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भूल गए जब मार्केट वीरान था, फिर चाह रहे लॉकडाउन:सब्जी मंडियों के दुकानदार और खरीदार- दोनों को लॉकडाउन का इंतजार; मास्क-दूरी इन्हें नहीं नजर आ रहा जरूरी

पटना/भागलपुर9 महीने पहले
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पहली तस्वीर भागलपुर सब्जीमंडी की और दूसरी पटना की मीठापुर सब्जी मंडी में लोगों की लापरवाह भीड़ की। - Dainik Bhaskar
पहली तस्वीर भागलपुर सब्जीमंडी की और दूसरी पटना की मीठापुर सब्जी मंडी में लोगों की लापरवाह भीड़ की।

कोरोना से बचाने के लिए लॉकडाउन लगा था। फिर लग सकता है। क्यों? यह जानने के लिए बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं है। अपने आसपास की सब्जी मंडियों पर नजर डालें तो खुद ही देख लेंगे। यहां वैसे दुकानदार हैं, जो भूल गए कि पिछली बार लॉकडाउन में 2-3 रुपए किलो भी सब्जी खरीदने कोई नहीं आ रहा था। भूल गए हैं कि बाजार बैठ गया था तो भूखे पेट मर रहे थे। यह मास्क लगाना जरूरी नहीं समझते, भले लॉकडाउन की नौबत आ जाए। लाख सख्तियों के बावजूद लोग सतर्कता बरतने को तैयार नहीं हैं। राज्य में अभी जो पाबंदियां हैं, वह लॉकडाउन का ट्रायल जैसी हैं, लेकिन कोरोना संक्रमण के खतरे को बढ़ाने वाली ऐसी ही डरावनी तस्वीरें आती रहीं तो लॉकडाउन की नौबत आनी ही है। समझने के लिए दो तस्वीरें आपकी नजर के सामने हैं। एक पटना की मीठापुर सब्जी मंडी की और दूसरी भागलपुर सब्जी मंडी की। बिना मास्क के सब्जी बेच-खरीद रहे लोगों की लापरवाह भीड़ कोरोना संक्रमण का बड़ा खतरा पैदा कर रही है।

शाम 7 बजे के बाद बंद रखनी हैं दुकानें
हाट बाजारों में भीड़भाड़ ना लगे, इसलिए सरकार ने आदेश जारी कर दिया है कि शाम 7 बजे तक किसी भी हालत में दुकानें नहीं खुलेंगी, लेकिन सब्जी मंडियों में जो भीड़ उमड़ रही है, वह सरकार के प्रयासों पर पानी फेर रही है। लोग यहां न तो मास्क पहने नजर आ रहे हैं और ना दो गज की दूरी ही इनके लिए जरूरी है। ऐसे में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि अगर किसी इलाके में कोरोना बम फूटेगा तो उसमें सब्जी मंडियों की भीड़ का बड़ा हाथ होगा।

फिर गाढ़ी कमाई के वाजिब दाम को तरस जाइएगा
याद कीजिएगा पहला लॉकडाउन। बाजार में सब्जियां लेकर आते थे, लेकिन महीनों खाद-पानी देकर तैयार की गई सब्जी को कोई खरीदने वाला नहीं आता था। इक्का-दुक्का लोग ही संक्रमण के डर के कारण बाहर निकल पाते थे। सुबह से शाम तक सब्जियां नहीं बिक पाती थीं तो टोकरी माथे पर रखकर उदास मन से घर लौटते थे। सब्जियों में आजकल उमड़नी वाली भीड़ फिर उसी मंजर को दोहराना चाहती है।

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