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मकर संक्रांति पर बाजार बेस्वाद:गया का मशहूर तिलकुट नहीं बिखेर सका अपनी खुशबू, बेतिया की पहचान मरचा चूड़ा की दुकानों पर भी सन्नाटा

पटना9 दिन पहले
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तिलकुट के लिए मशहूर है गया का रमना रोड। - Dainik Bhaskar
तिलकुट के लिए मशहूर है गया का रमना रोड।

बिहार में मकर संक्राति का पर्व दही, चूड़ा और तिल-तिलकुट के स्वाद के साथ मनाया जाता है। लेकिन, इस बार बाजारों में कोरोना काल के कारण वो रौनक नहीं दिखी, जो हर साल दिखती थी। महामारी में चूड़ा, दही और तिल-तिलकुट के कारोबार को प्रभावित किया है। कई जगह बाजार तो सजे हुए दिखे, लेकिन खरीदारों की भीड़ नहीं दिखी। तिलकुट के लिए मशहूर गया के रमना रोड में लोगों की संख्या तो दिखी, लेकिन खरीदारी ज्यादा नहीं हुई। दुकानदारों के मुताबिक ग्राहकों की कतार लगी रहती थी, लेकिन इस साल मकर संक्रांति पर वैसा नजारा नहीं दिख रहा है।

रस्म के लिए लोग खरीद रहे हैं तिलकुट
रमुना रोड के तिलकुट कारोबारी पप्पी गुप्ता ने बताया कि दूसरे जिलों से डिमांड जो अक्सर रहती थी, उसमें इस साल काफी कमी आई है । शहर का बाजार कुछ हद तक ठीक है। लेकिन दूसरे जिलों वाला प्रभावित हुआ है। लोग सिर्फ रस्म के लिए तिलकुट की खरीदारी कर रहे हैं। रमना और टेकारी रोड में ज्यादतर तिलकुट की ही दुकानें हैं। यहां मकर संक्रांति के दो दिन पहले से ही भीड़ लगी रहती थी। शाम होते-होते यहां की गलियों में बाइक ले जाने में भी समस्या होती थी। इस साल कोरोना महामारी की वजह से नजारा ही अलग देखने को मिला। दुकानें तो खुली हुई दिखी, तिलकुट की सोंधी महक फैलती रही। लेकिन खरीदार बड़ी संख्या में नजर नहीं आए। कई दुकानों पर सन्नाटा नजर आया। रमना रोड में करीब 35 साल से दुकान चला रहे रमेश साव कहते हैं कि पहली बार मकर संक्रांति के मौके पर बाजार की ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है। उन्होंने बताया कि हर साल यहां से विदेश भी तिलकुट भेजा जाता था। इस बार काफी कम हो गया है। हालांकि, तिलकुट की कीमत में बढ़ोतरी हुई है। चीनी का तिलकुट की कीमत ₹300 तक चली गई है। गुड़ का तिलकुट ₹280 प्रति किलो, खोवा तिलकुट ₹400 प्रति किलो, नारियल बुरादा का तिलकुट ₹300 प्रति किलो, सुखा मेवा का तिलकुट ₹500 प्रति किलो, केसर का तिलकुट ₹300 प्रति किलो कारोबारियों की ओर से बेची जा रही है।

मरचा चूड़ा की बिक्री में कमी
बेतिया जिले का मरचा चूड़ा भी लोगों में मशहूर है। दूसरे राज्यों में भी इसकी मांग रहती है। हर साल मकर संक्रांति के मौके पर इसकी बिक्री अधिक होती है। लेकिन, कोरोना महामारी की वजह से मार्केट में इस साल सन्नाटा है। दुकानों में भी भीड़ नहीं दिख रही है। कोरोना महामारी की वजह से बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां चली गई है। इसका भी असर बाजार पर है।ग्राहक की आस में मकर संक्रांति के मौके पर सुबह से ही दुकानें खुली दिखी। लेकिन, खरीददारों की तादाद कम ही रही। दुकानदार राकेश कुमार ने बताया कि हमलोगों को पहले से ही लग रहा था कि मकर संक्रांति पर भी कोराना महामारी का असर होगा। इसलिए दुकान में पहले की तुलना में कम माल मंगवाए थें। पिछले साल करीब 15 बोरा मरचा चूड़ा तो पड़ोस के जिलों में ही गया था। इस बार मांग ही नहीं है। वहीं, प्रवीण बर्णवाल बताते हैं कि यहां के बाजार में सबसे ज्यादा बिक्री चूड़ा की होती थी। तिलकुट तो बाहर से ही आता है। लेकिन, चूड़ा की मांग इस साल पहले की तुलना में नहीं रही। दूसरे राज्यों में तो चूड़ा का सप्लाई हुआ है, लेकिन दूसरे जिलों से मांग कम होने की वजह से दुकानदारों के चेहरे पर भी मायूसी है।

भागलपुर में बढ़ी बिक्री
वहीं, भागलपुर जिले के कतरनी चूड़ा की भी मकर संक्रांति के मौके पर मांग बढ़ जाती है। भागलपुर की मंडी से कतरनी चूड़ा और चावल दिल्ली, बनारस, पटना, लखनऊ सहित दक्षिण भारत के कई शहरों में भी जाता है। मकर संक्रांति में अंग क्षेत्र की कतरनी बिहार का पसंदीदा सौगात है। यहां से कतरनी चूड़ा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भी भेजी गई है। यहां के कारोबारियों का कहना है कि भागलपुर शहर में तो चूड़ा की बिक्री में कोई फर्क नजर नहीं आया है। हर साल की तुलना में इस बार ज्यादा लोग दुकानों पर आ रहे हैं। कोरोना महामारी में बड़ी संख्या में लोग ग्रामीण इलाकों में आए हैं। दुकानदारों का मानना है कि इस बार वे भी पसंदीदा कतरनी चूड़ा का स्वाद ले रहे हैं। इस वजह से बिक्री बढ़ी है।

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