उपचुनाव में दिल खोला, अब पार्टी ऑफिस का दोनों गेट:RJD के दोनों गेट खुलने पर लगाए जा रहे कई तरह के कयास

पटना3 महीने पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद
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राजनीति में दरवाजा खुलने और बंद होने की अलग-अलग कई कहानियां हैं। राजद ने विधान सभा उपचुनाव में महागठबंधन के अंदर कांग्रेस का दरवाजा बंद कर दिया था और अब जदयू के नजदीकी बढ़ती दिख रही है। इस सब के बीच बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राजद ने पटना स्थित अपने मुख्य कार्यालय का दोनों मुख्य गेट खोल दिया है। गेट पर से दरबान को भी हटा दिया गया है। बिहार की वर्तमान राजनीति में नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की नजदीकी जगजाहिर है। दोनों ने जाति जनगणना पर आपसी सहमति बना ली है। यह सहमति एनडीए की सहयोगी पार्टी भाजपा के विरोध के बावजूद है।

तेजप्रताप ने गेट बंद रखने के मनमाने रवैये पर जगदानंद सिंह को हिटलर कहा था

राजद के इसी गेट के बंद होने की वजह से भी लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने राजद प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह को हिटलर कहा था। अब चर्चा यह है कि तेजप्रताप के हिटलर चाचा ने जैसे तेजप्रताप यादव की सलाह देर से ही सही मान ली है और राजद कार्यालय का दोनों गेट खोल दिया है। महीनों से एक गेट तो पूरी तरह से बंद था और दूसरा गेट भी पूरी तरह से नहीं खुलता था। ये गेट तभी पूरी तरह से खुलते थे जब लालू प्रसाद यादव या तेजस्वी यादव पार्टी कार्यालय आते थे।

जगदानंद सिंह की गाड़ी भी बाहर लगती थी और श्याम रजक सहित उदय नारायण चौधरी सहित कई वरिष्ठ नेताओं की गाड़ियां भी कार्यालय के बाहर ही लगती थीं। हालांकि गाड़ियां अभी भी बाहर ही लगेंगी पहले की तरह, लेकिन दोनों गेटों को पूरी तरह से खोल देने का मतलब लोग कई तरह से लगा रहे हैं। क्या नीतीश कुमार को राजद मैसेज दे रहा है कि आपके लिए राजद ने दरवाजा खोल लिया है? क्या लालू प्रसाद आ रहे हैं ? क्या अब जिन अगड़ी जातियों के लिए दरवाजे बंद माने जाते थे उनके लिए खुल गए?

उन लोगों के पेट में दर्द हो रहा है जिनके मन का दरवाजा बंद था- राजद

भास्कर ने राजद के प्रवक्ता एजाज अहमद से बात की। वे कहते हैं कि सभी को पता है कि कोविड का कार्यकाल था और जब सब कुछ सामान्य हो गया तो राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष के निर्देश के बाद पार्टी कार्यालय का गेट खोल दिया गया है। कोविड कल ही खत्म हुआ है क्या? इस सवाल पर वे कहते हैं कि उन लोगों को दर्द हो रहा है जिनके मन का दरवाजा बंद था। मुद्दों के साथ यह दरवाजा खुला है। जातीय जनगणना पर सत्ता पक्ष और विपक्ष एकजुट है इसलिए जो विरोध करते रहे हैं जातीय जनगणना का उनके पेट में दोनों गेट खुलने से दर्द हो रहा है। वे कहते हैं कि आम और खास सभी कार्यकर्ता के लिए राजद का दरवाजा हमेशा खुला रहा है। मुद्दा दरवाजा नहीं है इसलिए किसी को बेचैन होने की जरूरत नहीं है।