वार जारी, लेकिन वॉरियर्स को भूली सरकार:दूसरी लहर में डू एंड डाइ की स्थिति में कर रहे काम, एक बार हाल भी नहीं पूछती सरकार

पटना8 महीने पहलेलेखक: शालिनी सिंह
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक तस्वीर।

पटना के एक जाने-माने सरकारी अस्पताल में इन दिनों हर रोज जबदस्त भीड़ जुट रही है, मरीजों की संख्या यहां हर रोज हजारों में है। वजह ये है कि यहां कोरोना की जांच भी हो रही, वैक्शीनेशन भी और आउटडोर में इलाज में भी हो रहा है। इसी अस्पताल के एक सीनियर डॉक्टर की मां की बीती रात कोरोना से मौत हो गई। वजह यह थी कि डॉक्टर साहब को अपनी मां के लिए अस्पताल में बेड नहीं मिल सका। यह त्रासदी एक कोरोना वॉरियर की है और उससे भी बड़ी त्रासदी यह है कि डॉक्टर साहब ने यह कहते हुए अपनी पहचान जाहिर करने से मना कर दिया कि कहीं उनकी इस तकलीफ को स्वास्थ्य विभाग सरकार की शिकायत ना समझ ले।

पिछले साल का वादा भूली सरकार
साल 2020 में जब कोरोना ने देश में दस्तक दी थी, तब डॉक्टर्स और स्वास्थ्यकर्मी सरकार और समाज का संबल बन सामने आये थे। सरकार ने भी तब उन्हें कोरोना वॉरियर्स का नाम देकर सम्मान दिया गया था। बिहार में सरकार ने सभी डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को एक माह के मूल वेतन के बराबर प्रोत्साहन राशि देने का फैसला लिया था, लेकिन इनसब के साथ जो बड़ी राहत थी डॉक्टरों के लिए वह यह कि सरकार उनकी मुश्किलों को लेकर बातचीत के टेबल पर लगातार उनसे संपर्क में रहती थी। इसबार इसका सबसे ज्यादा अभाव दिख रहा है। डॉक्टरों की मानें तो हालांकि इस बार कोरोना कहीं ज्यादा संक्रामक और गंभीर रूप में सामने आया है, लेकिन सरकार डॉक्टरों से उनकी परेशानियों पर कोई बातचीत नहीं हो रही।

कोरोना का फैलाव तेज, लेकिन आउटडोर खुले
भास्कर से हुई बातचीत में डॉक्टरों ने बताया कि संक्रमण के इस काल में अस्पतालों के आउटडोर खुले रहने से सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। अस्पतालों में रेगुलर मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें से 10 से 15 फीसदी मरीज कोरोना के लक्षणों के साथ सीधे डॉक्टरों से इलाज कराने पहुंच जा रहे हैं। ऐसे में इन मरीजों से डॉक्टरों के साथ ही बाकी मरीजों को भी कोरोना पॉजिटिव होने का खतरा है। यही नहीं कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग से लेकर सैनिटाइजेशन की व्यवस्था भी इस बार लचर है। ऐसे में कोरोना के मरीज खुले घूम रहे हैं और मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।

PPE किट से लेकर ऑक्सीजन सिलेंडर भी कम
कटिहार के मेडिकल कॉलेज में कार्यरत महिला डॉक्टर अपना नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर कहतीं हैं- हालात इस बार पिछली बार से ज्यादा खराब हैं। हमारी कॉलेज की ज्यादातर डॉक्टर कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। एक महिला डॉक्टर का तो पूरा परिवार संक्रमित हो गया है। उनका 12 साल का बेटा भी संक्रमित है। संक्रमण ज्यादा तेजी से फैल रहा है, जबकि सरकार के तौर-तरीकों में गंभीरता बेहद कम है। पीपीई किट की उपलब्धता पिछली बार से भी कहीं कम है। मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। बिहार में इसबार हालात बहुत ज्यादा खराब है। दवाई नहीं है, जांच समय पर नहीं हो पा रहे। मरीज मिलने पर ना तो एरिया सील हो रहे हैं और ना ही सैनिटाइजेशन। हमारे लिए डू एंड डाई वाली स्थिति है ।

देखते- देखते डॉक्टर्स हो रहे पॉजिटिव
IMA बिहार के अध्यक्ष सहजानंद प्रसाद सिंह कहते हैं- पिछली बार सरकार ने कम से कम उत्साहवर्धन किया था। इसबार तो वो भी डॉक्टरों को नहीं मिल रहा। कोरोना से अबतक जिन डॉक्टर्स की मौत हुई है, सरकार ने उनको भी अबतक कोई मुआवजा नहीं दिया। IMA अबतक इसके लिए स्वास्थ्य विभाग से मांग ही कर रहा है।

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