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भास्कर एक्सक्लूसिव:अनुग्रह पर ग्रहण; कोरोना से पटना में 214 मरे, 80 को ही मिली 4-4 लाख की अनुग्रह राशि

पटनाएक महीने पहलेलेखक: मनीष मिश्रा
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  • सरकारी आंकड़ों में कोरोना से बिहार में 1011 की मौत के बावजूद 762 को ही मिला यह पैसा
  • ऐसी मौत पर ‘तत्काल’ राहत राशि देने का निर्देश, आचार संहिता के साथ ठहर गईं इनकी फाइलें

बिहार में कोरोना से ‘असामयिक मौत’ के बाद ‘तत्काल’ अनुग्रह राशि देने का नियम मई में लागू हुआ। शुरुआत में यह नियम चला भी। बाकायदा बुलाकर चेक दिए गए। लेकिन, अब गति थम गई है। सरकारी आंकड़ों में पटना के 214 कोरोना पॉजिटिव मरीजों की मौत हुई है, इनमें से अबतक 80 को ही 4-4 लाख की यह अनुग्रह राशि मिली है। बिहार सरकार बिहार में कोरोना से अबतक 1011 मौत ही दिखा रही है और इनमें से भी 762 को ही यह राशि मिली है। 'दैनिक भास्कर डिजिटल' की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि आचार संहिता लागू होने के बाद पहले से किसी तरह खिसक रही योजना सीधे ठप हो गई। 25 सितंबर से अबतक अनुग्रह अनुदान की ऐसी फाइलें जहां की तहां पड़ी हुई हैं।

मौत पर अनुदान में कई विभागों का जंजाल

कोरोना से मौत के बाद चार लाख रुपए का अनुदान पाना आसान नहीं है। सिविल सर्जन कार्यालय से लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति तक बड़ा रोड़ा है। यहां मौत की फाइलें दौड़ती नहीं रेंगती हैं। सिविल सर्जन डॉ. विभा कुमारी सिंह का कहना है कि कोरोना से मौत के बाद परिवार के सदस्य को ऑफलाइन आवेदन करना होता है। इसमें कोविड पॉजिटिव की रिपोर्ट के साथ संबंधित मेडिकल संस्थानों में हुए इलाज की पूरी फाइल के साथ मृतक से संबंधित प्रमाण पत्र देना होता है। अगर संबंधित कोरोना पॉजिटिव का डेटा पोर्टल पर फीड है तो ठीक, नहीं तो आवेदन स्वीकृत नहीं होगा। सिविल सर्जन कार्यालय से फाइल आगे राज्य स्वास्थ्य समिति की तरफ बढ़ती है, वहां से सीएम रिलीफ फंड कार्यालय तक पहुंचती है। डिजिटल युग में मैनुअल फाइल लंबे सफर के बाद डीएम कार्यालय में एडीएम आपदा के पास पहुंचती है और फिर अनुदान राशि पीड़ित परिवारों तक पहुंचती है। इस प्रक्रिया में कम से कम 15 दिन का समय लग जाता है, लेकिन पटना में चार-चार माह से मदद नहीं मिल पाई है।

6 कार्यालयों का चक्कर, मनमानी का खेल उजागर

कोविड-19 को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया गया है, लेकिन आपदा प्रबंधन विभाग से इसका कोई लेना-देना नहीं है। 'दैनिक भास्कर डिजिटल' की टीम कोरोना पॉजिटिव की मौत के बाद अनुदान की प्रक्रिया की पड़ताल में कई विभागों के चक्कर काटती रही। हर विभाग एक दूसरे पर जानकारी की बात कहकर घुमाता रहा। कुल 6 विभागों का चक्कर लगाने के बाद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। अब आप भी देखिए 6 विभागों के चक्कर में कैसे मनमानी का सच उजागर हुआ है।

1. बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण खुद अनजान
'दैनिक भास्कर डिजिटल' की टीम बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण पहुंची। यहां कोरोना से मौत के बारे में जानकारी के लिए अधिकारियों से संपर्क किया गया तो जवाब मिला कि यहां तो सिर्फ जागरुकता को लेकर काम किया जाता है। इसकी जानकारी पटेल भवन में स्थित आपदा प्रबंधन कार्यालय से मिल पाएगी। यहां के अफसरों को अनुग्रह राशि के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

2. बिहार आपदा प्रबंधन विभाग ने नकारा
बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर दैनिक भास्कर की टीम पटेल भवन स्थित बिहार आपदा विभाग कार्यालय पहुंची। यहां अफसरों से मिलना या कार्यालय में प्रवेश करना आम आदमी के लिए आसान नहीं। गेट पर गार्ड ने काफी पूछताछ के बाद विभाग के ओएसडी से टेलीफोन पर बात की। अनुमति मिलने के बाद कार्यालय में प्रवेश करने दिया गया। विभाग के ओएसडी अविनाश कुमार से मुलाकात हुई और उन्होंने सीधे नकार दिया कि कोरोना से मरने पर अनुदान देने का यहां से कोई मामला नहीं है। बताया गया कि राज्य स्वास्थ्य समिति और सिविल सर्जन कार्यालय के साथ सीएम रिलीफ फंड में पता करिए।

3. सिविल सर्जन कार्यालय में नहीं मिली जानकारी
'दैनिक भास्कर डिजिटल' की टीम सिविल सर्जन कार्यालय, पटना पहुंची जहां सिविल सर्जन डॉ. विभा कुमारी ने बताया कि फाइल तो राज्य स्वास्थ्य समिति को भेज दी गई है। अब इससे संबंधित जानकारी वहीं से मिल पाएगी। सिविल सर्जन ने राज्य स्वास्थ्य समिति और जिला प्रशासन के साथ सीएम रिलीफ फंड का रास्ता दिखा दिया।

4. राज्य स्वास्थ्य समिति के जिम्मेदार ने नहीं उठाया फोन
'दैनिक भास्कर डिजिटल' की टीम राज्य स्वास्थ्य समिति पहुंची। सिविल सर्जन कार्यालय से जानकारी के लिए नोडल अधिकारी राजेश कुमार का मोबाइल नंबर दिया गया था। टीम कार्यालय के बाहर से लगातार राजेश कुमार को फोन करती रही लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। कार्यालय में भी उनसे मुलाकात नहीं हुई। नोडल अधिकारी के नंबर पर लगातार दो दिन में कई बार फोन किया गया लेकिन साहब ने फोन नहीं उठाया।

5. सीएम रिलीफ फंड के लिए डीएम कार्यालय का चक्कर
काफी पड़ताल के बाद जब सीएम रिलीफ फंड का काम देखने वाले डिप्टी कलेक्टर कुमार ओंकारेश्वर से बात हुई तो पता चला कि यहां से पैसा जिला प्रशासन को भेज दिया जाता है। डिप्टी कलेक्टर ने बताया अनुदान से जुड़ी जानकारी के लिए संबंधित जिले के डीएम कार्यालय में जाना होगा।

6. एडीएम आपदा ने कहा, चुनाव में व्यस्त हैं
भास्कर की टीम जब पटना डीएम कार्यालय पहुंची तो पता चला कि एडीएम आपदा ही कोरोना से मरने वालों की जानकारी रखते हैं। कार्यालय में मुलाकात नहीं होने पर जब एडीएम आपदा मृत्युंजय कुमार से फोन पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि पटना में 80 लोगों को अनुदान दिया गया है। बाकी चुनाव के कारण अभी फंसा है। उन्होंने खुद भी चुनाव में ट्रेनिंग व व्यस्तता बताकर फोन काट दिया।

कहां फंस गई कोरोना से मरने वालों की फाइल

कोरोना से मौत के बाद परिजनों को काफी दौड़ना पड़ता है। सिविल सर्जन, पटना ने बताया कि जिले के 199 मृतकों की फाइल राज्य स्वास्थ्य समिति को भेज दी गई है। लेकिन एडीएम आपदा ने बताया कि महज 80 लोगों को ही अनुदान दिया गया है। अब सवाल यह है कि 119 लोगों की फाइल कहां फंसी है। जब सीएम नीतीश कुमार ने तत्काल अनुदान राशि देने की घोषणा की थी तो फिर इतनी देरी क्यों हो रही है।

दबाई जाती है हर जानकारी

कोरोना से मृतकों को अनुदान के रूप में चार लाख रुपया मिला है या नहीं इसकी जानकारी आम आदमी नहीं ले सकता है। सिविल सर्जन कार्यालय से मृतकों के साथ उनके परिजनों का नाम और मोबाइल नंबर गोपनीय रखा जाता है। यह जानकारी क्यों नहीं साझा की जाती है, यह भी बड़ा सवाल है। दैनिक भास्कर डिजिटल टीम को भी सिविल सर्जन कार्यालय से इससे संबंधित कोई जानकारी देने से मना कर दिया गया। बताया गया उनके पास इसकी जानकारी नहीं है, इसके लिए राज्य स्वास्थ्य समिति जाना होगा।

जिम्मेदारों की मनमानी से चुनाव में फंस गया अनुदान

कोरोना मौत के मामले में आवेदन के बाद से ही जिम्मेदारों की मनमानी शुरू हो जाती है। सिविल सर्जन कार्यालय, राज्य स्वास्थ्य समिति और सीएम रिलीफ फंड के बाद जिला प्रशासन कार्यालय में मनमानी से अनुदान आचार संहिता में फंस गया है। अगर आचार संहिता लागू होने से पहले पैसा दे दिया गया होता तो समस्या नहीं आती। बिहार में बुधवार तक कुल 1011 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है, जिनमें 762 लोगों को अनुदान मिला है, जबकि 116 लोगों को अनुदान के लिए चुनाव आयोग से अनुमति मांगी गई है। पटना में 214 लोगों की मौत हुई है लेकिन अब तक 80 लोगों को ही अनुदान मिला है। अब चुनाव आयोग की अनुमति मिलने के बाद ही राहत कोष से पैसा भेजा जा सकेगा। अगर चुनाव आयोग से अनुमति मिलने में देर हुई या फिर चुनाव तक अनुदान नहीं गया तो जिम्मेदार कौन होगा, यह भी कोई बताने वाला नहीं।

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