पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Bihar
  • JDU MLC Neeraj Kumar Questions From RJD; Bihar Condition In LaluRabri Tenure; Bihar Latest Political News

RJD के 25 साल, JDU MLC के तीखे सवाल:लालू राज में पशुपालकों की हालत कांग्रेस राज से भी बदतर क्यों हुई थी, दुग्ध उत्पादन की भी स्थिति दयनीय थी

पटना3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और विधान पार्षद नीरज कुमार ने सोमवार को ऐलान किया था कि 25 दिनों तक लगातार लालूवाद से जुड़े सवाल पूछेंगे। नीरज कुमार ने मंगलवार को पहला सवाल पशु और पशुपालकों के संबंध में पूछा है।

नीरज ने सवाल किया है कि लालूवाद अगर विचारधारा है तो सामाजिक न्याय से फर्जीवाड़ा क्यों? पशु चारा से पेट नहीं भरा जो पशुपालकों के साथ भी न्याय नहीं किया। लालूवादी विचारधारा वाले राज में पशुपालकों की हालत कांग्रेस राज से बदतर हो गई थी।

नीरज कुमार ने आगे पूछा कि RJD बताए लालू-राबड़ी के कार्यकाल के दौरान दुधारू पशुओं की संख्या और दुग्ध उत्पादन में कितनी बढ़ोतरी हुई? लालू-राबड़ी राज में कितने पशु चिकित्सा केंद्रों की स्थापना की गई? कितने पशु चिकित्सकों की भर्ती की गई? कौन-से पशु शोध व शिक्षण संस्थान की स्थापना की गई? क्या ऐसा करके लालूवाद ने पशुपालकों के साथ धोखा नहीं किया?

लालूवाद ने बिहार को कांग्रेस राज से भी पीछे धकेला

नीरज कुमार ने आंकड़ों के जरिए बताया कि लालू-राबड़ी ने पिछड़ी जातियों के उत्थान के नाम पर 15 वर्षों तक राज किया। दुग्ध उत्पादन-व्यापार जाति विशेष (पशुपालकों) का मुख्य व्यवसाय माना जाता था, लेकिन तथाकथित लालूवाद की सरकार ने अपने समाज के लोगों का भी उत्थान नहीं किया। लालू-राबड़ी के कार्यकाल के दौरान बिहार में पशु चिकित्सा केंद्रों और पशु चिकित्सकों पर पशुओं के इलाज का भार बढ़ गया।

1980-81 में बिहार में एक पशु चिकित्सक पर 28.95 हज़ार जानवरों के इलाज की जिम्मेदारी थी। 1990-91 में यह 18.37 हज़ार पर पहुंच गई। लालूवाद के दौरान वर्ष 2003-04 पहुंचते-पहुंचते 29.61 हज़ार पर पहुंच गई। मतलब.... बिहार ने इस इस क्षेत्र में जितना विकास 1980-81 से 1990-91 के दौरान किया, लालूवाद की सरकार ने अगले 12 वर्षों में बिहार को 1980-81 से भी पीछे धकेल दिया।

अब पशुपालकों के लिए नए-नए शिक्षण व शोध संस्थान खुल रहे

JDU नेता ने कहा CM नीतीश कुमार के सेवा काल में लगातार पशु चिकित्सकों-चिकित्सालयों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ पशुपालन के लिए नए नए शिक्षण और शोध संस्थान बनाए गए। लालूवादी कार्यकाल में पशु शोध या शिक्षण संस्थान की स्थापना तो नहीं ही की गई। वहीं, दूसरी तरफ नीतीश सरकार के कार्यकाल के दौरान लगातार पशु अस्पताल, पशु चिकित्सकों के साथ-साथ पशु शोध व शिक्षण संस्थान की संख्या में वृद्धि हुई है। 2022-23 तक बिहार में 8 पशु चिकित्सा शिक्षण/प्रशिक्षण केंद्र बन जाएंगे ।

दूध उत्पादन में भी बिहार ने बनाया रिकार्ड

वर्ष 1991 में बिहार में कुल 28.2 लाख टन दूध का उत्पादन होता था। 2003 में मामूली वृद्धि के साथ मात्र 28.7 लाख टन तक सीमित रहा, लेकिन 2018-19 आते-आते बिहार में दूध का उत्पादन 100 लाख टन पार कर गया। नीतीश कुमार के काल में दूध उत्पादन वृद्धि दर के मामले में बिहार पूरे देश में अव्वल रहा। 2003 और 2019 के दौरान बिहार में 100 लाख नए दुधारू पशुओं की संख्या बढ़ी जो पूरे हिंदुस्तान में दुधारू पशुओं की संख्या में हुई वृद्धि का 35% हिस्सा था।

खबरें और भी हैं...