जानिए, ओमिक्रॉन से बचने के लिए क्यों जरूरी बूस्टर डोज?:अब डाउनफाल की तरफ एंटीबॉडी, सेकेंड डोज लेने के 9 माह बाद बूस्टर डोज जरूरी

पटना7 महीने पहले
कोरोना वैक्सीन से एंटीबॉडी पीक पर रहेगी।

दुनियाभर में कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने लोगों की नींद उड़ा दी है। वैक्सीन लेने वाले लोग खुद को पूरी तरह से सुरक्षित मानकर गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ने नए वैरिएंट और वैक्सीनेशन से बचाव को लेकर जब माइक्रो वायरोलॉजी के एक्सपर्ट से बात की तो कई बड़े खुलासे हुए।

पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के माइक्रो वायरोलॉजी विभाग के पूर्व HOD प्रोफेसर डॉ. सत्येंद्र सिंह से जानते हैं क्या है वैक्सीनेशन का बूस्टर डाेज और कब है जरुरी।

जानिए कैसे फॉल की तरफ जा रही एंटीबॉडी
डॉ. सत्येंद्र सिंह ने बताया कि कोई भी फर्स्ट डोज दिया जाता है तो एंटीबॉडी 3 महीने में पीक पर होती है। वैक्सीन लगते ही एंटीबॉडी बनने की प्रक्रिया शुरु हो जाती है लेकिन 14वें दिन से वह ब्लड में आ जाता है। एंटीबॉडी धीर धीरे बढ़ती है और 3 से 4 महीने तक वह अपने पूरे पीक पर होती है।

इसी थ्योरी को डॉक्टरों ने ध्यान में रखकर कोविशील्ड का गैप बढ़ाया था। पहली डोज के बाद जब एंटीबॉडी पीक पर होती है तब दूसरी डोज दी जाती है जो बूस्टर का काम करती है। 16 जनवरी 2021 से वैक्सीनेशन शुरु हुआ है। पहले चरण में जिसको वैक्सीन दी गई है उसको लगभग 10 महीने हो गया है। अब तो उन्हें बूस्टर डोज लगनी चाहिए।

बूस्टर डोज इसलिए है जरूरी
जिन लोगों को सेकेंड डोज लिए 6 से 9 महीने हो गए हैं उन्हें बूस्टर डोज देना चाहिए। क्योंकि 6 से 9 महीने में एंटीबॉडी फॉल पर होती है। यही कारण है कि इन्फ्लुएंजा वैक्सीन जो हम लोग लेते हैं उसका भी एक साल में डोज दिया जाता है।

जानिए सेलुलर इम्युनिटी से बचाव का उपाय
डॉ. सत्येंद्र सिंह का कहना है कि अब एंटीबॉडी फॉलिंग ट्रेंड चल रहा है। थोड़ी बहुत एंटी बॉडी होगी उससे भी बचाव बहुत है। सेलुलर इम्युनिटी महारथी है और एंटीबॉडी को रथी माना जाता है। एंटीबॉडी एक तरह से सिपाही हैं। एक साल बीत जाने के बाद भी सेललुर इम्युनिटी से बचाव हो सकता है। इस पर अगर बूस्टर लग जाए तो यह काफी ताकतवर हो जाता है। जब कोरोना का खतरा आता है तो बूस्टर डोज लेना काफी जरूरी है।

जानिए बूस्टर डोज का नियम
डॉ. सत्येंद्र सिंह का कहना है कि एक डोज या डबल डोज लिए 12 महीने हो गए हैं तो बूस्टर डोज लगना चाहिए। इसे 9 महीने बाद भी लगाया जा सकता है। कोविशील्ड और कोवैक्सीन वालों के लिए उसी ग्रुप के वैक्सीन की बाध्यता नहीं है। वह कोई भी बूस्टर डोज ले सकते हैं।

अब तो प्रूफ हो गया है कि पहला डोज कोविशील्ड लिया है तो दूसरी डोज कोवैक्सीन का भी ले सकते हैं। बुजुर्ग और बीमार लोगों के लिए तो बूस्टर डोज 9 महीने बाद लग ही जाना चाहिए।

बूस्टर डाेज को लेकर अब तक कोई प्लान नहीं
बूस्टर डोज को लेकर सरकार की अभी कोई तैयारी नहीं है। प्लानिंग है कि कोरोना से बचाव को लेकर तैयारी की जा रही है कि लोगों को बूस्टर डोज दिया जाए। हालांकि माइक्रो वायरोलॉजी के पूर्व एचओडी डॉ सत्येंद्र सिंह का कहना है कि जो लोग वैक्सीन नहीं लिए हैं वह भी इसमें आगे आएं। अगर पहली डोज लिए हैं तो दूसरी डोज लगवाएं जिससे कोरोना का खतरा कम हो।

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