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बांका के युवक की श्रीनगर आतंकी हमले में मौत:सुबह मां से फोन पर घंटों बात हुई, शाम को इसी फोन पर आई मरने की खबर

पटना3 महीने पहले
गांव में बिलखते परिजन।

कश्मीर के श्रीनगर के ईदगाह में शनिवार को हुए आतंकी हमले में बिहार के बांका जिले के बाराहाट निवासी अरविंद कुमार साव की भी मौत हो गई। मौत की सूचना शनिवार शाम उसी मोबाइल पर आई, जिस पर सुबह ही अरविंद घंटों मां से बात किया था।

अरविंद ने रात को दुकान से खाली होने के बाद फिर मां से बात करने का वादा किया था। आतंकियों की गोली ने उसे पूरा नहीं होने दिया। वह 10 साल से कश्मीर में गोलगप्पा की दुकान लगाता था। कश्मीर के हालात खराब थे तब भी वह वहीं रहा। जब हालात सामान्य हुए तो उसकी जान चली गई।

छीन लिया बड़ा सहारा

बांका के बाराहाट थाना क्षेत्र के लखपुरा परघड़ी गांव के देंवेद्र साव और उनकी पत्नी सुनैना देवी को 5 बेटे और एक बेटी है। इसमें दो बेटों की मौत हो चुकी है। बड़ा बेटे बबलू साव की अभी 5 माह पहले ही गांव में मौत हो गई है। एक बेटे की मौत पहले हो चुकी है। दो बेटों की मौत से देवेंद्र और सुनैना पहले ही टूट गए थे। अरविंद ही घर का बड़ा सहारा था।

वह 10 साल से कश्मीर में रहकर परिवार का खर्च चला रहा था। बूढ़े मां-बाप के साथ घर के 13 सदस्यों का खर्च अरविंद ही उठा रहा था। घटना के बाद घर वालों का हाल बेहाल हो गया है। बूढ़े मां-बाप के साथ परिवार के अन्य सदस्यों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

गांव के 10 लोग कश्मीर में लगाते थे दुकान

परघड़ी गांव के 10 लोग कश्मीर के श्रीनगर में रहकर फुचका (गोलगप्पा ) व अन्य खाद्य पदार्थों की दुकान लगाते थे। अरविंद साव 10 साल से श्रीनगर में था और गांव के सभी लोग एक साथ ही रहते थे। बड़े भाई बबलू साव की मौत के बाद अरविंद गांव आया था। भाई क्रिया कर्म के बाद वह 3 माह पहले बिहार से श्रीनगर गया था।

बड़े भाई की मौत के बाद परिवार की स्थिति को देखते हुए वह अपने भाई मंटू को भी साथ ले गया था। मंटू भी अरविंद के साथ गोलगप्पे का ठेला लगाता था। दोनों भाई के ठेला लगाने से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधर रही थी, लेकिन आतंकी हमले में परिवार का बड़ा सहारा छीन लिया है।

एक माह पहले तय हुई थी शादी
अरविंद कुमार साव की शादी एक माह पहले तय हुई थी। शादी की डेट अभी फाइनल नहीं हुई थी लेकिन घर में तैयारी चल रही थी। घर वालों का कहना है कि अगले अग्न में घर वाले अरविंद की शादी को लेकर पूरी तरह से तैयारी कर चुके थे। अब घर वालों का यही कहकर रोना है कि वह बेटे की शादी भी नहीं देख पा और आतंकियों ने उसे मौत के घाट उतार दिया।