कांग्रेस को बिहार में कन्हैया ही क्यों भाए?:पार्टी को ऐसा युवा नेता चाहिए, जो केंद्र और बिहार दोनों जगह एक्टिव रहे, कन्हैया इसमें फिट बैठते हैं, PM मोदी के भी कट्टर विरोधी

पटना8 महीने पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद
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कन्हैया को कांग्रेस में शामिल करा कर कहीं से राज्य सभा भेज दिया जाएगा तो कन्हैया की एक्टिविटी बढ़ सकती है। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
कन्हैया को कांग्रेस में शामिल करा कर कहीं से राज्य सभा भेज दिया जाएगा तो कन्हैया की एक्टिविटी बढ़ सकती है। (फाइल फोटो)

कन्हैया कुमार बिहार के रहने वाले हैं। वह राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एंट्री कांग्रेस में करा रहे हैं। उनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर की रही भी है। वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तीखी आलोचना करने वाले लेफ्ट नेताओं में सबसे आगे हैं। क्या बिहार कांग्रेस का चेहरा वह हो सकते हैं? इसकी चर्चा सबसे ज्यादा है। जगन्नाथ मिश्र के हाथ से सत्ता जाने के बाद उस कद का कोई नेता कांग्रेस में नहीं दिखा।

लालू प्रसाद ने जितनी सीटें चाहीं कांग्रेस के गठबंधन में उतनी सीटें चुनाव में मिलती थी। तारिक अनवर, शकील अहमद, रामजतन सिन्हा, अनिल शर्मा जैसे नेता रहे पर कांग्रेस की स्थिति बिहार में बदतर होती गई। अब बिहार कांग्रेस को तेज-तर्रार युवा नेता की तलाश है। कांग्रेस देश और बिहार दोनों स्तर पर कन्हैया कुमार में तेज देख रही है। कन्हैया को कांग्रेस में शामिल करा कर कहीं से राज्य सभा भेज दिया जाएगा तो कन्हैया की एक्टिविटी बढ़ सकती है।

कन्हैया कुमार और उनका जाति से जुड़ा सवाल
बिहार विधान सभा में भाजपा की सीटें बढ़ती जा रही हैं और अब वह 74 पर पहुंच गई है जबकि कांग्रेस की सीटें घटती जा रही हैं। कांग्रेस 19 पर पहुंच गई है, इसलिए बिहार कांग्रेस को संभालने के लिए तेज-तर्रार नेता की जरूरत है। कन्हैया जाति से भूमिहार हैं और पिछड़ी जाति का वोट बैंक बिहार में बड़ा है। इस लिहाज से वह कितना वोट दिला पाएंगे समय बताएगा?

कांग्रेस सहित अन्य पार्टियों पर गौर करें तो बिहार कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ब्राह्मण हैं, विधायक दल के नेता अजीत शर्मा भूमिहार हैं। चुनाव कैंपेनिंग कमेटी के चेयरमैन अखिलेश सिंह भी भूमिहार हैं। जेडीयू को देखें तो वहां राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह, भूमिहार हैं। राजद को देखें तो प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह राजपूत हैं, लेकिन राजद में लोग लालू प्रसाद- तेजस्वी यादव को देखते हैं और जेडीयू में लोग नीतीश कुमार को।

कहीं खुशी, कहीं गम
बिहार कांग्रेस का कोई नेता कन्हैया के विरोध में नहीं बोल रहा। कांग्रेस में आलाकमान के फैसले को चुनौती देने का कोई मतलब नहीं। लेकिन पार्टी में कहीं खुशी, कहीं गम वाली हालत है। खुशी इसलिए कf कन्हैया का प्रभाव बढ़ेगा तो बाकी लोगों का घटेगा। गम उनमें है जो अभी पार्टी की व्यवस्था को यथावत रखना चाहते हैं।

कांग्रेस में भक्त चरण दास को जब से प्रदेश प्रभारी बनाया गया है तब से एक्टिविटी बढ़ी है, लेकिन वे लगातार बिहार में नहीं रहते इसलिए पदयात्रा के समय तो पार्टी थोड़ी एक्टिव रहती है फिर उसके बाद सुस्ती दिखने लगती है। राजद में तेजस्वी यादव जिस तरह से इन दिनों बिहार से लेकर झारखंड तक एक्टिव हैं, वैसी तेजी कांग्रेस में नहीं दिख रही। विधायक दल के नेता अजीत शर्मा पत्र लिख-लिख कर एक्टिव रहते हैं लेकिन वह नाकाफी है।

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