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भास्कर इंटरव्यू:नीतीश कुमार ने बाथे, बथानी और मियांपुर नरसंहार के अपराधियों को बरी करा दिया: दीपांकर भट्टाचार्य

पटनाएक महीने पहले
माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा है कि माले कामरेड चंद्रशेखर के अरमानों को पूरा करने के लिए महागठबंधन में शामिल हुई।
  • 15 सालों में नीतीश कुमार ने सिर्फ विकास का नारा दिया, कुछ भी लागू नहीं किया, बिना शिक्षा-रोजगार के विकास नहीं होता
  • नीतीश के समुद्र वाले बयान पर कहा- लुधियाना से लौटे मजदूरों से पूछ लीजिए कि वहां समुद्र है कि नहीं

(प्रणय प्रियंवद/मनीष मिश्रा). बिहार में भाकपा माले महागठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। चुनाव जीतने में माले ने पूरी ताकत झोंकी हुई है पर यह पूरी तरह साफ नहीं है कि अगर महागठबंधन की सरकार बनती है तो वह उसमें शामिल होगी कि नहीं।

माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा है कि माले कामरेड चंद्रशेखर के अरमानों को पूरा करने के लिए महागठबंधन में शामिल हुई। उन्होंने कहा कि मंडल की राजनीति से लेफ्ट कमजोर नहीं हुआ है।

उन्होंने सवाल उठाया कि किसानों की जमीन कौन हड़प रहा है, कौन अडानी-अंबानी राज को थोप रहा है? 15 सालों में नीतीश कुमार ने सिर्फ विकास का नारा दिया है। उन्होंने बाथे, बथानी, मियांपुर नरसंहार के अपराधियों बरी करा दिया। दैनिक भास्कर डिजिटल ने माले के राष्ट्रीय महासचिव से लंबी बातचीत की। पेश हैं उसके कुछ प्रमुख अंश...

भास्कर: इस बार बिहार का चुनाव किस मामले में अलग है?
दीपांकर: इस बार मुद्दे अलग तरह के हैं। रोजगार का सवाल बहुत बड़ा सवाल है। नौजवानों के भविष्य का सवाल बड़ा है। कोरोना काल में मजदूरों को जो झेलना पड़ा है वह बड़ा सवाल बन गया है। तीन कृषि बिल का सवाल बड़ा है। बहुत दिनों बाद ऐसा चुनाव होने जा रहा है जहां किसानों, मजदूरों, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे सवाल प्रमुखता से उभरे हैं। नीतीश कुमार का विकास रोजगार रहित विकास है। बिना शिक्षा, बिना रोजगार विकास का कोई मतलब नहीं।

भास्कर: आप पहली बार महागठबंधन के साथ चुनाव में उतरे हैं, वह भी राजद के साथ। ये अंतर्विरोध नहीं है क्या? क्या मजबूरी रही?
दीपांकर: मजबूरी तो पूरे देश के सामने आ गई। वाजपेयी जी के समय ऐसी स्थिति नहीं थी लेकिन नरेंद्र मोदी और योगी जब से आ गए हैं संविधान पर, लोकतंत्र पर हमला हो रहा है। हमारी पार्टी आंदोलन की पार्टी है। बिहार के तमाम लोगों की भी यही राय है कि बिना लड़े कुछ नहीं मिलता। बिहार में हड़ताल पर गए कई शिक्षकों की मौत हो गई। सरकार सुनती ही नहीं है जनता की बात। लोकतंत्र और संविधान खतरे में है। इसलिए हमें गठबंधन बनाना पड़ा। भाजपा खतरनाक तरीके से सत्ता कब्जा कर पूरी अर्थव्यवस्था को अडानी–अंबानी को सौंप देना चाहती है। लगता है अंग्रेजों का राज आ गया है।

भास्कर: आप विचार की बात करते हैं। राजद के साथ गठबंधन के समय आपको कामरेड चंद्रशेखर की याद आई होगी, शहाबुद्दीन की याद आई होगी?
दीपांकर: हमारे कितने सारे साथी जनसंहार में मारे गए। हम आज भी इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं। बाथे, बथानी, मियांपुर नरसंहार के अपराधियों को नीतीश कुमार ने बरी करा दिया। उसकी लड़ाई हम सुप्रीम कोर्ट में लड़ रहे हैं। हम जब चंद्रशेखर को याद करते हैं तो पाते हैं वे भगत सिंह के रास्ते पर थे। चंद्रशेखर के अरमानों को मंजिल तक पहुंचाने के लिए हम गठबंधन में गए। चंद्रशेखर के हत्यारे को सजा मिल रही है।

भास्कर: महागठबंधन की जीत हो जाती है तो क्या आप सरकार में शामिल होंगे?
दीपांकर: बहुमत आने दीजिए, उसके बाद हमलोग देखेंगे। जो सरकार बने वह चले। 25 सूत्री संकल्प पत्र पर अमल हो। दिल्ली में यूपीए की सरकार के समय वामपंथियों की अच्छी मौजूदगी थी। उस समय मनरेगा, फूड सिक्यूरिटी एक्ट, राइट टू इन्फॉरमेशन एक्ट आया।

भास्कर: हमारा सीधा सवाल है, आप महागठबंधन की सरकार में होंगे कि नहीं?
दीपांकर: उस पर हमलोगों देखेंगे। हमारी ज्यादा बेहतर भूमिका सरकार के अंदर से नहीं होगी। बाहर से मदद करते हुए, सरकार सही तरीके से चले यह देखना है।

भास्कर: चुनाव हो रहे हैं, तो जीत-हार होगी ही।
दीपांकर: सरकार बने। हम महागठबंधन को भारी बहुमत से जीत दिलाना चाहते हैं।

भास्कर: कहा जाता है कि आपकी पार्टी में अपर कास्ट डोमिनेंस है। टिकट देने में आप ओबीसी का भी ख्याल भले जरूर रखते हैं लेकिन पोलित ब्यूरो में अगड़ी जाति का बोलबाला है।
दीपांकर: हमने टिकट देने में ओबीसी का ख्याल रखा हो ऐसा कुछ नहीं किया। इसका ख्याल जरूर रखा कि देश में, बिहार में जो आंदोलन इस समय चल रहे हैं उसका सही प्रतिनिधित्व हो। इस समय 75 जैसे छात्रों-नौजवानों के आंदोलन की स्थित बन रही है। युवाओं का उभार है। छात्र- नौजवानों को 19 में 6 सीटें दीं। हमने मुद्दों पर ध्यान दिया। हमने शशि यादव की कास्ट देखकर टिकट नहीं दिया। वे स्कीम वर्कर लीडर हैं। नियोजित शिक्षक, आशा कार्यकर्ता की आवाज को बुलंद करना है।

भास्कर: सीट बंटवारे से आप कितने संतुष्ट हैं? माले तो 30 सीट की बात अकेले कर रहा था?
दीपांकर: हमने ये कहा था कि 30 सीटें हमारी प्रमुखता वाली सीटें हैं। हमने कम से कम 20 सीटों की बात की। चलिए 19 मिलीं।

भास्कर: एक समय था जब लेफ्ट पार्टियां बिहार में 30-35 सीटें जीत जाती थीं अब तीन ही जीत पाते हैं आप?
दीपांकर: हमारी पार्टी की बात कर रहे हैं तो हम 90 से लगातार चुनाव में हैं। हम पांच-सात सीटें जीतते रहे हैं। 2010 में हम एक भी सीट नहीं जीत पाए थे। 2015 में हमने तीन सीट के साथ वापसी की। सीपीआई की बहुत सीटें थीं, उस पर सीपीआई के नेता बताएंगे। चुनाव सत्ता का खेल भी होता है। सत्ता का दुरुपयोग हो रहा है। हम गरीबों, किसानों, मजदूरों की पार्टी हैं। मजदूर-किसान को न्यूनतम मजदूरी नहीं मिल रही, किसानों को समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा।

भास्कर: मंडल की राजनीति का असर वामपंथी पार्टियों पर पड़ा है?
दीपांकर: कुछ लोग ऐसा कहते हैं पर मैं ऐसा नहीं मानता। हमने तो मंडल का समर्थन किया था। हम नहीं समझते कि मंडल से बराबरी आ जाएगी लेकिन वह एक छोटा अधूरा सा ही सही कदम है।

भास्कर: आप कहते हैं कि जाति की बात नहीं करते। पार्टी के अंदरूनी ढांचे में यह दिखता है।
दीपांकर: हम जाति के आधार पर राजनीति नहीं करते। जाति देश में गरीबों को सताने के लिए है। सामाजिक गैर बराबरी को संस्थागत करने के लिए है। जाति का ऐतिहासिक तौर पर इस्तेमाल हुआ है। जब तक जाति उत्पीड़न के औजार के रूप में रहेगी, उसके खिलाफ लड़ना होगा। कुछ लोग चाहते हैं कि समाज बदले नहीं, वही लोग जातिवाद का आरोप लगाते हैं। दलित पिछड़े जब हक मांगते हैं तो आरोप लगा दिया जाता है। जो सत्ता में सदियों से बैठे हुए हैं उन पर यह आरोप नहीं लगाया जाता है।

भास्कर: सुशील मोदी ने गंभीर आरोप लगाया है कि लेफ्ट पार्टियां जमीन जोत लिया करती थीं जबरन। फसल काट लिया करती थीं। कितना सच है यह?
दीपांकर: पूरे देश में जमीन कौन हड़प रहा है, खेती को कौन बर्बाद कर रहा है, अडानी-अंबानी राज कौन थोप रहा है। भाजपा की कृषि नीति से कृषि को बड़ा खतरा है। आज ढाई सौ से ज्यादा किसान संगठन मोर्चा बनाकर लड़ रहे हैं। सुशील मोदी बताएं कि एमएसपी कैसे मिलेगा। किसानों की फसल सरकार खरीदेगी कि नहीं खरीदेगी।

भास्कर: लोजपा की नीति पर आपकी क्या राय है?
दीपांकर: देखिए, लोजपा ने जो कहा हम अलग से लड़ेंगे। 2015 में नीतीश कुमार इधर आ गए थे। लोजपा, भाजपा के साथ थी। लोग कह रहे हैं कि भाजपा, लोजपा के कंधे पर बंदूक रखकर जदयू या नीतीश कुमार को निशाना बनाने का काम कर रही है। समय से पता चल रहा होगा। पटकथा जिसने भी लिखी हो पर कभी-कभी अपनी सही दिशा में वह चल जाता है। डायरेक्टर या स्क्रिप्ट राइटर के हिसाब से नहीं चलता है।

भास्कर: कोरोना काल में चुनाव का होना कितना खतरनाक है?
दीपांकर: पार्लियामेंट में पहले ही दिन कई मरीज निकल गए। सुप्रीम कोर्ट वीडियो कांफ्रेंसिंग से काम कर रहा है। हमने चुनाव आयोग से कहा था चुनाव सुपर स्प्रेडर ना बन जाए। लोग मास्क जेब में लेकर चल रहे हैं।

भास्कर: नीतीश कुमार कह रहे हैं, समुद्र नहीं है इसलिए उद्योग नहीं लगे।
दीपांकर: सवाल है कि आज जिस तरह की इंडस्ट्री लग रही है उसके लिए समुद्र की जरूरत नहीं है। लुधियाना से लौटे मजदूरों से पूछ लीजिए कि वहां समुद्र है कि नहीं। झारखंड, छत्तीसगढ़ की भी वही स्थिति है। आप पटना यूनिवर्सिटी को केन्द्रीय विवि का दर्जा नहीं दिला सके। पटना को एजुकेशन हब तो बना सकते हैं।

भास्कर: नीतीश कुमार का किया कोई एक काम बताएं जो आपको पसंद है?
दीपांकर: 15 सालों में उन्होंने विकास का नारा दिया। शुरू में कुछ सड़कें बनी थीं। लोग कहते हैं विकास बकवास में बदल गया है। उन्होंने भूमि सुधार आयोग बनाया तो हमने स्वागत किया था। शिक्षा सुधार आयोग बनाया उसकी रिपोर्ट भी आ गई, हमने कॉमन स्कूल सिस्टम का स्वागत किया पर कुछ भी लागू नहीं किया उन्होंने।

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