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सवालों के जवाब:लालू के वायरल ऑडियो मामले में जेल प्रशासन, कोर्ट, सरकार, विधानसभा अध्यक्ष क्या कर सकते हैं-क्या नहीं, के जवाब जानिये

पटनाएक वर्ष पहलेलेखक: बृजम पांडेय
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चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे लालू प्रसाद यादव के वायरल ऑडियो ने बिहार की राजनीति में सरगर्मी बढ़ा दी है। - Dainik Bhaskar
चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे लालू प्रसाद यादव के वायरल ऑडियो ने बिहार की राजनीति में सरगर्मी बढ़ा दी है।
  • वायरल ऑडियो के सत्यापन के बाद ही होगी कोई कार्रवाई
  • जेल प्रशासन को तय करना है कि फोन जेल में कैसे पहुंचा

जेल से लालू प्रसाद यादव की भाजपा विधायक ललन पासवान से हुई बातचीत को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। सवाल यह कि सजायाफ्ता लालू यादव के पास फोन कैसे पहुंचा? उनके सेवादार कैसे बात करा सकते हैं? लालू यादव जेल से किसी को प्रलोभन कैसे दे सकते हैं? इस वायरल ऑडियो पर कौन संज्ञान लेगा? इन तमाम सवालों के जवाब को तलाशने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने कानूनविदों और वरिष्ठ पत्रकारों से बात की कि आखिर इसमें किस तरह का प्रावधान लागू होता है?

क्या कोर्ट में जाएगा मामला

पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील शांतनु कुमार बताते हैं - पहले तो यह मामला कोर्ट में नहीं जाएगा। कोर्ट में गया भी तो जाने से पहले जेल प्रशासन को जेल मैनुअल के तहत कार्रवाई करनी होगी, मसलन जेल में फोन कैसे पहुंचा और यह फोन किसके नाम पर निर्गत है। जिसके नाम पर फोन निर्गत है वो सजायाफ्ता है या नहीं। इसके अलावा पहले जेल प्रशासन यह तय करेगा कि यह वायरल ऑडियो लालू यादव का है भी या नहीं। अगर जेल प्रशासन इस बात को मान लेगा कि यह लालू यादव का ऑडियो है तो इस पर जेल मैनुअल के उल्लंघन का केस दायर होगा। यदि जेल प्रशासन इस बात को मान लेता है कि यह ऑडियो लालू यादव का नहीं है तो फिर यह मामला पूरी तरह से बंद बक्से में चला जाएगा।

हालांकि लालू यादव को सीबीआई कोर्ट से सजा मिली है तो सीबीआई कोर्ट स्वतः संज्ञान लेकर इस मामले की जांच के आदेश दे सकता है। आदेश मिलने के बाद इस ऑडियो की फॉरेंसिक जांच होगी। यदि ऑडियो में कोई छेड़छाड़ नहीं की गई होगी तब उसे एविडेंस के तौर पर उतारा जाएगा। नहीं तो कोर्ट सीधे किसी ऑडियो को या डिजिटल एविडेंस को सबूत नहीं मानता है।

ऑडियो की पुख्ता जांच की जाएगी

शांतनु कुमार बताते हैं कि पहले यह पुख्ता किया जाएगा यह ऑडियो लालू यादव का है कि नहीं। उसके बाद उस फोन का लोकेशन कहां है और इसे पिछले कई दिनों से कौन लोग यूज कर रहे हैं यह पता लगाया जाएगा। जेल प्रशासन अपनी तरफ से यदि इसकी जानकारी कोर्ट को देगा तो इस मामले पर कोर्ट संज्ञान ले सकता है। इसमें सजा और जुर्माना दोनों तय किए जा सकते हैं या फिर उन्हें दूसरी जेल में शिफ्ट किया जा सकता है। हालांकि डिजिटल एविडेंस के तौर पर कोर्ट के सामने पूरी तरह से पुख्ता होकर ही सबूत पेश किये जाते हैं, ताकि गलती की कोई गुंजाइश ना हो।

प्रलोभन पर ऑडियो के सत्यापन के बाद बात

वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय बताते हैं, जो ऑडियो आया है उस पर पहले यह तय करना होगा कि ऑडियो सही है या गलत। जब ऑडियो का सत्यापन हो जाएगा उसके बाद ही लालू यादव के विधायक ललन पासवान से बातचीत में दिए गए प्रलोभन पर बात होगी। पहले यह तय होना जरूरी है कि वह ऑडियो सही है या गलत। उसके बाद ही विधायक ललन पासवान की बातों पर विश्वास किया जा सकता है।

रवि उपाध्याय यह भी बताते हैं कि अभी से लालू यादव के लिए यह कह देना यह उनका ऑडियो है और उन्होंने बात की है तो यह काफी जल्दबाजी होगी। क्योंकि लालू यादव की मिमिक्री करने वाले बहुत लोग हैं और वह हूबहू लालू यादव की तरह बात करते हैं। ऐसे में इस पूरे मामले की छानबीन प्रशासन कर ले, उसके बाद ही कोई टिप्पणी दी जा सकती है।

सुशील मोदी को मिल सकती है बड़ी जवाबदेही

लालू-ललन के ऑडियो को वायरल करने के पीछे सुशील कुमार मोदी हैं। इस विषय पर सुशील मोदी ने ट्वीट करने से ज्यादा कुछ नहीं कहा। वे बुधवार को बिहार विधान परिषद पहुंचे जरूर लेकिन मीडिया से कोई बात नहीं की। पूरे दिन सुशील मोदी के ट्वीट पर बवाल होता रहा। इधर के 10 वर्षों में लालू प्रसाद और उनके परिवार पर जितने बयान सुशील मोदी ने दिए हैं उतना किसी दूसरे नेता ने नहीं दिया। लालू पुत्रों पर तो उन्होंने सीरीज में प्रेस कॉन्फ्रेंस किया था। भाजपा के अंदर अपने विरोधियों को सुशील मोदी ने यह बता दिया है कि अभी भी उनमें दम है। बहुत संभव है कि इस खुलासे के बाद सुशील मोदी को भाजपा के अंदर बड़ी जवाबदेही मिल सकती है।

सदन की कार्यवाही पर असर नहीं पड़ेगा

इस मामले को सत्ता पक्ष ने खूब उछाला। यहां तक कि मंत्री मुकेश सहनी ने तो स्पीकर को बधाई देने के साथ ही कह दिया कि लोकतंत्र की दुहाई देने वाले आज कैसे लोकतंत्र की हत्या कर रहे है, यह लालू यादव के फोन से साफ हो गया। वैसे इस मामले को लेकर सदन की कार्यवाही पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। विधानसभा अध्यक्ष के पास यदि शिकायत भी जाती है तो वे कुछ नहीं कर सकते क्योंकि मामला कोर्ट में है और लालू यादव को कोर्ट ने सजा दी है।

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