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मां काली बखोरापुर वाली मंदिर की कहानी, देखें VIDEO:159 साल पुराना है यह मंदिर, कभी पिंडी रूप में होती थी देवी की पूजा; नवरात्रि में उमड़ती है लाखों श्रद्धालुओं की भीड़

आरा2 महीने पहले
बखोरापुर वाली मां काली मंदिर।

अनलॉक-7 में 26 सितंबर से बिहार सरकार ने मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश की अनुमति दे दी है। नवरात्रि की शुरुआत भी 7 अक्टूबर से हो रही है। ऐसे में आज हम आपको बखोरापुर वाली काली मंदिर की कहानी बता रहे हैं। भोजपुर जिला के बड़हरा प्रखंड अंतर्गत बखोरापुर में मां काली का भव्य मंदिर है। यहां के महंत श्याम बाबा के अनुसार, 1862 के समय एक छोटा सा मंदिर था, जहां देवी पिंडी रूप में स्थापित थीं। 2003 में भव्य मंदिर का निर्माण किया गया और देवी की प्रतिमा को स्थापित किया गया। नवरात्रि के अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं की यहां भीड़ उमड़ती है।

इस मंदिर की कहानी अनेकों घटनाओं से जुड़ी हुई है।

मंदिर से जुड़ी है कई घटनाएं
महंत श्याम बाबा ने बताया कि एक कहानी के मुताबिक 1862 के समय में बखोरापुर गांव में हैजा फैला था। 500 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोग बीमार थे। उसी समय गांव में एक साधु ने प्रवेश किया। उन्होंने मां काली की पिंडी स्थापना करने की बात कही। साथ ही ये भी कहा कि ऐसा करने से यह बीमारी रुक जाएगी। साधु के कहने पर गांव के बड़े-बुजुर्गों ने नीम के पेड़ के पीछे मां काली की नौ पिंडी स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू कर दी। इसके बाद वो साधु चंद दिनों बाद अदृश्य हो गए। साथ ही हैजा गांव से धीरे-धीरे समाप्त हो गया।

आकाशवाणी के बाद दूसरे स्थान पर की गई पिंडी की स्थापना
महंत श्याम बाबा के अनुसार, जिस स्थान पर पिंडी स्थापना की गई थी, उसके बगल से नाला बहता था। कुछ दिनों बाद एक आकाशवाणी हुई, जिसमें यह सुनने को मिला कि मां की जो पिंडी है, उसे उस नाले के पास से हटाया जाए, नहीं तो मां यहां से चली जाएगी। लोगों का कहना है कि वो आकाशवाणी मां ने की थी। इसके बाद ग्रामीणों ने मां की पिंडी को वहां से दूसरे स्थान पर ले जाकर स्थापित किया। इसके बाद 1862 में ही वहीं उनका छोटा सा एक मंदिर बनाया गया। स्थापना के बाद गांव के लोग भव्य पूजा पाठ, कीर्तन महायज्ञ में लग गए। उस समय से ही मां बखोरापुर काली मां के नाम से प्रचलित है।

आरा रेलवे स्टेशन से लगभग 12 KM उत्तर बड़हरा प्रखंड के बखोरापुर गांव में मां काली का प्रसिद्ध मंदिर है।
आरा रेलवे स्टेशन से लगभग 12 KM उत्तर बड़हरा प्रखंड के बखोरापुर गांव में मां काली का प्रसिद्ध मंदिर है।

कहां हैं बखोरापुर मंदिर
आरा रेलवे स्टेशन से लगभग 12 KM उत्तर बड़हरा प्रखंड के बखोरापुर गांव में बखोरापुर मां काली का प्रसिद्ध मंदिर है। यहां जाने के लिए आरा रेलवे स्टेशन से और गांगी के पास से कई वाहन मंदिर तक जाने के लिए मिलते हैं। मंदिर के आसपास पूजा सामग्रियों की दुकानें और होटल समेत अन्य सुविधाएं भी हैं। जहां भक्तों के लिए हर संभव सहायता की जाती है। इसको लेकर मंदिर के महंत श्याम बाबा ने बताया कि बखोरापुर की मां काली एक ग्रामीण देवी है। यहां पर पूजा पाठ प्राचीन समय में घटित घटनाओं के समय से ही होती रही है। वहीं, ग्रामीण राम कुमार सिंह उर्फ बाघा सिंह ने बताया कि जब से यह मंदिर बना है, तब से गांव में लोग दूर-दूर से आते हैं। आप मां से जो भी मांगते हैं, वो मांग पूरी हो जाती है।

लोग मानते हैं मां की कृपा
2004 के अप्रैल में बखोरापुर मंदिर में राष्ट्रीय मां काली सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान लगभग दो लाख लोगों की भीड़ जुटी थी। इसी दौरान वहां मौजूद 32 फीट लंबा और 4 मीटर गोलाई लिए एक महुआ का पेड़ टूट कर जमीन पर गिर गया। इस पेड़ पर भी लगभग 200 से अधिक लोग बैठे हुए थे। किसी व्यक्ति को हल्की चोट भी नहीं लगी। कहा जाता है कि यह मां काली की ही कृपा थी कि इतनी बड़ी घटना होने पर भी सभी लोग सुरक्षित थे।

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