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बिहार के गौरव- 2:बर्थडे, शादी और श्राद्ध पर पौधे लगवा रहे, ताकि हवा के लिए कल पीठ पर ऑक्सीजन सिलेंडर न लादना पड़े

पटना10 महीने पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद
  • बिहार में ट्री-मैन के नाम से मशहूर हो चुके हैं राजेश
  • जार में पौधा और उससे जुड़ा है ऑक्सीजन मास्क

22 मार्च को बिहार दिवस है। बिहार के निर्माताओं को उनके योगदान के लिए नमन करते हुए भास्कर ऐसी 10 शख्सियतों से रू-ब-रू करा रहा है, जो नई पहचान बने हैं। मिसाल बन रहे हैं। आज के हिसाब से नई पीढ़ी को जिनसे प्रेरणा मिल रही है। दूसरे दिन, आज जानें कि एक बिहारी को क्यों लोग अब ‘ट्री मैन’ कह रहे हैं-

पीठ पर पानी का बड़ा खाली जार। जार के अंदर पौधे और उससे निकली पाइप और मास्क नाक तक। इस जार को कंधे पर लेकर चलते हैं राजेश कुमार सुमन। यह सिम्बॉलिक है। ऐसा करते हुए वे लोगों को यह मैसेज देते हैं कि पौधे ऑक्सीजन देते हैं, प्रदूषण से बचना है तो पौधे जरूर लगाएं। नहीं तो आने वाले समय में बच्चे, बूढ़े हर किसी को पीठ पर ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर चलने की नौबत आ जाएगी। लंग्स कैंसर जैसी बीमारी से अलग जूझना पड़ेगा। राजेश कुमार सुमन मूल रूप से रोसड़ा के रहनेवाले हैं, लेकिन हर जगह घूम-घूम कर लोगों को संदेश देते रहते हैं। वे पौधे लगाने के लिए लोगों को नए तरीके से मोटिवेट कर रेह हैं। पिछले 5 वर्षों से वे इस अभियान को बड़े स्तर पर चला रहे हैं।

पौधरोपण अभियान को इमोशन से जोड़ा
वे बच्चों को उनके जन्मदिन पर पौधे देते हैं। लोगों को समझाते हैं कि जन्मदिन पर केक काटने के साथ ही पौधे गिफ्ट में दें। इससे जब पेड़ बड़े होंगे तो हर साल उस जन्मदिन की याद आएगी। पेड़ फल देंगे और यह खुशी कई गुणा बढ़ जाएगी। जन्मदिन के साथ ही वे शादी के मौके पर जहां भी जाते हैं वरमाला के समय वर-वधू को गमले में पौधे गिफ्ट करते हैं। पौधे देते हुए वे संकल्प भी कराते हैं कि इन पौधों की देखभाल भी उसी तरह से करेंगे जैसे अपने नए रिश्ते की। इस तरह बेटी तो ससुराल चली जाती है, लेकिन मायके में उसके हाथों लगाए गए पौधे रह जाते हैं। शादी के मौके पर फलदान की परंपरा रही है। सुमन लोगों को मोटिवेट करते हैं कि फलदान कार्यक्रम में दामाद को 5 तरह के फल के साथ ही 5 तरह के फलदार पौधे भी दें। इससे पौधों के बड़ा होने पर बेटी को सही मायने में फल का स्वाद मिल सकेगा। सुनीता कुमारी की शादी में 150 बाराती आए थे। सभी को आम का पौधा दिया गया। सुनीधि की शादी में 100 बारातियों को आम के पौधे दिए गए। इसके अलावा बच्चों के मुंडन कार्यक्रम में, श्राद्ध कर्म में भी वे पहुंचते हैं। लोगों से कहते हैं कि पूर्वजों की याद में 11 या 5 पौधे लगाएं। सुमन बताते हैं कि इस समय लगाए पौधे से लोगों का सेंटीमेंट काफी जुड़ता है और लोग उस पौधे की देखभाल अच्छी तरह से करते हैं।

बुके की जगह पौधे देने की परंपरा

सुमन शासन-प्रशासन के उच्चाधिकारियों से मिलते रहते हैं। मिलते वक्त वे अफसरों को पौधे गिफ्ट करते हैं और उनसे आग्रह करते हैं कि वे इसे लगाएं। वे अफसरों से यह आग्रह करते हैं कि इस परंपरा को आगे बढ़ाएं कि बुके की जगह पौधे दिए जाएं।

18 पौधे की फीस पर ग्रीन पाठशाला में पढ़ाते हैं बच्चों को
सुमन ग्रीन पाठशाला चलाते हैं। विनोद स्मृति स्टडी क्लब में बेटियों और गरीब बच्चों को प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कराते हैं। इसके लिए फीस के रूप में छात्र-छात्राओं से कुल 18 पौधे लगवाते हैं। 18 पौधे ही क्यों लगवाते हैं ? इस सवाल के जवाब में वे कहते हैं कि पूरे जीवन काल में 18 पेड़ जितना ऑक्सीजन उत्सर्जित करते हैं उतना मनुष्य जीवन भर में ऑक्सीजन ग्रहण करता है। वे बताते हैं कि अब तक 5 हजार बच्चों से पौधरोपण करवाया गया है। ग्रीन पाठशाला में 15 अगस्त और 26 जनवरी को सभी बच्चों को पौधे दिए जाते हैं कि वे अपने गांव में घर के आंगन या दरवाजा के बाहर या बगान में पौधरोपण करें। वे बताते हैं कि पहले सड़क किनारे पौधे लगाते थे, लेकिन उन्होंने पाया कि उन पौधों की देखभाल लोगों ने नहीं की। इसलिए पौधे को जब तक लोगों के सेंटीमेंट से नहीं जोड़ा जाएगा, यह पेड़ मुश्किल से बन पाएगा।

सेल्फी विद प्लांट का नया आइडिया
पौधे लगाने के लिए वे एक सेल्फी विद प्लांट अभियान भी चलाते हैं। लोग पौधे लगाते हुए सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर डालते हैं। बिहार के बड़े शहरों में ग्रीन यात्रा निकालकर लोगों में जागरुकता लाना भी उनकी मुहिम का हिस्सा है। पटना के बोरिंग रोड, पटना जंक्शन, सभ्यता द्वार के पास वे यह कैम्पेन चला चुके हैं। मुजफ्फरपुर, भागलपुर, बेगूसराय, खगड़िया, दरभंगा में भी ग्रीन यात्रा का आयोजन किया है।

समस्तीपुर और बेगूसराय में दो गांव गोद लिए
सुमन बताते हैं कि उन्होंने बिहार के बेगूसराय के रागी गांव और समस्तीपुर के आलमपुर गांव को गोद लिया है और यहां काफी संख्या में पौधे लगा रहे हैं। दोनों गांवों को वे ईको विलेज के रूप में डेवलप करना चाहते हैं। अब तक बेगूसराय में 300 पेड़ और समस्तीपुर में 150 पेड़ लगाए गए हैं। वे कहते हैं कि लोगों को एयरकंडिशन, वाशिंग मशीन और रेफ्रिजेटर के इस्तेमाल से बचना चाहिए। ये तीनों क्लोरो फ्लोरो कार्बन गैस निकालते हैं। इस गैस से ओजोन परत में छेद होने का खतरा है। ओजोन परत नष्ट हो गई तो पराबैगनी किरण लोगों को काफी नुकसान पहुंचाएगी।

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