पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Bihar
  • Mohamad Shahbuddin Political Legacy For SON Osama; Problems For Osama In Siwan Political Situation; Bihar Political Latest News

सीवान की राजनीति में हलचल:RJD सुप्रीमो लालू चाहते हैं कि ओसामा संभालें विरासत, CM नीतीश के करीबी पूर्व विधायक के साथ घूम रहे हैं शहाबुद्दीन के दुश्मन खान ब्रदर्स

पटना10 दिन पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद
शहाबुद्दीन की विरासत को संभालने में ओसामा को हो सकती है मुश्किलें।

पूर्व सांसद और बाहुबली रहे शहाबुद्दीन के इंतकाल के बाद सीवान की राजनीति अब धीरे-धीरे करवट लेने लगी है। शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा पर RJD, JDU, AIMIM से लेकर समाजवादी पार्टी तक ने डोरा डाला, लेकिन ओसामा ने अब तक अपना पत्ता नहीं खोला है। ओसामा के पास राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का विकल्प खुला है। सूत्रों के अनुसार, RJD चाहती है कि वह शहाबुद्दीन की विरासत संभालें।

वहीं, जनता दल यूनाईटेड (JDU) के पूर्व विधायक श्याम बहादुर सिंह ने शहाबुद्दीन के विरोधी रईस खां का साथ देकर ओसामा की राह को कठिन कर दिया है। रईस खां की ताकत लगातार बढ़ रही है। सीवान के राजनीतिक कार्यकर्ता बताते हैं कि ओसामा 10 गाड़ियों के साथ कहीं जाते हैं तो रईस खां 20 गाड़ियों के साथ निकलते हैं। शक्ति प्रदर्शन की यह जोर-आजमाइश बढ़ती जाएगी।

सीवान में ढह गया है MY समीकरण

सीवान की राजनीति पहले ही RJD के हाथ से निकल चुकी है। हिना शहाब 2009, 2014 और 2019 में यानी तीन बार वहां से चुनाव हार चुकी हैं। शहाबुद्दीन की ताकत भी उन्हें चुनाव में जीत नहीं दिलवा सकी। RJD का MY समीकरण वहां ध्वस्त हो चुका है। ओम प्रकाश यादव 2009 में निर्दलीय चुनाव जीते और उसके बाद 2014 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते।

2019 में यह सीट JDU के कोटे में चली गई और ओम प्रकाश यादव ने JDU की उम्मीदवार कविता सिंह के सपोर्ट में काम किया। कविता सिंह चुनाव जीत गईं। कविता सिंह, अजय सिंह की पत्नी हैं। अजय सिंह JDU के दबंग नेता हैं।

यादवों की हत्या से बिगड़ गया सियासी गणित

शहाबुद्दीन और RJD के गढ़ सीवान में ऐसा क्या हुआ कि MY समीकरण गड़बड़ा गया। सीवान के लोग बताते हैं कि सीवान में बड़ी संख्या में यादवों की हुई राजनीतिक हत्या इसके पीछे का बड़ा कारण है। लोग मुसाफिर यादव, सामनारायण यादव, दीना यादव, छोटे लाल यादव, मुन्ना यादव और देवरंजन यादव पत्रकार की हत्या की कहानी इसी संदर्भ में सुनाते हैं। यादवों की इन हत्याओं ने शहाबुद्दीन का खेल बिगाड़ दिया और इससे RJD के MY समीकरण का पूरा गणित बिगड़ गया। इनमें से ज्यादातर यादवों की हत्या का आरोप शहाबुद्दीन पर लगा था।

दो धड़ों में बंट गई सीवान में मुस्लिम राजनीति

सीवान में एक तरफ शहाबुद्दीन गुट है और दूसरी तरफ रईस खान और अयूब खान हैं। रईस और अयूब शहाबुद्दीन के धुर विरोधी हैं। पिछली बार रईस खां के भाई चांद खा ने MLC का चुनाव लड़ा था, लेकिन भाजपा के टुन्ना पांडेय चुनाव जीत गए। अब रईस खां फिर से MLC के चुनाव में जोर आजमाइश करने वाले हैं।

चर्चा है कि रईस की मां या पत्नी को टिकट मिल सकता है। रईस खां जब दो दिन पहले सीवान पहुंचे तो वे JDU के पूर्व विधायक श्याम बहादुर सिंह के साथ देखे गए। श्याम बहादुर सिंह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी नेता हैं। रईस खां के काफिले में उनके समर्थकों ने नीतीश कुमार जिंदाबाद के नारे भी लगाए। रईस खान और अयूब खान के अपराध की कई कहानियों पड़ोसी राज्यों में भी सुनी जाती हैं।

शहाबुद्दीन के समर्थक AIMIM में भी नहीं जाना चाहेंगे

शहाबुद्दीन के समर्थक AIMIM में नहीं जाएंगे। वजह यह कि शहाबुद्दीन से ओवैसी के संबंध कभी बहुत अच्छे नहीं रहे। वह ओवैसी की टीम को भाजपा की बी टीम मानते थे। शहाबुद्दीन के समर्थक या उनके बेटे ओसामा ओवैसी की पार्टी का दामन थामेंगे, ऐसा नहीं लगता।

खबरें और भी हैं...