जोधपुर हाईकोर्ट के फैसले ने बिहार में बढ़ाया तनाव:प्रारंभिक शिक्षक नियोजन की दोनों चरणों की काउंसिलिंग रद्द करने की मांग, बीएड वालों पर आपत्ति

पटना8 महीने पहले
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राज्य में प्रारंभिक शिक्षक नियोजन को लेकर एक नई समस्या सामने आ रही है। कुछ अभ्यर्थियों ने शुक्रवार को शिक्षा विभाग को एक पत्र देकर मांग की है कि बिहार प्रारंभिक शिक्षक नियोजन 2019-20 की वर्ग एक से पांच में कराई गई दोनों चरणों की संपूर्ण काउंसिलिंग को रद्द किया जाए और सिर्फ डी.एल.एड अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग करवाई जाए। विभाग इस पर क्या निर्णय लेगा, यह अब तक विचाराधीन है, लेकिन जिनका चयन प्रारंभिक स्कूलों में बीएड की डिग्री की बदौलत हो चुका है और उन्हें नियुक्ति पत्र का इंतजार है उनकी चिंता बढ़ गई है।

आवेदनकर्ताओं ने राजस्थान, जोधपुर हाईकोर्ट के फैसले का हवाला दिया है। अभ्यर्थियों ने भास्कर को बताया, 'जोधपुर हाईकोर्ट ने 25 नवंबर 2021 को राजेन्द्र सिंह चुटिया बनाम NCTE एंड यूनियन ऑफ इंडिया मामले में बीएड को वर्ग एक से पांच तक में शिक्षक बहाली के लिए असंवैधानिक करार दिया है और अधिसूचना जारी करने की तिथि से ही इसे रद्द कर दिया है। बिहार में भी बीएड योग्यताधारी अभ्यर्थियों की वर्ग एक से पांच तक में काउंसिलिंग कराई गई है। जब NCTE की 28 जून 2018 की अधिसूचना ही अस्तित्व में नहीं है तो बिहार में बीएड योग्यताधारी अभ्यर्थी वर्ग एक से पांच वर्ग में शिक्षक बनने के योग्य नहीं हैं।' उन्होंने कहा है, 'ऐसे में बीएड योग्यताधारी अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग व नियुक्ति पत्र देना पूर्णतः असंवैधानिक है।'

प्रारंभिक और मध्य विद्यालयों के लिए हुए काउंसिलिंग में 38 हजार का चयन हो चुका है

बिहार में शिक्षक नियोजन की दो चरणों की काउंसिलिंग हो चुकी है। पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद फिर से काउंसिलिंग शुरू होगी। प्रारंभिक और मध्य विद्यालय के लिए हुई काउंसिलिंग में 38 हजार अभ्यर्थियों का चयन हो चुका है। इन्हें सर्टिफिकेट जांच के बाद नियुक्ति पत्र दिया जाना है।