पंचायत चुनाव के हर चरण में टूटी कोरोना गाइडलाइन:कागजों में गाइडलाइन जारी कर निगरानी भूले अफसर, मतदान में मास्क के साथ सोशल डिस्टेंसिंग भी नहीं दिखी

पटना12 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
मतदान केंद्र पर पहुंचे मतदाताओं की भीड़। - Dainik Bhaskar
मतदान केंद्र पर पहुंचे मतदाताओं की भीड़।

पंचायत चुनाव में आज सातवें चरण का मतदान हो रहा है। आज भी कोरोना की गाइडलाइन कागजी दिख रही है। कोरोना से बचाव को लेकर कोई सख्ती नहीं है। पंचायत चुनाव की आचार संहिता जारी करते समय राज्य चुनाव आयोग ने कोरोना प्रोटोकॉल में चुनाव संपन्न कराने की बात कही थी, लेकिन अब तक 7 चरण में ऐसा कहीं नहीं दिखा है।

फाइल में रह गया प्रोटोकॉल

कोरोना का प्रोटोकॉल फाइलों से बाहर नहीं निकल पाया है। बात राजधानी पटना की करें या फिर राज्य के अन्य जिले की, हर पंचायत में कोरोना की गाइडलाइन तोड़कर चुनाव कराया गया है। गाइडलाइन जारी करने वाले अफसर निगरानी में फेल नजर आ रहे हैं। जिम्मेदारी की लापरवाही और आम लोगों की मनमानी बिहार में फिर कोरोना का खतरा बढ़ा सकती है। मतदान के लिए बूथों पर बिना मास्क जाने वाले कोरोना का वह समय भूल गए हैं जब एक एक सांस के लिए लड़ाई चल रही थी। दूसरी लहर के पहले भी बिहार में कोरोना को लेकर विधानसभा चुनाव में ऐसी ही मनमानी की गई थी। कोरोना की दूसरी लहर ने यह बता दिया था कि वायरस को हल्के में लेना कितना खतरनाक है। इसके बाद भी पंचायत चुनाव में लोगों की गंभीरता नहीं दिख रही है।

बूथों पर भीड़ देखकर जाना जा सकता है खतरा

सातवें चरण के चुनाव में बूथों पर जमा हो रही बिना मास्क वाली भीड़ कोरोना का कितना बड़ा खतरा पैदा कर सकती है इसका अंदाजा किसी को नहीं है। एक भी संक्रमित भीड़ में शामिल हुआ तो पूरी चेन बन जाएगी। खतरा इस समय इसलिए अधिक है क्योंकि हाल ही में त्योहार बीता है और अधिकतर लोग दिल्ली मुम्बई के साथ बहार के राज्यों से आए हैं। 15 नवंबर को राज्य के लगभग सभी जिलों में चुनाव है और कहीं से भी कोरोना को लेकर कोई सख्ती नहीं दिख रही है। बूथों पर लोग बिना मास्क के नजर आ रहे हैं और न ही कोई सोशल डिस्टेंस का ध्यान दिया जा रहा है।

मतदान कर्मियों को भी नहीं दिया गया मास्क

राज्य के 90 प्रतिशत मतदान केंद्रों पर तैनात मतदान कर्मियों को भी मास्क और सैनिटाइजर नहीं दिया गया है। सुरक्षा को लेकर जो गंभीर हैं वह खुद से मास्क की व्यवस्था कर रहे हैं। प्रत्याशियों के प्रतिनिधि और एजेंट भी बिना मास्क के ही बूथों पर दौड़ लगा रहे हैं। हर जिले के डीएम को मास्क और सोशल डिस्टेंस को लेकर जिम्मेदारी दी गई है लेकिन अब तक कहीं भी कोई सख्ती नहीं दिखाई गई है। हर पंचायत में सुरक्षा को लेकर अधिक संख्या में पुलिस कर्मियों को लगाया गया है लेकिन उन्हें भी मास्क नहीं मुहैया कराया गया है। जिम्मेदारों की मनमानी से सुरक्षा कर्मी से लेकर मतदान कर्मी कोरोना के खतरे की जद में हैं। इस पर आम लोगों की मनमानी और भारी पड़ रही है।

बिहार में 25 एक्टिव मामले

कोरोना का मामला हर दिन भले ही कम आ रहा हो लेकिन वायरस के खतरे को नजर अंदाज करना बड़ी भूल होगी। पहली और दूसरी लहर के बीच में भी ऐसे ही लापरवाही हुई थी। बिहार में रविवार तक 25 एक्टिव मामले आए हैं। एक भी संक्रमित कई लोगों को संक्रमित कर सकता है। इस लिए ऐसे खतरों को लेकर हमेशा अलर्ट रहना होगा। बिहार में कुल संक्रमण की बात करें तो अब तक 726156 लोग कोरोना संक्रमित हुए हैं जिसमें 716468 लोग ठीक हुए लेकिन 9662 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी है। पंचायत चुनाव में लापरवाही फिर कोरोना का खतरा लाने वाली है।