मुजफ्फरपुर के युवक ने लापता पिता को बेटे से मिलवाया:पुलिस के भरोसे नहीं छोड़ा, खुद उठाई जिम्मेवारी, हर तरफ मिल रहा सम्मान, युवाओं के लिए पेश की मिसाल, टाउन DSP ने किया सम्मानित

मुजफ्फरपुरएक वर्ष पहले
टाउन डीएसपी रामनरेश पासवान ने विशाल को किया सम्मानित।

मुजफ्फरपुर शहर के जुरन छपरा के युवक विशाल कुमार ने ऐसा कारनामा किया है कि आज के युवाओं के लिए मिसाल बन गया। विशाल ने दूसरों के लिए मर रही संवेदना को एक बार से जीवित कर दिया है। उन्होंने ऐसा उदाहरण पेश किया कि हर कोई उनका सम्मान और तारीफ कर रहा है। सोशल मीडिया पर धूम मची हुई है। हर कोई विशाल के जज्बे की तारीफ कर रहा है। मामला है एक बुजर्ग का, जो पिछले पांच दिनों से अपने घर से लापता हो गए थे।

सकरा थाना क्षेत्र के मझौलिया के रहने वाले रामेश्वर सिंह (62) उत्तर प्रदेश लव गोरखपुर स्थित अपनी बेटी के घर गए थे। वहां से बिना किसी को बताए निकल गए। ट्रेन पकड़कर मुज़फ़्फ़रपुर पहुंचे। फिर यहां से कहां जाना है। उन्हें कुछ नहीं समझ आया। इधर-उधर भटकने लगे। फिर अचेतावस्था में सड़क पर गिर पड़े।

बच्चों के साथ बुजुर्ग।
बच्चों के साथ बुजुर्ग।

रैन बसेरा में खुद पहुंचाया
विशाल की नज़र बुजुर्ग पर पड़ी। उन्होंने आसपास पूछताछ की। लेकिन, कोई जानकारी नहीं दे सका। विशाल कहते हैं लोग उधर से आ जा रहे थे। लेकिन, कोई उस बुजुर्ग की सुध लेने वाला नहीं था। उन्हें होश में लाने के बाद उन्होंने ब्रह्मपुरा थान को सूचना दी। पुलिस का आने का इंतज़ार नहीं करते हुए खुद बुजुर्ग को जिला परिषद मार्केट स्थित रैन बसेरा में पहुंचा दिया।

मुखिया को संपर्क कर दी जानकारी
सिर्फ वहां तक पहुंचकर विशाल ने अपनी जिम्मेवारी से मुंह नहीं मोड़ा।उन्हें खाना खिलवाया। बुजुर्ग के पास से आधार कार्ड मिला। उससे गांव का पता कर वहां के मुखिया से सम्पर्क किया और पूरी बात बताई। मुखिया ने बुजुर्ग के पुत्र से सम्पर्क कर पिता के बारे में बताया। वे लोग रैन बसेरा पहुंचे और बुजुर्ग को साथ ले गए।

छलक आए आंखों में आंसू
विशाल कहते हैं बुजुर्ग के पुत्र सब्जी विक्रेता गौतम जब अपने पिता से मिले और जिस तरह गले लगाया। उनकी खुद की आंखों से यह मार्मिक दृश्य देखकर आंसू आ गए। कहते हैं बिछड़े हुए पिता और पुत्र को मिलते देखना एक सुखद अनुभूति रही।

तहे दिल से दिया धन्यवाद
गौतम ने बताया कि पांच दिन से वे लोग परेशान थे। हर जगह खोजबीन कर ली थी। कहीं से जानकारी नहीं मिली कि पिता कहाँ है। इसी दौरान विशाल फरिस्ता बनकर उनलोगों की ज़िंदगी मे आएं। विशाल का तहेदिल से उनलोगों ने धन्यवाद किया और पिता को लेकर चले गए। इधर, टाउन DSP रामनरेश पासवान को विशाल की दरियादिली का पता लगा। उन्होंने अपने कार्यालय में बुलाया और 700 रुपये देकर उन्हें सम्मानित किया। कहा कि विशाल के एक कारनामे से आज के युवाओं को सिख मिलेगी और उनकी भी संवेदना बुजुर्गों-महिलाओं के प्रति जागेगी।

खबरें और भी हैं...