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एक तीर से दो शिकार:कुशवाहा को ‘मेवा’ भी मिल गया और पदमुक्त किये जाने से नीतीश की छवि भी बन गई

पटना9 दिन पहलेलेखक: कुमार जितेंद्र ज्योति
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डॉ. मेवालाल चौधरी ने शिक्षा मंत्री का पद संभालने के ढाई घंटे बाद ही इस्तीफा दे दिया।
  • 2014 में भास्कर ने ही किया था तत्कालीन कुलपति डॉ. मेवालाल चौधरी के भ्रष्टाचार का खुलासा
  • जदयू ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया था, इस बार मंत्रीपद भी कुशवाहा जाति की वजह से मिला

सीएम नीतीश कुमार की सलाह पर राज्यपाल फागु चौहान ने शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी को पद से हटाने का फैसला किया है। उनका इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया गया है। ये है एक तीर से दो शिकार। डॉ. मेवालाल चौधरी का शिक्षा मंत्री के तौर पर आना और पद संभालने के ढाई घंटे के बाद ही इस्तीफा देना, दोनों ही जदयू के तीर का कमाल हैं।

जदयू के एक ही तीर ने यह दो कमाल किए हैं। RTI के जवाब के आधार पर दैनिक भास्कर ने 20 जुलाई, 2014 को प्रकाशित खबर में डॉ. मेवालाल के गोलमाल का खुलासा किया था। इस पर उन्हें जदयू से निलंबित किया गया था। इस बार चौधरी का आना और जाना, दोनों की वजह क्या रही- जवाब यहां है।

20 जुलाई 2014 को दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर।
20 जुलाई 2014 को दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर।

कुशवाहा में कोई विकल्प नहीं था, इसलिए दिया ‘मेवा’
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में एंटी इन्कम्बेंसी और लोजपा के कारण जदयू के कुशवाहा मंत्रियों को हार का मुंह देखना पड़ा। हालत यह हो गई कि नई सरकार के शपथ ग्रहण में कुशवाहा जाति से मंत्री देना मुश्किल हो रहा था। उधर, इस जाति को शामिल किए बिना सरकार बनाने पर नीतीश कुमार को भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता था। ऐसे में जदयू ने पिछला ट्रैक रिकॉर्ड जानते हुए भी कुशवाहा जाति से मंत्री के तौर पर डॉ. मेवालाल चौधरी को शामिल किया।

तीसरे चौधरी की इस गोटी को ‘लाल’ तो होना ही था, कारण भी जानिए
भास्कर ने मंत्रियों की सूची में नाम आने के साथ ही यह आशंका जाहिर कर दी थी कि नीतीश कुमार मंत्रिमंडल में तीसरे मेवालाल चौधरी का नाम देकर नीतीश कुमार ने अपनी ही किरकिरी करा ली है। भास्कर ने उनके ऊपर लगे आरोपों का ब्यौरा भी दिया था।

2014 में ऐसे हुई थी नियुक्तियों में गड़बड़ी

“बिहार के 18, दूसरे राज्यों के 87 को दे दी नौकरी” शीर्षक से दैनिक भास्कर में छपी खबर के बाद बिहार कृषि विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डॉ. मेवालाल चौधरी को हर तरफ से घेरा गया। विवि में गलत तरीके से की गई नियुक्तियों की जांच के लिए राजभवन से पहुंची टीम ने भी गड़बड़ियों की पुष्टि की।

टीम ने पाया था कि मेवालाल ने अपने साले के साथ बंद कमरे में नियुक्ति प्रक्रिया तय की थी और इसमें विवि के किसी अधिकारी को शामिल नहीं किया था। पूर्व जस्टिस मो. महफूज आलम ने जब पुरानी फाइलों को देखा तो उन्हें इस बात के भी सबूत मिले कि नियुक्त किए गए 161 में से 43 उम्मीदवारों को इंटरव्यू और प्रेजेंटेशन के लिए 10 में 10 अंक दिए गए थे।

जांच में पता चला कि एक खास इलाके और जाति के कई लोगों की नियुक्ति की गई थी। पश्चिम बंगाल के एक इलाके के खास समुदाय के लोगों की नियुक्ति पर भी सवाल उठे। इसलिए इस केस में पैसे लेकर नौकरी देने के एंगल से भी उम्मीदवारों के कागजात की जांच हुई। नियमों के खिलाफ जाकर विवि अधिकारियों के रिश्तेदारों को नौकरी देने को लेकर भी पूछताछ की गई थी।

मेवालाल पर हमलावर थे सुशील मोदी

चार साल पहले जब महागठबंधन की सरकार थी, तो भाजपा के सुशील कुमार मोदी ने कुलपति से जदयू विधायक बने डॉ. मेवालाल चौधरी के खिलाफ मोर्चा खोला था। उन्होंने नियुक्ति पदाधिकारी डॉ. आरबी वर्मा के बेटे और दामाद को अप्वाइंटमेंट लेटर जारी करने और चौधरी के साले को एक्सपर्ट मेंबर के तौर पर रखने पर हंगामा किया। भागलपुर के सबौर थाने में जब डॉ. मेवालाल चौधरी के खिलाफ FIR दर्ज हुई, तो जदयू ने विधायक रहते हुए उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया था। वह दाग धुला नहीं, लेकिन डॉ. मेवालाल चौधरी एक बार फिर जदयू के विधायक भी बने और कुशवाहा समाज के नाम पर मंत्री भी।

पद से साधी जाति, इस्तीफे से छवि बनाई

कुशवाहा जाति को मंत्रीपद देकर जदयू ने जातिगत समीकरण साध लिए थे। अब डॉ. मेवालाल चौधरी से शिक्षामंत्री पद संभालने के ढाई घंटे के बाद ही इस्तीफा लेकर यह संदेश भी तत्काल आ गया कि नीतीश कुमार छवि से समझौता नहीं करते। जदयू के महासचिव के. सी. त्यागी ने कह भी दिया है कि नीतीश कुमार राजनीति के आदर्शों से ज्यादा देर तक समझौता नहीं करते।

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