कांग्रेस ने CAG रिपोर्ट पर नीतीश सरकार को घेरा:कहा- यह बिहार सरकार की पोल खोलने वाली रिपोर्ट, खर्च नहीं कर पा रही जेंडर बजट

पटना3 महीने पहले
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महालेखाकार कार्यालय। - Dainik Bhaskar
महालेखाकार कार्यालय।

विधानसभा सत्र के अंतिम दिन सदन के पटल पर वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत कैग रिपोर्ट बिहार सरकार में फैले अव्यवस्था की पोल खोलने वाला है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में कई शंकाओं को व्यक्त किया है। बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता और रिसर्च विभाग के चेयरमैन आनंद माधव ने ये बातें कही हैं।

पूरी सरकार एडहॉक पर

उन्होंने कहा है कि सच्चाई तो यह है कि पूरी की पूरी सरकार का काम एडहॉक और इवेंट पर ही आधारित होता है व्यवहारिक नहीं। विभिन्न परियोजनाओं की राशि का 3880 उपयोगिता प्रमाण पत्रों को प्रस्तुत नहीं किया गया। बिहार सरकार द्वारा इन परियोजनाओं को 92,687 करोड़ प्रदान किया गया था, जिसका कोई लेखा जोखा अब तक नहीं दिया गया है। कैग ने साफ शब्दों में कहा है कि इस तरह उपयोगिता प्रमाण पत्र को नहीं देना आवंटित राशि के दुरुपयोग और धोखाधड़ी का जोखिम बढ़ाता है।

जेंडर बजट में आवंटित 2932 करोड़ रुपए सरकार खर्च नहीं कर पाती

आनंद माधव ने कहा कि इससे सरकार की मंशा का साफ-साफ पता चलता है। माधव ने यह भी बताया कि सरकार स्वयं को महिला सशक्तिकरण का पक्षधर बतलाती है पर विडंबना यह है कि जेंडर बजट में आवंटित 2932 करोड़ रुपए सरकार खर्च नहीं कर पाती। तो क्या सिर्फ सरकार कागजों पर महिला सशक्तिकरण का गीत गाती है? दूसरी ओर बाल कल्याण के मद में भी 2958 करोड़ रुपए खर्च नहीं हो पाता है। ये बात अलग है कि स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार घूम- घूम कर बिहार में कुपोषण के कारण बच्चों के ठिगने विकास पर दुख प्रकट करते रहे हैं।

डबल इंजन की सरकार अपनी जिम्मेवारी का निर्वहन करने में सक्षम नहीं

उन्होंने कहा कि कैग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 35 लोक उपक्रमों को 20145.84 करोड़ रुपए की बजटीय सहायता, अनुदान और गारंटी प्रदान किया गया है। ये उपक्रम पिछले कई वर्षों से प्रावधानों का उल्लंघन कर रहे हैं और अपने खातों का अंतिम रूप नहीं दे रहे। कैग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ये उपक्रम अपनी जिम्मेवारी का निर्वहन करने में असमर्थ हैं। सच तो यह है कि ये डबल इंजन की सरकार अपनी जिम्मेवारी का निर्वहन करने में सक्षम नहीं है। अगर ऐसा होता तो कैग इस तरह की आशंकाओं को व्यक्त नहीं करता। कैग की रिपोर्ट यह बतलाती है कि दाल में काला नहीं वरन पूरी दाल ही काली है। पटना उच्च न्यायालय ने भी फरवरी 2021में इस संदर्भ में सरकार को फटकार लगाई थी।