• Hindi News
  • Local
  • Bihar
  • Woman Achiever From Bihar, Engineer Bhawna From Vaishali Left Qatar Job To Produce Mushroom In Corona Lockdown After Father's Job Loss

पिता की नौकरी गई, कतर से लौट किसान बनीं इंजीनियर:हर तरफ इस जुनून की खबर, इलेक्ट्रिकल इंजीनियर भावना अब 'मशरूम गर्ल'

पटना9 महीने पहलेलेखक: शालिनी सिंह
  • एक झोपड़ी से शुरुआत के बाद बनाया मुकाम, अब बड़े बिजनेस के लिए सरकार से लेंगी मदद

कोरोना के लॉकडाउन में पिता की नौकरी छूटी और इसी बीच इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बेटी भावना भी कतर की नौकरी छोड़ आई। परेशानी थी। भारी तनाव भी। हिम्मत बनती, टूटती थी। लेकिन, फिर भावना ने मन पक्का किया और मां-बहन के साथ मिलकर खेती शुरू की। वह भी घर से। बिना किसी को बताए। क्योंकि, खेती को लोग घाटे का सौदा कहते हैं। मशरूम की खेती घर से शुरू करने वाली भावना अब लगातार अपना काम बढ़ाने के बाद व्यापक स्तर पर शुरुआत के लिए निकल पड़ी हैं। भास्कर रिपोर्टर की सचिवालय में इसी सिलसिले में पहुंची वैशाली की भावना से मुलाकात हुई तो यह प्रेरक कहानी निकली। भावना वैशाली में लालगंज के गांव जारंग रामपुर बखरा की रहने वाली हैं। कोरोना ने नई नौकरी तलाशने की सारी संभावनाएं भी खत्म कर दी थीं और यह उन्हें पता था। इसलिए उस लंबे-कष्टप्रद दौर से निकलने के लिए इंजीनियर लड़की ने खुद को किसान बना लिया। आज इस किसान की इलाके में बड़ी पहचान है।

पैसों की कमी ने रोशन किया रास्ता

भावना के पिता विपिन कुमार लुंबिनि बेवरेज प्राइवेट लिमिटेड में काम करते थे। हाजीपुर औद्योगिक परिसर में कोल्ड ड्रिंक बनाने वाली मल्टीनेशनल कंपनी पेप्सी की फ्रेंचाइजी यूनिट के रूप में काम कर रही लुंबिनी बेवरेज प्राइवेट लिमिटेड के प्लांट पर 2019 में ताला लग गया। घर का पूरा खर्च उठाने का जिम्मा भावना पर था, लेकिन परेशानियों के कारण वह भी नौकरी छोड़ आ गईं कतर से वापस बिहार। आने के बाद की स्थिति भावना बताती हैं, लेकिन उससे ज्यादा लड़ने का जज्बा सुनाती हैं। कहती हैं “इंटरनेट से जानकारी जुटाकर घर के कैंपस में मशरूम के 50 बैग लगाए। घर के बाहर किसी को यह बात नहीं बताई। कुछ लोगों से बात हुई तो कहने लगे बेकार है, कोई फायदा नहीं।” ऐसी तमाम प्रतिक्रियाओं के बावजूद चुपचाप खेती शुरू की। फिर धीरे-धीरे दिलचस्पी बढ़ने लगी और काम भी। भावना ने 50 बैग से 100 मशरूम बैग लगाए और आज उनके पास 1000 बैग का स्पेस है।मशरूम ही नहीं, अब तो 5 कट्‌ठे में मछलीपालन भी कर रही हैं। 35/15 फीट की झोपड़ी लगा मशरूम उगा रही हैं, लेकिन अब इसे बहुत बड़े स्तर पर करने के लिए पटना सचिवालय तक पहुंची हैं।

खेती से लेकर मार्केटिंग तक का खुद करती हैं काम

भावना अपनी बहन निधि और मां संगीता के साथ काम कर रही हैं। निधि भोपाल से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही हैं। अभी घर पर थीं तो दीदी का साथ दे रही थीं। भावना बताती हैं कि “20 हजार की लागत से साल में तीन फसल उपजाकर आप 1 लाख 80 हजार की कमाई कर सकते हैं। सरकार की तरफ से मशरूम की खेती के लिए लागत पर 50 फीसदी सब्सिडी दी जाती है, हालांकि मैंने अबतक इसका लाभ नहीं लिया। अब इसे और बड़े पैमाने पर करने का मन बना रही हूं और तब सरकार की योजना का लाभ लूंगी।” मार्केटिंग के मामले में भावना के लिए वोकल फोर लोकल का स्लोगन काम आ रहा है। रोजाना करीब 10 किलो मशरूम का उत्पादन कर रहीं भावना की मानें तो अभी उनका पूरा उत्पाद लोकल लेवल पर ही बिक जाता है। यही वजह रही कि जब पूरे देश में लॉकडाउन रहा और हर कोई अपने उत्पाद की ब्रिकी के लिए परेशान रहा, भावना इन सबसे बेअसर रहीं। कुछ महंगी वेरायटी जैसे ओएस्टर मशरूम की ब्रिकी सुखाकर करती हैं। ओएस्टर मशरूम का इस्तेमाल प्रोटीन पाउडर बनाने में होता है। यह बाजार में करीब 1000 रुपए किलो बिकता है।

मशरूम से जुड़े उत्पाद भी बना रहीं भावना

भावना और उनका परिवार सिर्फ मशरूम के उत्पादन पर भी काम नहीं कर रहा, बल्कि उससे नए उत्पाद भी वह बना रही हैं। भावना की मां ने मशरूम से अबतक 5 तरह के प्रोडक्ट बनाए हैं। मां संगीता ने मशरूम की टॉफी, बिस्किट, भुजिया, बुंदिया और अचार बनाया है। एक कुशल गृहिणी की शिक्षित बेटियों ने अनुभव और नई सोच के साथ बिहार के जारंग रामपुर बखरा गांव में सफलता की नई कहानी लिख दी है।

बिहार से विमेंस डे स्पेशल में और पढ़ें

शिवांगी स्वरूप ने प्लेन उड़ाने का सपना पूरा किया, इतिहास बना देंगी यह पता नहीं था

लॉकडाउन में बीमार पिता को लेकर 1200 की साइकिल से 1200 KM चली ज्योति

लॉकडाउन में पति का रोजगार छिना तो घर के 'सुख-चैन' के लिए नाई बन गई वो

बिहार की पहली महिला DG हैं 'हंटर वाली' शोभा अहोटकर, 22 की उम्र में बनीं IPS

खबरें और भी हैं...