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मुंगेर का चंडिका स्थान, जानिए मंदिर का इतिहास:मां के नेत्र पर श्रद्धालु करते हैं जलार्पण, 52 शक्तिपीठ में से एक है; दानवीर राजा कर्ण से भी जुड़ी है यहां की कहानी

मुंगेर20 दिन पहले
मुंगेर स्थित मां चंडिका स्थान।

नवरात्रि प्रारंभ हो चुकी है और शुक्रवार को देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा हो रही है। ऐसे में आज हम आपको बता रहे हैं मुंगेर स्थित मां चंडिका स्थान देवी मंदिर के बारे में। इसे देश के 52 शक्ति पीठों में से एक मानते हैं। कहा जाता है कि यहां माता सती का नेत्र गिरा था। इसलिए यहां माता के नेत्र की पूजा होती है। श्रद्धालु नेत्र पर जलार्पण के लिए रात 12 बजे से ही मंदिर पहुंचने लगते हैं। पंडा संजय बाबा ने बताया कि पूर्वजों के अनुसार, मंदिर काफी पुराना है और नवरात्रि में हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां रोजाना पहुंचते हैं। मंदिर का इतिहास दानवीर राजा कर्ण से भी जुड़ा हुआ है।

कोतवाली थाना क्षेत्र के बासुदेवपुर इलाके में नगर देवी के रूप में चंडिका माता का भव्य मंदिर स्थापित है। चंडिका स्थान के प्रधान पुजारी नंदन बाबा बताते हैं कि यहां माता सती के बाएं नेत्र की पूजा होती है। नवरात्रि के 9 दिन चंडिका स्थान में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मान्यता है कि यहां सच्चे दिल से आराधना करने पर भक्तों को मनवांछित फल मां प्रदान करती हैं।

विक्रम चंडी के नाम से प्रसिद्ध है चंडिका स्थान
चंडिका स्थान के पंडा संजय बाबा ने बताया कि चंडिका स्थान, विक्रम चंडी के नाम से भी पूरे भारत में प्रचलित है। इसके पीछे की कहानी बताते हुए पंडा संजय बाबा ने कहा कि महाभारत काल में दानवीर राजा कर्ण प्रतिदिन कोतवाली थाना क्षेत्र के किला परिसर स्थित कर्ण चौड़ा (जहां वर्तमान में योग आश्रम बना है) पर बैठकर सवा मन सोना दान करते थे। उसी युग में राजा विक्रमादित्य भी बड़े दानवीर बनना चाह रहे थे। लेकिन, दानवीर कर्ण के सवा मन सोना दान करने के कारण उनकी प्रसिद्धि नहीं हो पा रही थी। इसलिए राजा विक्रमादित्य भेष बदलकर राजा कर्ण के पास सेवक बन रहने लगे।

नवरात्रि के 9 दिन चंडिका स्थान में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
नवरात्रि के 9 दिन चंडिका स्थान में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

देवी सवा मन सोना देती थी
सेवक बनकर विक्रमादित्य राजा कर्ण की हर गतिविधि पर नजर रखने लगे। उन्होंने देखा कि राजा कर्ण सुबह 3 बजे जगकर मुंगेर के वर्तमान उत्तरायण गंगा कष्ट हरनी घाट में स्नान कर चंडिका स्थान पहुंचते हैं। यहां चौसठ योगिनी देवी की पूजा होती थी। वहां पहुंचकर देवी के सामने दानवीर कर्ण एक बड़े घी से खौलते कड़ाही में प्रवेश कर जाते हैं। योगिनी माता राजा कर्ण के अस्थि पर अमृत छिड़ककर उन्हें पुन: जीवित कर देती। साथ ही वरदान स्वरूप उन्हें सवा मन सोना दे देती। इसी सोने को राजा कर्ण चौराहे पर बैठ प्रजा के बीच वितरण करते थे। यह सिलसिला प्रतिदिन चलता था। यह विद्या विक्रमादित्य ने जान ली।

पुजारी मंत्र उच्चारण के पहले ओम बिक्रम चंडिकाय नमः का जाप करते हैं
पंडा संजय बाबा के अनुसार, अगले दिन राजा कर्ण के जगने से पहले विक्रमादित्य कष्ट हरनीघाट में जाकर स्नान कर खौलते हुए कड़ाही में कूद गए। जब योगिनी देवी ने प्रकट होकर विक्रमादित्य से वरदान मांगने की बात कही तो उन्होंने कहा- 'मुझे वह पोटली दे दें, जिससे आप सवा मन सोना रोज उत्पन्न करतीं है। इसके अलावा वह अमृत कलश भी दें, जिसे छिड़कर आप हमें जीवित करतीं है'। साथ ही उन्होंने कहा- 'आपके नाम के पहले विक्रम मंत्र का उच्चारण हो'।

देवी तीनों वरदान देने के बाद क्रोधित होकर बोलीं- 'जब तुमने मुझसे सारी शक्तियां ले ली तो यह कढ़ाई क्यों रहेगी'? देवी ने अपने बाएं पैर से कढ़ाई को उलट दिया। कहा जाता है कि वह कढ़ाही अभी भी शक्ति चंडिका स्थान में गर्भ गृह में है। जो उल्टे हुए कड़ाही के रूप में है। उसी के अंदर माता सती का नेत्र है। इस प्रकार चंडिका स्थान को विक्रम चंडिका के नाम से भी जाना जाने लगा और चंडिका से पहले विक्रम का नाम आता है। आज भी पंडित चंडिका माता के मंत्र उच्चारण के पहले ओम बिक्रम चंडिकाय नमः का जाप करते हैं।

महा अष्टमी के दिन मंदिर की विशेष सजावट होती है।
महा अष्टमी के दिन मंदिर की विशेष सजावट होती है।

श्रृंगार पूजा है आकर्षण
चंडिका माता का श्रृंगार पूजा प्रतिदिन शाम 7 बजे से रात्रि 8 बजे के बीच संपन्न होती है। लेकिन नवरात्रि के महा अष्टमी के दिन माता का श्रृंगार पूजा भव्य होता है। इसमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, गुजरात समेत देश के विभिन्न प्रदेशों से श्रद्धालु यहां आते हैं और मां को चढ़ावा चढ़ाते हैं। 9 दिनों में करीब 8 लाख से अधिक श्रद्धालु यहां जलार्पण के लिए पहुंचते हैं। इस दिन मंदिर की विशेष सजावट होती है। इस संबंध में चंडिका स्थान धार्मिक न्यास समिति के सचिव सागर यादव ने बताया कि इस बार नवरात्रि और श्रृंगार पूजा को लेकर पुलिस प्रशासन भीड़ को नियंत्रण करता है।

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