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यादें शेष:लॉकडाउन में फंसे मजदूर लौटे तो मनरेगा ही आया काम, रघुवंश प्रसाद ने की थी शुरुआत

पटना13 दिन पहले
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रघुवंश प्रसाद सिंह यूपीए-1 की सरकार में केंद्रीय मंत्री बने थे, फाइल फोटो।
  • यूपीए की पहली सरकार में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री थे रघुवंश प्रसाद सिंह
  • इस योजना में मजदूरों को कम से कम 100 दिनों का रोजगार देना सरकार की जिम्मेदारी है

राजद नेता और लालू के सबसे करीबियों में गिने जाने वाले रघुवंश प्रसाद सिंह ने रविवार सुबह इस दुनिया को अलविदा कह दिया। अपने सामाजिक कार्यों के लिए रघुवंश हमेशा याद किए जाएंगे। केंद्र सरकार में मंत्री रहते हुए उनके फैसलों में से एक है नरेगा है, जिसे बाद में नाम बदलकर मनरेगा कर दिया। इस योजना के तहत मजदूरों को कम से कम 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।

लॉकडाउन में फंसे मजदूर लौटे तो मनरेगा ही आया काम
वैसे तो बिहार के साथ पूरे देश के लोग कमाने के लिए गांव से शहर या महानगर की तरफ रुख करते हैं। लेकिन, लॉकडाउन में जब सारी फैक्ट्रियां बंद हो गई और मजदूर जब घर लौटे तो उन्हें मनरेगा का ही सहारा था। मनरेगा की वजह से ही लाखों मजदूरों को रोजगार मिला।

दुनिया की सबसे बड़ी राेजगार योजना बना मनरेगा

मनरेगा दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार योजना मनरेगा कहलाती है। इसके जनक थे रघुवंश प्रसाद सिंह। 2004 में जब केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार बनी तो उसमें रघुवंश प्रसाद केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री थे। सोनिया गांधी की अध्यक्षता में बनी राष्ट्रीय सलाहकार समिति ने रोजगार गारंटी कानून बनाने का प्रस्ताव पास किया। कानून बनाने की जिम्मेदारी श्रम मंत्रालय को दी गई। श्रम मंत्रालय ने छह महीने में हाथ खड़े कर दिए। बाद में ग्रामीण विकास मंत्रालय को कानून बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गईं।

रघुवंश प्रसाद ने सभी को राजी करके इसे लागू कराया

रघुवंश प्रसाद सिंह ने इस कानून को बनवाने और पास कराने में अहम भूमिका निभाई। कहा जाता है कि इस कानून को लेकर उस दौरान कैबिनेट में कई लोग सवाल खड़े कर रहे थे। रघुवंश प्रसाद सिंह ने इस कानून को लेकर कैबिनेट में लंबी बातचीत की और सबको राजी किया। आखिर में इसे पास कराने में कामयाब रहे। 2 फरवरी 2006 को देश के 200 पिछड़े जिलों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना लागू की गई। 2008 तक यह भारत के सभी जिलों में लागू की जा चुकी थी। राजनीतिक विश्लेषकों मानना है कि 2009 में इसी योजना ने कांग्रेस की सत्ता में वापसी कराई थी।

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