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कोरोना से खुद ठीक होने की गाइडलाइन लाई नया खतरा:7 दिन में ठीक नहीं हो रहे संक्रमित, पर माना जा रहा स्वस्थ

पटना4 महीने पहले
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नई गाइडलाइन से तीसरी लहर में एक्टिव मरीजों की संख्या सबसे तेजी से कम हो रही है। - Dainik Bhaskar
नई गाइडलाइन से तीसरी लहर में एक्टिव मरीजों की संख्या सबसे तेजी से कम हो रही है।

होम आइसोलेशन में रह रहे संक्रमित कागजों में ही पॉजिटिव से निगेटिव हो रहे हैं। नई गाइडलाइन 7 दिन में होम आइसोलेशन वालों को निगेटिव मान रही है, लेकिन संक्रमित 10 दिन तक कोरोना के असर से परेशान हैं। नई गाइडलाइन से कागजों में हर दिन मिल रहे नए संक्रमितों से डेढ़ से दो गुना निगेटिव हो रहे हैं। पटना में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें RT-PCR जांच की रिपोर्ट ही 7 दिन बाद आ रही है। ऐसे में लोग खुद को निगेटिव मानकर पहले ही घर से बाहर घूम रहे हैं।

ICMR के हवाले से बिहार सरकार की नई गाइडलाइन में कहा गया है कि ऐसे संक्रमित, जो होम आइसोलेशन में हैं और जिनको पॉजिटिव रिपोर्ट के बाद लगातार 3 दिन बुखार नहीं आया है, 7 दिन बाद खुद को निगेटिव मान लें। इन्हें दोबारा कोरोना टेस्ट कराने की भी जरुरत नहीं है।

सरकार इसी नई गाइडलाइन पर होम आइसोलेशन के मरीजों को निगेटिव मान रही है। इस कारण से ही बिहार में तीसरी लहर में एक्टिव मरीजों की संख्या सबसे तेजी से कम हो रही है।

पूरी समस्या की वजह है - रिपोर्ट में देरी
बिहार में एंटीजन रिपोर्ट तो तत्काल आ रही है, लेकिन RT-PCR की रिपोर्ट में समय लग रहा है। जांच कराने वालों को रिपोर्ट समय से नहीं मिल पा रही है। कई मामलों में ऐसा हो रहा है कि जांच कराने वालों के मोबाइल पर कोई मैसेज नहीं आता और 6 दिन बाद कॉल आती है कि वह कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं।

ऐसे लोग अक्सर दो से तीन दिन में मैसेज नहीं आने से खुद को निगेटिव मान लेते हैं और सामान्य लोगों की तरह घर से निकल जाते हैं। भास्कर ऐसे 3 केस सामने ला रहा है, जिससे इस समस्या का अंदाजा आपको हो जाएगा -

  • बेउर की रहने वाली एक महिला ने 1 जनवरी को कोरोना जांच के लिए RT-PCR कराया। 4 दिनों तक मोबाइल पर कोई रिपोर्ट नहीं आई तो उन्होंने खुद को निगेटिव मान लिया। लेकिन 10 जनवरी को जिला प्रशासन के कॉल सेंटर से फोन आया कि वह पॉजिटिव हैं। इस एक कॉल से वह और उनके घर वाले परेशान हो गए।
  • एजी कॉलोनी के अपार्टमेंट में एक साथ कई लोगों की पॉजिटिव रिपोर्ट आ रही थी, उसमें कई ऐसे रहे जिन्हें लक्षण के बाद भी रिपोर्ट नहीं आई।
  • राजीवनगर के रहने वाले 40 साल के सोशल वर्कर ने जनवरी के पहले सप्ताह में जांच कराई थी। वह खुद से क्वारैंटाइन रहे और 7 दिन बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उनका कहना है कि जागरुक रहे तो खुद से होम आइसोलेशन में चले गए। कई ऐसे संपर्क वाले रहे जिनकी रिपोर्ट देरी से आई है।

होम आइसोलेशन में भी सता रहा कोरोना
कोरोना का संक्रमण तीसरी लहर में दो तरह का है। एक में तो कोई लक्षण ही नहीं है और दूसरे में हल्के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। बिना लक्षण वालों को तो कोरोना का पता भी नहीं चल रहा है और वह संक्रमित होकर ठीक भी हो जा रहे हैं।

भास्कर की पड़ताल में कई ऐसे लोग मिले हैं, जो आइसोलेशन में हैं लेकिन 7 दिन बाद भी उन्हें कोरोना सता रहा है। इसमें कई ऐसे हैं जिन्हें 7 दिन बाद बुखार हो रहा है। ऐसे मामले स्वास्थ्य विभाग में भी पहुंचे हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि गाइडलाइन के हिसाब से 7 दिन में निगेटिव मान लेना है।

नई गाइडलाइन में संक्रमितों से अधिक हो रही रिकवरी

21 जनवरी - 6896 20 जनवरी - 7277 19 जनवरी - 7554 18 जनवरी - 3786 17 जनवरी - 5907 16 जनवरी - 5809 15 जनवरी - 4489 14 जनवरी - 3829

बिहार में नए संक्रमितों से अधिक संख्या में रिकवरी हो रही है। 14 जनवरी को 6541 नए मामले आए, जबकि 3829 लोगों को निगेटिव कर दिया गया। यह समय कोरोना का चरम वाला था। वहीं 15 जनवरी को 6325 नए मामले आए और 4489 लोगों को निगेटिव घोषित किया गया, 16 को 5410 नए मामले आए जबकि 5809 को निगेटिव घोषित किया गया। इसी तरह 21 जनवरी को 3009 नए मामले आए, लेकिन निगेटिव होने वालों की संख्या 6896 बताई गई।