नीतीश-तेजस्वी सरकार की 3 बड़ी चुनौतियां:लालू परिवार के अन्य नजदीकियों पर भी ईडी की नजर टेढ़ी हो सकती है!

पटनाएक महीने पहले

नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव मिलकर सरकार बनाने जा रहे हैं। नीतीश कुमार ने फिर से भाजपा का साथ छोड़ दिया है। तेजस्वी यादव की पार्टी के लिए सबसे अधिक फायदे वाली बात यह कि उनकी नजर 2024 में होने वाले लोक सभा चुनाव पर है। पिछले लोकसभा चुनाव में राजद को एक भी सीटें नहीं आई थीं। राजद बिहार में जदयू के साथ मिलकर सरकार बनाने के बाद खुद को ताकतवर बनाने में तेजी से जुटेगी। महागठबंधन की सरकार बनने के बाद तीन नई चुनौतियां है, साथ ही नीतीश को राजद के साथ मिलकर सरकार चलाना आसान नहीं है...

चुनौती- 1: विभिन्न योजना मद में आने वाली केंद्रीय मदद

राजद नेता तेजस्वी यादव ने महागठबंधन की बैठक में कहा कि हमने चुनाव के समय जनता के साथ जो वादा किया है उसे पूरा करेंगे। यानी नई सरकार में नौकरियां का पिटारा खुलता है तो इसका क्रेडिट तेजस्वी यादव को जाएगा। खाली पदों को भरने को लेकर नीतीश सरकार पैसे की कमी की बात घुमा-फिरा कर करती रही है। इसलिए सरकार के लिए चुनौती होगी कि वेतन के इतने पैसे कहां से आएंगे। केन्द्र सरकार विभिन्न योजना मद में जो राशि खुले मन से बिहार को भेज रही थी उसमें उदासी आ सकती है।

चुनौती-2: राज्य सरकार कैसे महंगाई कम करती है सबकी नजर होगी

महंगाई को लेकर तेजस्वी यादव केन्द्र के साथ-साथ राज्य सरकार को भी घेरते रहे हैं। अब जब वे सरकार में आ रहे हैं तो यह बड़ा चैलेंज होगा कि कैसे वे राज्य सरकार से जुड़े वैसे टैक्स को कम करते हैं जिसको नीतीश कुमार नहीं कर सके हैं। पेट्रोल और डीजल पर राज्य सरकार का टैक्स इसका बड़ा उदाहरण है। अब भाजपा का दबाव होगा कि अपनी मांग को तेजस्वी पूरा करें।

चुनौती- 3: सीबीआई या ईडी की दबिश और तेज हो सकती है लालू परिवार पर

नीतीश कुमार ने 2017 में तेजस्वी यादव का साथ उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए छोड़ा था। नीतीश ने तेजस्वी को इसे स्पष्ट करने को कहा था। इसके बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ दी थी। अब भाजपा भी सवाल उठा रही है कि तेजस्वी का साथ क्यों छोड़ा था, याद कीजिए।

लालू परिवार पर पहले ही सीबीआई या ईडी की नजर है। राबड़ी देवी के आवास से लेकर मीसा भारती के दिल्ली आवास तक छापेमारी हुई थी। लालू प्रसाद के नजदीकी पूर्व विधायक भोला यादव की तो ईडी ने गिरफ्तारी ही कर ली और उनके कई ठिकानों पर छापेमारी भी की।

लालू परिवार के अन्य करीबी पर भी ईडी की नजर टेढ़ी हो सकती है। राज्य सरकार बदले में किस तरह की कार्रवाई करती है यह दिख सकता है। पश्चिम बंगाल जैसी स्थिति तो नहीं हो जाएगी !

RJD के साथ सरकार चलाना नीतीश के लिए भी आसान नहीं

1. राजद नेता अनंत सिंह के सीट पर उपचुनाव होना है। अनंत सिंह और जदयू राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के बीच हमेशा तकरार रहा है। लोकसभा चुनाव में देखा गया। ऐसे में महागठबंधन की पहली परीक्षा मोकामा उपचुनाव में होगी।

2. क्राइम पर जीरो टॉलरेंस की बात, मगर राजद में कई विधायक बाहुबली। रीतलाल, राजवल्लभ, रमा सिंह जैसे नेता प्रभावी। ऐसे में साथ लेकर चलना आसान नहीं।

3. लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारा। जदयू के पास अभी 16 सांसद। काराकाट, मधुबनी, जहानाबाद, अररिया जैसे कई सीट, जहां राजद और जदयू दोनों का प्रभाव। बेगूसराय, समस्तीपुर, जैसे सीटों पर कांग्रेस का भी दावा।

सत्ता परिवर्तन में RJD की बल्ले-बल्ले:सबसे ज्यादा नुकसान BJP को, कांग्रेस ने महाराष्ट्र का हिसाब किया बराबर

जिसके जितने MLA, उसे सरकार में उतना हिस्सा:21 विभाग RJD, 12 JDU, 5 कांग्रेस को मिल सकते हैं, तेजस्वी को पथ निर्माण-नगर विकास

नीतीश- मोदी के रिश्ते को समझिए:सत्ता में साथ रहे, लेकिन नीतियों से बनाते रहे दूरी, अग्निपथ से जातीय जनगणना तक नहीं मिले मन

फिटनेस-फिटनेस खेलते-खेलते तेजस्वी ने तोड़ डाला:PM के कहने पर क्रिकेट, टेबल टेनिस तो कभी जीप खींचते रहे; असल में थी सियासी कसरत

खबरें और भी हैं...