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चंडिका स्थान में मां के नेत्र पर होता है जलार्पण:52 शक्तिपीठों में से एक है मुंगेर का चंडिका स्थान; रात 12 बजे के बाद से 20 हजार श्रद्धालु कर चुके हैं जलार्पण के बाद हवन

मुंगेर2 महीने पहले
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मुंगेर के चंडिका स्थान में मां के नेत्र पर जलार्पण करने के लिए उमड़े श्रद्धालु। - Dainik Bhaskar
मुंगेर के चंडिका स्थान में मां के नेत्र पर जलार्पण करने के लिए उमड़े श्रद्धालु।

नवरात्रि के 9 दिन बहुत खास हैं। इनमें नवमी पूजा को पूर्णाहुति हवन का खास महत्व है। मुंगेर जिले के चंडिका स्थान में नवमी के दिन हर साल की तरह इस साल भी विशेष पूजा हुई। सुबह 4:00 बजे से ही हवन शुरू हो गया था। हालांकि, रात 12:00 बजे के बाद ही पूरे शहर के श्रद्धालु माता रानी के दर्शन के लिए यहां पहुंचने लगे। मंदिर के प्रधान पुजारी नंदन बाबा ने भास्कर से खास बातचीत कर नवमी को होने वाली विशेष पूजा व पूर्णाहुति को लेकर कई रोचक जानकारियां दीं।

चंडिका स्थान में पूर्णाहुति के लिए इकट्ठे होते हैं हजारों श्रद्धालु

नवमी को माता रानी के भक्त अपना व्रत पूरा करते हैं। व्रत पूरा करने के लिए भारत के 52 शक्तिपीठों में से एक सिद्ध शक्तिपीठ चंडिका स्थान के प्रांगण में दर्शन के बाद हवन करवाने की व्यवस्था की जाती है। पंडा समाज के लगभग 50 से अधिक पुजारी अलग-अलग स्थानों पर पूरे प्रांगण में हवन की व्यवस्था करते हैं। इस हवन पूर्णाहुति में श्रद्धालु अपने परिवार के साथ आ कर भाग लेते हैं। चंडिका स्थान में माता रानी के नेत्र का दर्शन कर जल अर्पण करने के बाद हवन जरूर करते हैं।

नवमी काे चंडिका स्थान में होती है विशेष पूजा : नंदन बाबा

चंडिका स्थान के प्रधान पुजारी नंदन बाबा ने भास्कर से बातचीत में बताया कि नवमी को चंडिका स्थान में विशेष पूजा होती है। रात 12:00 बजे के बाद से ही पूरे शहर के श्रद्धालु माता रानी के प्रांगण में माता रानी के दर्शन के लिए यहां पहुंचने लगते हैं। लगभग 50 हजार से अधिक श्रद्धालु माता रानी के दरबार में हाजिरी लगाकर मां के नेत्र पर जल अर्पण करते हैं।

घर जाकर नौ कन्याओं की पूजा कर श्रद्धालु पूरा करेंगे व्रत

नंदन बाबा ने बताया कि नवमी पूजा को व्रत पूरा होता है। इसलिए पंडा समाज ने हर साल की तरह इस बार भी प्रांगण में हवन की व्यवस्था की है। गुरुवार को सुबह से यहां पर 20 हजार से अधिक श्रद्धालु हवन कर चुके हैं। इसके बाद वे घर जाकर 9 कन्याओं की पूजा कर कपड़े देकर भोजन करवाएंगे। कन्या देवी का रूप होती है। इसलिए व्रत पूरा करने के लिए माता रानी के भक्त नौ कन्याओं का पूजन कर अपना व्रत पूरा करते हैं।

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