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पहले स्पीकर और अब नेता प्रतिपक्ष बने सिन्हा:जातीय समीकरण के साथ नीतीश को जवाब देने में फिट, सम्राट से कुशवाहा में बनाएंगे पैठ

पटना3 महीने पहलेलेखक: शंभू नाथ

BJP ने विधानमंडल में विपक्ष के नेताओं की घोषणा कर दी है। विधानसभा में विजय सिन्हा को और विधान परिषद में सम्राट चौधरी को मुख्य विपक्षी नेता बनाया गया। इनके माध्यम से पार्टी ने न केवल जातीय समीकरण को साधा, बल्कि सत्ता पक्ष को भी स्पष्ट संदेश दिया कि वे सड़क से सदन तक सरकार को घेरेंगे।

विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी दोनों की छवि तेज-तर्रार नेता और प्रखर वक्ता की है। विधानसभा अध्यक्ष के रूप में विजय सिन्हा की छवि तर्कपूर्ण बयानों के साथ विरोधियों को घेरने वाले नेता के रूप में उभरी है। विधानसभा में नीतीश कुमार और विजय सिन्हा के बीच हुए विवादों में भी ये स्पष्ट तौर पर दिखा था।

बिहार की सियासत को करीब से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार पांडेय कहते हैं कि 74 विधायकों वाली BJP को एक ऐसा नेता चाहिए था जो सामने से अटैक करें। इस स्थिति में BJP के पास फिलहाल जो लॉट है, उसमें विजय कुमार सिन्हा सबसे फिट बैठ रहे थे। पार्टी की तरफ से दो डिप्टी CM बनाए गए थे, लेकिन दोनों के पास फिलहाल इस स्तर की क्षमता नहीं थी कि वे CM नीतीश कुमार की आंख में आंख डालकर बात कर सकें।

एंटी लालू वोट के लिए दोनों BJP के लिए परफेक्ट

अरुण कुमार ने कहा कि सुशील मोदी के काल से लगातार भूमिहार नेताओं को BJP में साइडलाइन किया जा रहा था। बड़े-बड़े फेस जो उभर रहे थे वे सुशील मोदी काल में दब गए। बोचहां उपचुनाव में बीजेपी RJD से मात खाई है। ऐसे में सवर्णों में एंटी बीजेपी के लहर को रोकने में ये निर्णय अहम साबित होगा। एंटी लालू वोट को हासिल करने में भी ये दोनों परफेक्ट फिट बैठते हैं। बीजेपी में पहले से ही कुशवाहा लीडर की कमी थी। नीतीश के लव-कुश समीकरण को तोड़ने में सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाना अहम साबित होगा। यही कारण है कि पहले इन्हें विधान परिषद में भेजा गया। इसके बाद इन्हें मंत्री बनाया गया। अब ये अहम पद दिया गया है।

अरुण कुमार ने कहा कि सुशील मोदी के काल से लगातार भूमिहार नेता BJP में साइडलाइन किए जा रहे थे।
अरुण कुमार ने कहा कि सुशील मोदी के काल से लगातार भूमिहार नेता BJP में साइडलाइन किए जा रहे थे।

विजय सिन्हा के बहाने नाराज भूमिहारों को संदेश

विजय कुमार सिन्हा लखीसराय से 3 बार के विधायक हैं। बिहार विधानसभा अध्यक्ष से पहले राज्य सरकार में श्रम संसाधन मंत्री रह चुके हैं। 54 वर्षीय विजय कुमार सिन्हा सिन्हा भूमिहार समाज से आते हैं। इनकी छवि सदन में अपनी बातों को बेबाक तरीके से रखने की है। 15 साल की उम्र में ही ये राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए थे। कॉलेज के दिनों में ये छात्रसंघ के विभिन्न पदों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

CM को सिन्हा से चिढ़, अब वही सदन में सरकार को घेरेंगे

विधनासभा में बहस के बाद नीतीश कुमार को विजय सिन्हा से चिढ़ हो गई थी। उन्हें ये पूरा प्रकरण रास नहीं आया था। तब उन्होंने BJP के केंद्रीय नेतृत्व से भी इसकी शिकायत की थी। लेकिन अब नीतीश कुमार को जिस नेता से चिढ़ है, BJP ने उन्हीं को सदन में उनके सामने खड़ा कर दिया है। जाहिर सी बात है कि सिन्हा अब और ताकत से सत्ता पक्ष को सदन में घेरेंगे।

विधनासभा में बहस के बाद नीतीश कुमार को विजय सिन्हा से चिढ़ हो गई थी।
विधनासभा में बहस के बाद नीतीश कुमार को विजय सिन्हा से चिढ़ हो गई थी।

सम्राट के बहाने कुर्मी की जगह कुशवाहा में पैठ बनाने की कोशिश

वहीं सम्राट चौधरी पिछड़ा वर्ग के कुशवाहा जाति से आते हैं। बिहार में OBC समुदाय की एक बड़ी आबादी है। इसमें यादवों और कुर्मी के बाद कुशवाहा(कोइरी) समाज की सबसे ज्यादा भागीदारी है। नीतीश कुमार को जहां कुर्मी का नेता माना जाता है, तो तेजस्वी की पैठ RJD में है। सम्राट चौधरी के बहाने BJP OBC में सेंधमारी करने की कोशिश की है। बिहार में कुशवाहा की कुल आबादी लगभग 7% है।

तीन बार मंत्री के साथ मुख्य सचेतक रह चुके हैं सम्राट चौधरी

पूर्व मंत्री स्रमाट चौधरी तीन बार मंत्री रहने के साथ, विधानसभा में विपक्ष के मुख्य सचेतक रह चुके हैं। सम्राट चौधरी बिहार भाजपा के उपाध्‍यक्ष भी रह चुके हैं। वह 1999 में कृषि मंत्री और 2014 में शहरी विकास और आवास विभाग के मंत्री के साथ मौजूदा एनडीए सरकार में पंचायती राज मंत्री थे। सम्राट को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता शकुनी चौधरी सात बार विधायक और सांसद रह चुके हैं। माता पार्वती देवी तारापुर से विधायक रह चुकी हैं।

पूर्व मंत्री स्रमाट चौधरी तीन बार मंत्री रहने के साथ, विधानसभा में विपक्ष के मुख्य सचेतक रह चुके हैं।
पूर्व मंत्री स्रमाट चौधरी तीन बार मंत्री रहने के साथ, विधानसभा में विपक्ष के मुख्य सचेतक रह चुके हैं।