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नव संवत्सर 2078 में आकाशीय मंत्रिमंडल भी बदला:सत्ता पाकर बिहार में भी प्रभाव दिखाएगा मंगल, संक्रमण के साथ राजनीतिक उथल-पुथल के संकेत

पटना9 महीने पहलेलेखक: मनीष मिश्रा
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मंगलवार से मंगल का प्रभाव बढ़ जाएगा। आकाशीय मंत्रिमंडल में मंगल राज और मंत्री के प्रभार के साथ आधा दर्जन से अधिक विभागों के मालिक होंगे। बुध के हाथ से मंगलवार को सत्ता प्रभार छिन जाएगा। अब बुध अब चंद्रमा के साथ खान-पान का जिम्मा संभालेंगे। देव गुरु वृहस्पति वनस्पति और कृषि का विभाग है। मंगलवार 13 अप्रैल से चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को नया मंत्रिमंडल विस्तार हो जाएगा और मंगल का प्रभाव इसी दिन से दिखने लगेगा। बिहार की कुंडली में मंगल और राहु केंद्र में विराजमान हैं जो खरमंडल योग बना रहे हैं। इससे राजनीतिक उथल पुथल के साथ संक्रमण का खतरा भी बढ़ने का संकेत है।

विधानसभा और लोकसभा की तरह गठन बस कार्यकाल कम

जिस प्रकार विधानसभा और लोकसभा का गठन होता है। विभागों का प्रभार देकर मंत्री बनाए जाते हैं ठीक इसी तरह ही ग्रहों के मंत्रिमंडल का भी विस्तार और गठन होता है। बस अंतर इतना होता है कि ग्रहाें के मंत्रिमंडल का कार्यकाल एक वर्ष का होता है। हिंदू नव वर्ष से प्रारंभ होकर पूरे संवत्सर ग्रहों का उनके प्रभार के हिसाब से प्रभाव आम जन पर पड़ता है। एक वर्ष तक ग्रह अपना पूरा प्रभाव पूरे विश्व पर डालते हैं। आकाशीय मंत्रिमंडल का प्रतिनिधित्व करने वाले ग्रह पर पूरे विश्व का फल निर्भर करता है। प्रतिनिधित्व करने वाला ग्रह अगर क्रूर और पापक है, तो फल उसी तरह का मिलता है, लेकिन यदि शुभ है तो वह वर्ष भर शुभ फल देने वाला होता है। अब तक संवत 2077 में सत्ता का प्रभार बुध ग्रह के हाथ में थी और मंत्री चंद्रमा थे। इसके प्रभाव विभाग के बंटवारे में अधिकतर विभाग पापक ग्रहों के हाथ में था इस कारण से स्थिति विपरीत चलती रही हैं।

मंत्रिमंडल में प्रभावी ग्रह मंगल के साथ अन्य ग्रह

ज्योतिष विद्वान आचार्य योगेश पांडेय के मुताबिक आनंद नाम का नया संवत्सर संवत 2078, 13 अप्रैल चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होगा। संवत 2078 में राजा और मंत्री का पद मंगल के पास है। उत्पाद और वाणिज्य विभाग दैत्य गुरु शुक्र के पास है। कोष के मालिक शुक्र हैं। इसके साथ ही तीन अन्य प्रमुख विभागों का प्रभार भी शुक्र के पास है। प्राकृतिक और मौसम विभाग सूर्य के पास है। देव गुरु बृहस्पति के पास वनस्पति और कृषि विभाग है। चंद्रमा के पास खाद्य और फल फूल विभाग है। इस विभाग में चंद्रमा के साथ बुध भी सहयोग के लिए लगे रहेंगे जिसका लोगों को सुखद फल मिलेगा। शेष अन्य सभी प्रमुख विभागों का प्रभार स्वयं मंगल के पास होगा। इसमें सेहत सुरक्षा और रक्षा के साथ अन्य कई अहम विभाग शामिल हैं। शनि के पास कर एवं शासक प्रशासक का प्रभार है जिससे इन क्षेत्रों में न्याय होगा।

मंगल का ऐसा पड़ेगा प्रभाव

संवत 2078 का आकाशीय मंत्रिमंडल मंगल से पूरी तरह प्रभावित रहेगा। मंगल का प्रभाव अच्छा नहीं माना जाता है क्योंकि यह पापक ग्रहों की श्रेणी में है। इसका प्रभावी होकर राजा बनना शुभ संकेत नहीं है। आचार्य योगेश बताते हैं कि सत्ता मंगल के पास है, मंगल के राज में मंगल कम ही होता है। इसके पीछे कारण है कि मंगल क्रूर पापक ग्रह है। मंगल के पास आधा दर्जन से अधिक विभाग हैं। रक्त वर्ण का यह ग्रह काफी जिद्दी और अग्नि तत्व से भरा हुआ है। यह सर्वदा दुख देने वाला है और आकाशीय मंत्रिमंडल का प्रतिनिधित्व कर रहा है। हालांकि कुछ मामलों में यह काफी मददगार भी होता है।

आपदा के साथ बीमारियों का खतरा

ज्योतिष विद्वानाें के मुताबिक मंगल वर्ष भर पूरे विश्व में रक्त रंजित योग पैदा करेगा। बीमारियों से जनता को परेशानी होगी। मंगल देश और विदेश में दैवीय आपदाओं की बाढ़ लाएगा। अग्निकांडों की संख्या में वृद्धि होगी। आग का तांडव पूरे विश्व में होगा। हालांकि सैन्य शक्तियों में विकास होगा और यह काफी ताकतवर होगी, लेकिन जब क्रूरता दिखाएगा तो सेना को भी समस्या और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। किसानों की फसलों को आग से क्षति होगी। मंगल देश और विश्व की महान हस्तियों पर अपना दुष्प्रभाव छोड़ेगा। आपसी तालमेल नहीं होने के कारण देश के मंत्रियों और अफसरों के बीच कटुता बढ़ेगी। इसके साथ ही देश में आतंकवाद और नक्सलवाद बढ़ेगा।

भूकंप और तूफान का खतरा बढ़ेगा

ज्योतिष विद्वानों का कहना है कि भूकंप और भूस्खलन के साथ भीषण समुद्री तूफान का खतरा मंगल के कारण बढ़ेगा। देश में दुर्घटनाएं घटित होने का भी योग मंगल बनाएगा जिससे जन-धन की व्यापक क्षति होगी।

देश की सैन्य शक्ति का दुनिया मानेगा लोहा

आचार्य योगेश का कहना है कि इस हिंदू नव वर्ष की सबसे बड़ी उपल्बधि भी बड़ी होगी। मंगल के तमाम प्रतिकूल फलो के विपरीत मंगल का राजा मंत्री होना और प्रवेश कुंडली में भी मंगल का लग्नेश होना सेना की शक्ति को बढ़ाएगा। मंगल का राजा मंत्री के साथ कई विभागों का स्वामी होना देश की सैन्य शक्तियों में व्यापक विस्तार कराएगा। यही इस संवंतसर की सबसे बड़ी सफलता और उपलब्धि कही जा सकती है। न्याय प्रिय ग्रह शनि के प्रभाव से इस संवंत में नए मजबूत और कठोर नेतृत्व का विकास होगा, जिससे सरकार को टैक्स में बड़ा फायदा होगा। टैक्सी चोरी करने वालों की कमी आएगी और इस मामले में न्याय होगा।

ग्रहों के चाल से कम नहीं होंगी देश की चुनौतियां

ज्योतिष विद्वानों का कहना है कि आकाशीय मंत्रिमंडल के पदाधिकारियों के अधिकार निर्धारण के अनुसार कठिन चुनौतियों से जूझता भारत एवं विश्व पूरी तरह से उबर नहीं पाएगा। पहले से चल रही समस्याएं बदलती परस्थितयों के अनुसार नए रूप में बढ़ती ही जाएगी। संवत सरीय ग्रह सभासदों के 10 विभाग के 4 विभाग अकेले क्रूर एवं पापक ग्रह मंगल के पास हैं। इससे परिस्थितियां स्वमेव परिणाम की सूचना दे रही हैं। देश एवं जनता को अनेक प्रकार की पाकृतिक विपरीतता का सामना करना पड़ेगा।

मंगल बढ़ाएगा पृथ्वी का ताप

विद्वानों ने ज्योतिष गणना के मुताबिक बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि पृथ्वी का तापमान बढ़कर गंभीर चुनौती पैदा कर देगा। झुलसा देने वाली गर्म हवाओं से आदमी के साथ पशु-पक्षी, फल-फूल, वनस्पतियाें सभी पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। ग्राम नगर एवं महानगर तथा वन उपवन कहीं भी भीषण गर्मी से राहत नहीं मिलेगी। तपते तावे की तरह पृथवी पर को अनेक प्रकार के रोग एवं व्यााधि का सामना करना पड़ेगा। ऐसा लगेगा जैसे भगवान भास्कर अग्नि वर्षा कर रहे हैं। अग्नि कांडों, चोरी-डकैती, लुटेरों का आंतक बढ़ेगा, जनता की गाढ़ी कमाई का हरण होगा, जिससे हाहाकार मचेगा।

बिहार की कुंडली के लग्न में राहु के साथ हैं मंगल

काशी के महाबीर पंचाग और विश्व पंचांग के आधार से ज्योतिषीय गणना द्वारा जो फल प्राप्त हुआ है उसके अनुसार बिहार की कुंडली वृष लग्न की है, जिसमें अति क्रूर पापक ग्रह मंगल के साथ अति-पापक ग्रह राहु लग्न में ही विराजमान हैं। दोनों ग्रह साथ होते हैं तो प्रमंडल योग बनता है। ऐसे योग से राजनीतिक उथल पुथल के साथ आपराधिक घटनाएं घटती है। प्राकृतिक आपदाएं बढ़ेंगी। अफसर और कर्मचारी ही राजकीय कोष पर भारी पड़ सकते हैं। मान सम्मान में कमी दिखाई देगी। संक्रमण काल में भी जन और धन की हानि होगी। दूषित बीमारी से तबाही मच सकती है। मंगल का प्रभाव बीमारियों का प्रभाव बढ़ाएगा। बिहार की कु़ंडली में कुछ ग्रहों का शुभ संकेत होने के कारण सरकार के कोष में बढ़ोत्तरी भी होगी और अनके प्रकार के धन लाभ के लिए सरकारी योजनाओं का निर्माण होगा। देव गुरु बृहस्पति सुख भाव को पूर्ण दृष्टि से दृष्टिगत कर रहे हैं जिससे बिहार में सुख की अनुभूति भी होगी।

नए संवत का राशियों पर प्रभाव

मेष और वृश्चिक : मेष और वृश्चिक के स्वामी मंगल हैंं जो जातक के लिए अत्यंत शुभकारी और लाभकारी होंगे। भौतिक सुख सुविधाओं से लैस होंगे। सफलता के अवसर प्राप्त होंगे।

वृष और तुला : दोनों राशियों के स्वामी ग्रह शुक्र ग्रह हैं। इनके प्रभाव से मान सम्मान में थोड़ी कमी आएगी और खर्च की अधिकता से अर्थ व्यवस्था खड़ी होगी। लेकिन सफलता के भी नए आयाम बन रहे हैं। भाग दौड़ करना सुखद होगा, मान सम्मान में अचानक से वृद्धि होगी।

मिथुन और कन्या : दोनों ग्रहों के स्वामी ग्रह बुध हैं। स्वास्थ्य में सुधार के साथ कार्य क्षमता में वृद्धि होगी। इसके साथ ही किए गए कार्य सिद्ध होंगे। सफलता से नया आयाम तैयार करेंगे।

कर्क : कर्क ग्रह के स्वामी चंद्रमा हैं। इनके प्रभाव से मानसिक उलझनें थोड़ी बढ़ सकती हैं। परिवार में मन मुटाव से बचना होगा। सामंजस्य से सफलता के द्वार खुलेंगे। भौतिक सुख सुविधा के संसाधनों में वृद्धि होगी।

सिंह : स्वामी ग्रह सूर्य हैं। सुखद परिस्थितियों के साथ वर्ष का आरंभ होगा। मांगलिक कार्य के योग और नौकरी में प्रगति के साथ सेहत में सुधार के योग बन रहे हैं। रोग शत्रु पर विजय प्राप्त होगा, मान सम्मान बढ़ेगा।

धनु और मीन : राशि के स्वामी बृहस्पति हैं। देव गुरु के प्रभाव से वहु विधि शुभ कारक है। साहस पराक्रम में वृद्धि होगी। अनेक शुभ अवसर प्राप्त होंगे। नौकरी में तरक्की और प्रमोशन के साथ व्यापार वृद्धि के योग बन रहे हैं।

मकर और कुभ : राशि के स्वामी शनि हैं। यह वर्ष लंबे समय से रुके कार्य पूरा कराने वाला होगा। धन संपति में वृद्धि होगी। मान सम्मान बढ़ेगा तथा घर में मागंलिक कार्य के अवसर बनेंगे।

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