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'महारानी' वेब सीरीज पर नेशनल अवॉर्ड विनर की राय:विनोद अनुपम ने कहा-राबड़ी राज की इमेज बनाने, सवर्णों को नीचा दिखाने की कोशिश हुई; सभी सिंह-पांडेय-तिवारी को भ्रष्ट बताया

पटना2 महीने पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद

'हालिया रीलीज वेब सीरीज 'महारानी' पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी पर है। बिहारियों को अपमानित करने से लेकर सवर्णों को टारगेट पर लेने का काम इसमें खूब किया गया है।' यह कहना है राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त समीक्षक विनोद अनुपम का। उन्होंने ये बातें दैनिक भास्कर के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में कही। पढ़िए विनोद अनुपम से बातचीत के मुख्य अंश...

सवाल- महारानी वेब सीरीज की टाइमिंग पर सवाल उठ रहे हैं?
जवाब- बिहार में सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी RJD है। जिस तरीके से लालू प्रसाद के मैदान में नहीं रहते हुए भी उनकी पार्टी ने ताकत दिखाई है। यह सत्ता पक्ष भी मान रहा है। ऐसे समय में 'महारानी' वेब सीरीज के जरिए यह याद दिलाने और बताने की कोशिश है कि राबड़ी देवी का समय बिहार में बेहतर समय था। मेरा मानना है कि RJD के पास एक ही ऐसा चेहरा है, राबड़ी देवी का। लालू प्रसाद का चेहरा पहचान में आ चुका है। इसलिए राबड़ी देवी के फेस लिफ्ट के लिए यह वेब सीरीज बनाई गई।

सवाल- राबड़ी देवी के फेस लिफ्ट से क्या फायदा होगा?
जवाब- राबड़ी देवी की सरकार उस तरह से बदनाम नहीं हुई, जैसे लालू प्रसाद की सरकार हुई। दूसरी बात यह कि वीमेन एम्पावरमेंट की बात जब भी निकलती है और शक्तिशाली महिला मुख्यमंत्री की चर्चा होती है तो मायावती, ममता बनर्जी और राबड़ी देवी का नाम लिया ही जाता है। इन्हें हम नहीं छोड़ सकते। वीमेन सेंटीमेंट और एम्पावरमेंट की जो बात होती है वह पॉजिटिव बात होती है और यह कथा बनती है।

सवाल- वेब सीरीज में बिहार के साथ कितना न्याय किया गया है?
जवाब- बिहार का नाम है इसमें। बिहार के लोगों का भी नाम है। जिसने भी स्क्रिप्ट लिखी है, दावे के साथ कह सकता हूं कि बिहार की राजनीति और यहां के पॉलिटिकल लोगों की जरा सी भी समझ नहीं है। गर्वनर की तो कोई भूमिका ही सच में नहीं थी, पर इसमें दिखाई गई है।

सवाल- तो क्या इसमें सच और झूठ का कॉकटेल है?
जवाब- सच्चे कैरेक्टर लिए गए हैं और झूठी कहानी के अंदर उसको फिट कर दिया गया है। राजबाला वर्मा दिखती हैं, राबड़ी देवी भी दिखती हैं पर पूरी कहानी वही है जो निर्देशक ने चाहा है। कथाकार ने ईमानदारी जरा भी नहीं बरती है।

सवाल- सिनेमेटिक लिबर्टी को किस तरह से देखते हैं?
जवाब- सिनेमेटिक लिबट्री की एक सीमा होती है। आप एक काल्पनिक कथा कह सकते हैं पर राबड़ी के रुप में कैरेक्टर रख रहे हैं तो राबड़ी देवी के समय की बातें आनी चाहिए। सिनेमेटिक लिबर्टी के नाम पर आप संविधान नहीं बदल सकते। वित्त सचिव को किसी कॉमेडियन के रुप में नहीं दिखा सकते। वह प्रशासन में बड़े अफसर होते हैं।

सवाल- बिहार में जाति बड़ी चीज है। इसमें भी है। इसे किस तरह रखा गया है?
जवाब- वेब सीरीज को जिस तरह से गढ़ा गया है, उसमें यह साफ दिखता है। मेरा मानना है कि बिहार में जाति कभी उस तरह से नहीं रही। वेब सीरीज में रणवीर सेना को दिखाते हैं और उसे इतना पावरफुल दिखाते हैं कि ब्यूरोक्रेसी से लेकर राजनीति, और यहां तक कि राज्य के गवर्नर तक रणवीर सेना के प्रभाव में हैं। जातियों में सिंह, शर्मा, पांडेय, तिवारी का नाम ले-लेकर बताया जा रहा है कि वही सबसे भ्रष्ट हैं।

सवाल- अगड़ी जातियों को बेइज्जत करने की कोशिश की गई है?
जवाब- बेइज्जत तो नहीं कहेंगे, लेकिन टारगेट जरूर किया गया है। ऐसा किसी भी दौर में नहीं हुआ है कि सारे सवर्ण भ्रष्ट हों, सारे पिछड़े और दलित ईमानदार हों। महारानी की पार्टी के अध्यक्ष दयाशंकर पांडेय हैं। उनका डायलॉग है कि मेरी दो ही चीजों में दिलचस्पी है- रम और रंडी। ये अजीब तरह का मामला है। हाल के दिनों में देख लीजिए बलात्कार के जितने भी आरोप लगे हैं पिछड़ी जाति के विधायकों पर लगे हैं। सीरीज में दिखाया गया है कि राजनीति में सेक्स का घालमेल सवर्ण कर रहे हैं। टारगेट करने की कोशिश की गई है। इसलिए RJD की फेस लिफ्टिंग की कोशिश है कि अपने लोगों को कैसे इमोशनली जोड़ा जाए।

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