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मगध यूनिवर्सिटी में सीटों का अभाव:पीजी में दाखिले के लिए निर्धारित सीटों की तुलना में दोगुना आवेदन, बड़ी संख्या में स्टूडेंट रह सकते हैं एडिमशन से दूर

गया20 दिन पहले
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मगध यूनिवर्सिटी। - Dainik Bhaskar
मगध यूनिवर्सिटी।

पीजी की पढ़ाई का ख्वाब पाल रहे सभी स्टूडेंट की कवायद सफल नहीं हो जा रही है। कारण एमयू व उससे जुड़े कालेजों में मौजूद सीटों की तुलना में दोगुना से अधिक आवेदन का आना है। यह हाल तब है जब आवेदन के कुछ दिन अब भी शेष हैं। आवेदन की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद आवेदन करनेवालों की संख्या और भी बड़ी हो जाएगी।

मगध यूनिवर्सिटी में इतने कॉलेज

मगध यूनिवर्सिटी के 26 पीजी विभाग के अलावा गया कॉलेज गया, जेजे कॉलेज, गया एसएस कॉलेज, जहानाबाद और एसएन सिन्हा कॉलेज औरंगाबाद में पीजी की पढ़ाई होती है। हालांकि यूनिर्वसिटी संबंद्ध 15 और कालेज हैं। लेकिन, उन कॉलेजों में पीजी की पढ़ाई नहीं होती है। वहां इस तरह की सुविधा नहीं है। हालांकि तीन वर्ष पूर्व जब पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी नहीं बनी थी तो मगध यूनिर्वसिटी का दायरा थोड़ा बड़ा था लेकिन अब इसका दायरा सिमट गया है। अब मगध यूनिर्वसिटी व उससे जुड़े कॉलेजों में कला, विज्ञान व वाणिज्य विषयों और प्रोफेशनल कोर्सों को जोड़ कर करीब 7,388 सीटें ही तय हैं। इन सीटों की तुलना में नामांकन के लिए अब तक 20,000 से अधिक आवेदन यूनिवर्सिटी को प्राप्त हो चुके हैं।

पीजी कोर्स में सीटों का हाल

यूनिवर्सिटी में 26 स्नातकोतर विभाग में हैं। एसएन सिन्हा कॉलेज औरंगाबाद में 1,036, जेजे कॉलेज में 360, एसएस कॉलेज जहानाबाद में 310 और गया कॉलेज में 2,132 सीटें हैं।इधर यूनिवर्सिटी के डीएसडब्लयू आरपीएस चौहान का कहना है कि मेरिट बेसिस पर ही विद्यार्थियों को नामांकन का पहले मौका दिया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने बताया कोविड-19 की वजह से एमयू के विकास का काम काफी प्रभावित हुआ है। सीटों की वृद्धि के लिए सरकार से मांग की गई है। सरकार से स्वीकृति मिलते ही सीटों को बढ़ाया जाएगा।वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र नेता अमन मिश्रा का कहना है कि सीटों की वृद्धि के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन से बीते तीन वर्षों से लगातार मांग की जा रही है पर अब तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। ऐसे में छात्रों को पीजी की पढ़ाई के लिए दूसरे जिले या प्रदेश से बाहर जाना पड़ रहा है।

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