अग्निपथ के विरोध में आज कांग्रेस का सत्याग्रह:कन्हैया कुमार, समर्थकों के साथ पटना सिटी में धरना पर होंगे

पटना7 महीने पहले
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कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार की फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार की फाइल फोटो।

सेना में बहाली को लेकर केन्द्र सरकार की अग्निपथ योजना के विरोध में और उसे वापस लेने की मांग के साथ कांग्रेस बिहार के विधान सभा क्षेत्रों में आज सत्याग्रह कर रही है। इस राज्यव्यापी कार्यक्रम में कांग्रेस के नेताओं, कार्यकर्ताओं, समर्थकों द्वारा धरना दिया जाएगा। कांग्रेस के चर्चित युवा नेता कन्हैया कुमार भी पटना आए हुए हैं।

कन्हैया कुमार ने इसको लेकर रविवार को कांग्रेस कार्यालय सदाकत आश्रम में प्रेस कांफ्रेंस कर मोदी सरकार की खूब आलोचना की और कहा कि वन रैंक, वन पेंशन की बात करने वाले ने नो रैंक, नो पेंशन, वनली टेंशन कर दिया है, इससे युवाओं में काफी आक्रोश है। आक्रोश के बीच नरेन्द्र मोदी एक बार भी युवाओं को संबोधित करने नहीं आए और सेनाध्यक्षों को आगे कर दिया। कन्हैया कुमार सोमवार को होने वाले सत्याग्रह कार्यक्रम में पटना सिटी स्थित चौक शिकारपुर में आयोजित धरनास्थल में शामिल हो रहे हैं।

पटना सिटी सत्याग्रह की जिम्मेदारी प्रवीण कुशवाहा को दी गई

इस सत्याग्रह कार्यक्रम की जवाबदेही अलग-अलग विधान सभा क्षेत्रों में अलग- अलग नेताओं को दी गई है। जिन विधान सभा क्षेत्रों में कांग्रेस के विधायक हैं वहां की बागडोर वहां के कांग्रेस विधायक को सौंपी गई है। पटना साहिब की जवाबदेही प्रवीण कुशवाहा, फुलवारी की शरबत जहां फातिमा, दीघा की निधि पांडेय, बांकीपुर की सुनीता साक्षी, कुम्हरार की सुधा मिश्रा, फतुहा की शिशिर साह, दानापुर की जया मिश्रा, मनेर की शीला कुशवाहा, मसौढ़ी की नाकिब एकता, पालिगंज की डॉ. अशोक गगन, विक्रम की सिदार्थ सौरभ, संदेश की आशित नाथ तिवारी और आरा की रीता सिंह को दी गई है।

अग्निपथ योजना की खामियां गिना रही कांग्रेस

कांग्रेस ने अग्निपथ योजना का विरोध करने के लिए पर्चा भी प्रकाशित किया है। इसमें अग्निपथ की नीतिगत खामियां गिनायी गई हैं। क्या-क्या कहा जानिए...

  • नौजवान में चार साल के बाद हर समय चिंता होगी कि हमारा क्या होगा। चार साल बाद जब हम सेना से निकाले जाएंगे तब क्या करेंगे?
  • पढ़ाई- लिखाई की उम्र में सेना में भर्ती होने वाले नौजवान 22-25 साल की उम्र में फिर बेरोजगार हो जाएंगे।
  • अग्निपथ योजना के तहत शामिल होने वाले अग्निवीरों को किसी भी तररह का रैंक नहीं दिया जाएगा और न ही पेंशन या ग्रेच्युटी दी जाएगी।
  • सेना के पुराने ढ़ांचे में बदलाव का असर अभियानगत तैयारियों पर पड़ेगा।
  • न तो अग्निवीरों को दिव्यांगता भत्ता मिलेगा, न ही पूर्व सैनिकों को मिलने वाले स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ मिलेगा और न ही सीएसडी की सुविधाएं अथवा बीमा योजना का लाभ मिलेगा। सेवानिवृत अग्निवीरों को पूर्व सैनिक का दर्जा भी प्राप्त नहीं होगा।
  • अमूमन हर साल केवल थल सेना में 60 हजार भर्तियां होती हैं। यह 60 हजार पक्की नौकरियां होती थीं। परमानेंट नौकरियां होती थीं, लेकिन अब हर साल तकरीबन 50 हजार भर्तियां होंगी। यह भी पक्की नौकरियां नहीं बल्कि कच्ची नौकरियां होंगी।
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