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  • For the first time in the history of 300 years in the Mahavir temple in Patna, the Kalash was not installed in navaratri.

भक्त और भगवान के बीच कोरोना / पटना के महावीर मंदिर में 300 साल के इतिहास में पहली बार नहीं हुई कलश स्थापना, नवरात्र के पहले दिन परिसर में रहा सन्नाटा

फाइल फोटो। फाइल फोटो।
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फाइल फोटो।फाइल फोटो।

  • महावीर मंदिर के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि इस बार की पूजा में वे सम्मिलित नहीं होंगे
  • इस बार कलश स्थापन नहीं हुआ है, रामनवमी के दिन भी सीमित तरीके से पुजारी पूजा कर ध्वज बदलेंगे

दैनिक भास्कर

Mar 26, 2020, 01:23 AM IST

पटना.  लॉकडाउन के बीच बुधवार से चैती नवरात्र शुरू हो गया। रामनवमी तक हर समय भक्तों से गुलजार रहने वाले महावीर मंदिर में नवरात्र के पहले दिन सन्नाटा रहा। इस बार कलश स्थापन नहीं हुआ है। रामनवमी के दिन भी सीमित तरीके से पुजारी पूजा कर ध्वज बदलेंगे। महावीर मंदिर के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि इस बार की पूजा में वे सम्मिलित नहीं होंगे। करीब 300 साल प्राचीन मंदिर के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब माता का कलश स्थापित नहीं हुआ।

राजवंशी नगर स्थित पंचरूपी हनुमान मंदिर में कलश स्थापना नहीं हुआ है। गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी में श्री रामचरित मानस का सम्पुट पाठ चल रहा था। ठाकुरबाड़ी के उपाध्यक्ष व एमएलसी प्रो. रणवीर नंदन ने बताया कि दो पुजारी अशोक मिश्र व पंडित सत्यप्रकाश पाण्डेय क्रमश: दुर्गासप्तशती और श्री रामचरित मानस का नवाह् सम्पुट पाठ कर रहे हैं। रामनगरी मोड़ स्थित शिव मंदिर, बोरिंग रोड चौराहा शिव मंदिर, श्री सिद्धेश्वरी काली मंदिर बांसघाट, श्री शिर्डी साईं मंदिर कच्ची तालाब गर्दनीबाग, श्रीअखंड वासनी मंदिर, गोलघर आदि मंदिरों में कलश स्थापित किया गया है। श्री शिर्डी साईं मंदिर के पुजारी ऋषिकेश रंजन झा ने कहा कि भगवान की पूजा बंद नहीं हो सकती है, इसलिए कलश स्थापित किया गया है।

वासंतिक नवरात्र बुधवार से श्रद्धा एवं भक्तिमय माहौल में आरंभ हुआ। हालांकि श्रद्धालु देवी मंदिरों में दर्शन नहीं कर सके। क्योंकि कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे काे लेकर मंदिरों के मुख्य द्वार बंद हैं। शक्तिपीठ बड़ी पटनदेवी के महंत विजय शंकर गिरि ने बताया कि कलश स्थापना के साथ देवी भगवती की आराधना आरंभ हुई। छोटी पटनदेवी के पुजारी आचार्य अनंत अभिषेक द्विवेदी व विवेक द्विवेदी ने बताया कि ब्रह्म मुहूर्त में कलश स्थापना कर अनुष्ठान आरंभ हुआ। इसी तरह अगमकुआं मंदिर, पीतांबरा मंदिर सहित अन्य मंदिरों के अलावा भक्तों ने घरों में भी कलश स्थापना कर पूजा-अर्चना आरंभ की है। माता शैलपुत्री की आराधना के साथ बुधवार को चैत्र नवरात्र शुरू हो गया। इसके साथ ही घरों से वैदिक मंत्रों की आवाज भी गूंजने लगी। पूजन के दौरान भक्तों ने माता शैलपुत्री को लाल रंग की चुनरी, नारियल और मीठा पान चढ़ाकर अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए उनसे प्रार्थना की।  माता शैलपुत्री के पूजन से श्रद्धालु को संतान वृद्धि, धन-संपदा एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है । आचार्य राकेश झा ने बताया कि गुरुवार को माता ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी।

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