्ड लगा रहे और दूसरी तरफ जीवनरक्षक गैस का इंडस्ट्रियल इस्तेमाल नहीं रोका जा रहा है। मेडिकल एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े जानकारों का मानना है कि अब भी 70 से 90 प्रतिशत ऑक्सीजन गैस का कॉमर्शियल यूज़ हो रहा है, जबकि कोरोना के कारण मेडिकल सेक्टर में इसकी मांग बहुत ज्यादा बढ़ गई है। दैनिक भास्कर ने अस्पतालों से कोविड-19 के मरीजों को लौटाए जाने की खबर सामने आने के साथ ही ऐसे विशेषज्ञों से बात की तो बड़ा कारण यही नजर आया। दूसरा कारण झारखंड और पश्चिम बंगाल से सप्लाई संकट के रूप में सामने आया। हालांकि, एक तीसरा कारण ‘आपदा में अवसर’ ढू़ंढने वाले कालाबाजारियों के रूप में भी दिखा।

अभी प्राइवेट परेशान, सरकारी भी बहुत दूर नहीं

सरकार ने सबसे पहले सरकारी अस्पतालों को ऑक्सीजन देने का नियम रखा है। इसके बाद प्राइवेट अस्पतालों को आपूर्ति करनी है। सबसे बड़ी सप्लायर ऊषा गैस के अधिकारियों का कहना है कि पटना में AIIMS, IGIMS, PMCH, NMCH और IGIC के बाद ही किसी प्राइवेट की ओर सप्लाई दे सकता है कोई। इनकी डिमांड भी अभी अप है और प्राइवेट की भी। लिक्विड नहीं आने के कारण प्रोडक्शन काफी प्रभावित हो रहा है। एक दिन में एक टैंकर की व्यवस्था भी हो जाए तो हर दिन 2000 सिलेंडर का उत्पादन एक कंपनी में होने लगेगा। लेकिन, अगर यही स्थिति बनी रही तो प्राइवेट के बाद सरकारी अस्पतालों में भी ऑक्सीजन संकट छा सकता है। परेशानी के 3 कारण और समाधान के उपाय भी देखिए -

  • कारण-1

जीवनरक्षक गैस का कटिंग-वेल्डिंग में इस्तेमाल हो रहा

अस्पताल एक-एक कर बेड तक पाइपलाइन से ऑक्सीजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर रहे हैं, लेकिन यह गैस भी बाहर से ही आती है। कोरोना के कारण इसकी डिमांड बहुत बढ़ गई है, लेकिन सप्लाई बढ़ने की जगह घट गई है। सवेरा कैंसर अस्पताल के डॉ. वी. पी. सिंह कहते हैं कि “इस समय ऑक्सीजन संकट का समाधान सिर्फ सरकार के पास है। 90 प्रतिशत तक ऑक्सीजन सप्लाई कॉमर्शियल यूज़ के लिए है। उसे तत्काल रोकना चाहिए।” दरअसल, इसी गैस का इस्तेमाल गैस वेल्डिंग के लिए होता है। रोलिंग मिल्स, गैस कटिंग, बिल्डिंग निर्माण कार्यों के साथ इस समय गैस पाइपलाइन (PNG), नमामि गंगे, मेट्रो जैसे प्रोजेक्ट में भी कटिंग-वेल्डिंग आदि के लिए इसी गैस का इस्तेमाल हो रहा है और डॉक्टरों की नजर में इस विकट परिस्थिति में यह अपराध है। जगदीश मेमोरियल हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. आलोक कहते हैं कि “भर्ती मरीजों के लिए गैस का इंतजाम नहीं हो पा रहा है और नए मरीजों को जगह नहीं मिल पा रही है, इसलिए पहले जीवनरक्षक गैस को जीवनरक्षा में लगाना चाहिए।”

  • कारण-2

झारखंड-बंगाल से लिक्विड नहीं, इसलिए प्रोडक्शन घटा

बिहार में कुल 14 कंपनियां हैं, जो प्रदेश के सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को ऑक्सीजन की सप्लाई करती हैं। पटना जिले में ऐसी 4 कंपनियां हैं - पटना में सौरभ गैस, फतुहा में बंशी एयर गैस, बाइपास रोड सिपारा में ऊषा एयर प्रोडक्ट्स लिमिटेड और संबलपुर दीदारगंज में पाटलिपुत्रा इंडस्ट्रियल गैसेज प्रा. लिमिटेड। इनमें ऊषा प्रदेश की सबसे पुरानी और सबसे अधिक क्षमता वाली कंपनी है। भास्कर ने इसके अधिकारियों से बात की। अधिकारियों का कहना है कि दो तरह से गैस बनाया जाता है - एक तो मशीन से ऑक्सीजन तैयार किया जाता है और दूसरा लिक्विड से ऑक्सीजन बनाया जाता है।

कंपनी की मशीन से ऑक्सीजन बनाने की क्षमता 1 दिन में लगभग 1000 सिलेंडर है। लिक्विड से भी वह एक दिन में 800 सिलेंडर तैयार कर सकती है। झारखंड से लिक्विड नहीं आने के कारण एक तरफ 1000 सिलेंडर का प्रोडक्शन कम हो गया है और दूसरी तरफ डिमांड कई गुणा बढ़ गई है। झारखंड में ऊषा के लिए दो कंपनियां काम करती हैं। एक कंपनी की फैक्ट्री बंगाल में भी है, लेकिन दोनों कंपनियों से लिक्विड नहीं आ पा रहा है। एक दिन में एक टैंकर की डिमांड है, जबकि इसे मिलने में 3 से 4 दिन का समय लग जा रहा है।

भास्कर ने इन दो समस्याओं के संबंध में स्टेट ड्रग कंट्रोलर रविंद्र कुमार से बात की तो उन्होंने कहा- “झारखंड की कंपनी को बिहार से प्रधान सचिव की तरफ ने पत्र भेजा है कि लिक्विड की सप्लाई नियमित की जाए जिससे मरीजों को ऑक्सीजन की समस्या नहीं हो। पटना डीएम ने भी कंपनी और अस्पतालों के साथ बैठक की है। बहुत जल्द समस्या का समाधान हो जाएगा।”

  • कारण-3

इस आपदा में भी कालाबाजारियों ने तलाशा अवसर

हर तरफ त्राहिमाम है और कालाबाजारियों ने इस आपदा को अवसर में बदलने के लिए गैस को स्टॉक करना और ऊंची कीमत में बेचना शुरू कर दिया है। पटना जिले में ऑक्सीजन गैस को लेकर इस संकट की जानकारी जिला प्रशासन तक पहुंच चुकी है। कुछ गैस एजेंसी वाले इसकी कालाबाजारी करने में जुटे हैं, इसकी जानकारी मिलने के बाद पटना के DM डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने एक आदेश जारी किया है। DPRO प्रमोद कुमार के अनुसार ऑक्सीजन गैस की सप्लाई करने वाली सभी एजेंसियों को सख्त आदेश दिया गया है कि कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे अस्पतालों को गैस सप्लाई में लापरवाही बरती तो आपदा और महामारी एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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