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विधायकों को जात पसंद है...:विधायक कर रहे चहेते अफसरों के ट्रांसफर की सिफारिश, सचिवालय के चक्कर काट रहे; परेशान होकर मंत्री अपने क्षेत्र की ओर निकल गए

पटना4 महीने पहलेलेखक: शालिनी सिंह
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सचिवालय में विभाग के पास पत्र लेकर पहुंच रहे हैं विधायक। - Dainik Bhaskar
सचिवालय में विभाग के पास पत्र लेकर पहुंच रहे हैं विधायक।

वोट जात-पात के लिए नहीं विकास के लिए कीजिए... ये जुमला चुनावी ही है। हम आपको इसकी याद इसलिए दिला रहे हैं क्योंकि चुनाव के वक्त नेताजी अपने वोटरों से यही अपील करते हैं। नेताजी, विधायक बनने के बाद असल में क्या कर रहे हैं, यह आज हम आपको बता रहे हैं।

बिहार के ज्यादातर विधायक इन दिनों सचिवालय के चक्कर काट रहे हैं। वे सिफारिश लेकर मंत्रियों के पास जा रहे हैं। विधायक अपने चहेते अफसरों की पोस्टिंग अपने क्षेत्र में करवाना चाहते हैं। उनके फेवरेट अफसर होने का मतलब है, उनकी जाति वाला अफसर। पैरवी करने वालों के पहुंचने का आलम यह है कि इससे परेशान ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार सचिवालय छोड़ क्षेत्र की ओर निकल गए हैं।

सचिवालय में विभाग का चक्कर लगाते नेताजी।
सचिवालय में विभाग का चक्कर लगाते नेताजी।

जून में BDO का बड़े पैमाने पर होता है ट्रांसफर

बिहार में जून ही वो महीना है जब प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) की ट्रांसफर-पोस्टिंग बड़े पैमाने पर की जाती है। इसमें विभागीय मंत्री का फैसला अंतिम होता है। यही वजह है कि विधायक खुद सचिवालय पहुंचकर ग्रामीण विकास मंत्री से मिलने की लगातार कोशिश कर रहे हैं।

पैरवी और आवेदनों के पहुंचने का ये आलम है कि इससे परेशान विभागीय मंत्री क्षेत्र की तरफ कूच कर गए हैं। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार का क्षेत्र पटना से 2 घंटे की दूरी पर स्थित नालंदा में है। मंत्री इन दिनों अपना पूरा दिन नालंदा में बिता रहे हैं, जहां से वो देर शाम पटना लौटते हैं। इसके बावजूद सिफारिश भरे पत्रों का सिलसिला कम नहीं हुआ है। सिफारिश करने वाले सचिवालय पहुंचकर विभाग में बंद लिफाफा सौंप रहे हैं।

क्यों चाहिए विधायकों को अपना फेवरेट BDO

विधायकों के लिए BDO का पद बेहद अहम होता है। इसकी वजह यह है कि प्रखंड स्तर की सभी विकास योजनाएं बीडीओ के नियंत्रण में संचालित होती हैं। पंचायती राज संस्थाएं भी उनसे निर्देशित होती हैं। अगर पसंद का बीडीओ रहे तो वह सरकारी धन के जरिए उन लोगों को उपकृत करता है, जो विधायक की मदद करते हैं। विकास योजनाओं से होने वाली आमदनी के बंटवारा में भी परेशानी नहीं होती है।

ज्यादातर विधायकों को स्वजातीय अफसर चाहिए

सरकार भी अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग में सामाजिक समीकरण का ख्याल रखती है, लेकिन विधायकों की जिद सरकार के लिए तब मुश्किल खड़ी कर देता है जब वो किसी दागी अफसर की पोस्टिंग की मांग करने लगते हैं। यही नहीं एक विधायक के क्षेत्र में कई प्रखंड होते हैं और हर प्रखंड में विधायक के स्वजातीय अफसर की पोस्टिंग नया विवाद खड़ा कर सकती है।

बताया जा रहा है कि विधायक कई ऐसे अधिकारियों की सिफारिश भी लेकर पहुंच रहे हैं जिनका मौजूदा पदस्थापन का कार्यकाल पूरा नहीं हुआ है। ये मामले विभाग के लिए सिरदर्द बन रहे हैं। ऐसा नहीं कि सिफारिश करने वालों में केवल सत्तारूढ़ दल के विधायक हैं, बल्कि विपक्षी दलों के विधायक भी सिफारिश लेकर पहुंच रहे हैं। सिफारिश करने वालों में दूसरे विभाग के मंत्री भी पीछे नहीं। पत्र भेजने वालों में कई मंत्रियों के नाम भी शामिल हैं ।

भास्कर के पास मौजूद सरकार के एक मंत्री द्वारा दिया गया सिफारशी लेटर।
भास्कर के पास मौजूद सरकार के एक मंत्री द्वारा दिया गया सिफारशी लेटर।

पोस्टिंग लिस्ट जारी होने की उल्टी गिनती शुरू है

बिहार में कुल 534 प्रखंड हैं और हर प्रखंड में एक प्रखंड विकास पदाधिकारी की नियुक्ति की जाती है। जून में हर साल बीडीओ की ट्रांसफर-पोस्टिंग की जाती है। माना जा रहा है कि मंगलवार देर शाम या बुधवार सुबह तक इनकी पोस्टिंग की लिस्ट सामने आ सकती है। हालांकि ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि विभाग विधायकों की सिफारिश पत्रों से सामने आईं उलझन को कितना सुलझा पाया है।

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