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अब जिलों में पहुंची 'लोजपा' की लड़ाई:एक पार्टी के दो राष्ट्रीय अध्यक्ष-दो प्रदेश अध्यक्ष के बाद होंगे दो-दो जिलाध्यक्ष, जिन्हें चिराग ने दी थी जिम्मेदारी, उन्हें बदलेंगे पारस

पटना4 महीने पहलेलेखक: अमित जायसवाल
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लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) की लड़ाई में एक दिलचस्प मोड़ आ गया है। इस एक पार्टी के दो-दो राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। एक चिराग पासवान तो दूसरे बगावत करने वाले उनके सांसद चाचा पशुपति कुमार पारस। इस एक ही पार्टी के बिहार में दो प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। चिराग गुट ने पूर्व विधायक व पार्टी में टूट से पहले कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष का जिम्मा संभाल रहे राजू तिवारी को पूर्ण रूप से पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। जबकि, पारस गुट अभी भी सांसद प्रिन्स राज को अपना प्रदेश अध्यक्ष मान रही है। राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर यह लड़ाई अभी भी जारी है।

अब इसी बीच पशुपति कुमार पारस ने इस लड़ाई को और आगे बढ़ा दिया है। इस आग की आंच अब बिहार में जिला स्तर पर पहुंच गई है। वो अब बिहार में जिला स्तर पर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को ही बदलने में जुट गए हैं। पशुपति कुमार पारस अब नई कार्य समिति बनाने जा रहे हैं। वो अधिकांश जिलों में नए जिलाध्यक्ष बनाने वाले हैं। नामों का चयन भी अंतिम प्रक्रिया में है। बिहार में इस बड़े बदलाव के अलावा पारस गुट ने पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में भी अपना नया प्रदेश अध्यक्ष बनाने की ऐलान कर दिया है। वहां मीरा चक्रवर्ती की मौत के बाद से प्रदेश अध्यक्ष का पद खाली है। इस बात की पुष्टि उनके प्रवक्ता श्रवण अग्रवाल ने कर दी है।

रास नहीं आ रहे हैं चिराग के बनाए जिलाध्यक्ष
बिहार के सभी जिलों में जो वर्तमान जिलाध्यक्ष हैं, उनकी नियूक्ति चिराग पासवान के आदेश के बाद ही हुई थी। उस वक्त पशुपति कुमार पारस और प्रिन्स राज की सहमति भी प्राप्त थी। लेकिन, अब चिराग के बनाए वही जिलाध्यक्ष पारस गुट को रास नहीं आ रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि चिराग ने उन्हें जबरन पार्टी और कार्यकर्ताओं के उपर थोप दिया। पारस गुट के प्रवक्ता श्रवण अग्रवाल का कहना है कि काफी सारे जिलाध्यक्ष पूर्ण रूप से एक्टिव नहीं हैं। उन्हें अनावश्यक चिराग पासवान ने थोप दिया था। कई ऐसे जिलाध्यक्ष बनाए गए थे, जिन्हें पार्टी के कार्यकर्ता भी नहीं जानते हैं। जिन लोगों का संगठन पर कोई प्रभाव नहीं है, जिन्हें लोजपा के कार्यकर्ता नहीं जानते हैं। वैसे कई जिलाध्यक्षों को जल्द ही बदला जाएगा।

डरे हुए हैं चिराग, इसलिए कोर्ट जाने की बात कर रहे हैं
पारस गुट के प्रवक्ता का दावा है कि लोजपा उनकी है। पशुपति कुमार पारस ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनका दावा है कि पिछले हफ्ते पटना में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की मीटिंग और राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की जानकारी चुनाव आयोग को पहले ही दे दी गई थी। इसलिए पूरा भरोसा है कि पार्टी पर अधिकार का चुनाव आयोग का फैसला भी हमारे पक्ष में ही आएगा। इस बात की आशंका चिराग पासवान को भी है। इसी वजह से वो डरे हुए हैं और कोर्ट जाने की बात कर रहे हैं। जबकि, उन्हें चुनाव आयोग के फैसले के आने का इंतजार करना चाहिए। पार्टी के 90 प्रतिशत नेता और कार्यकर्ता पशुपति कुमार पारस के साथ हैं। चिराग आजीवन राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं रह सकते हैं। इस मामले पर चुनाव आयोग का जो भी फैसला आएगा, हमें मंजूर होगा।

वैध नहीं है पशुपति कुमार पारस का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद
जिलाध्यक्षों के बदलने के मामले पर चिराग पासवान गुट के प्रदेश प्रवक्ता राजेश भट्‌ट से बात की गई। सीधे तौर पर कहा कि पहले तो पशुपति कुमार पारस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना ही अवैध है। पहले तो उन्हें यह साबित करना होगा कि उनका राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना वैध है या अवैध। इस पर अभी चुनाव आयोग की मुहर नहीं लगी है। इस कारण उन्हें अधिकार नहीं है कि वो किसी भी जिलाध्यक्ष को अपनी मर्जी से बदल दें। जिलों में जिलाध्यक्ष पहले से ही हैं। लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ही हैं। पशुपति कुमार पारस को सिर्फ 9 लोगों का समर्थन मिला है। जबकि, अधिकांश लोग चिराग के साथ हैं। इस मामले में पूरी रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजी गई है। आयोग के फैसले का उन्हें इंतजार करना चाहिए।

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